Leg Cramps: आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे रही है. पैरों में होने वाली ऐंठन इनमें से एक है. जी हां, कई लोगों को रात सोते समय पैरों में खुजली के साथ ऐंठन, झुनझुनी या पैरों के अंदर कुछ रेंगने जैसा एहसास होता है. कभी-कभी यह परेशानी तेज दर्द में भी बदल जाती है. परेशानी बढ़ने पर नींद लेनी तक मुश्किल हो जाती है. यह एक न्यूरोलॉजिकल विकार है. वैसे तो इस सिंड्रोम के सही कारणों का अभी तक पता नहीं लगाया जा सका है, लेकिन फिर भी माना जाता है कि पैरों में ऐंठन के सामान्य कारणों में व्यायाम, गर्भावस्था और इलेक्ट्रोलाइट व नमक का असंतुलन होना है.
किन लोगों के पैरों में ऐंठन की समस्या अधिक?
क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, आपकी उम्र जितनी ज़्यादा होगी, पैरों में ऐंठन होने की संभावना उतनी ही ज़्यादा होगी. ऐसा इसलिए है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ आपके टेंडन (आपकी मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ने वाले ऊतक) स्वाभाविक रूप से छोटे हो जाते हैं. महिलाओं में भी यह समस्या ज़्यादा होती है. 60% तक वयस्कों को रात में पैरों में ऐंठन होती है और 40% तक बच्चों और किशोरों में भी यह समस्या देखी जाती है.
किन विटामिन की कमी से पैरों में ऐंठन
विटामिन डी, बी12, बी1, आयरन, मैग्नीशियम और पोटेशियम की कमी भी पैरों में दर्द और ऐंठन का कारण बन सकता है. शरीर में इन विटामिन्स की कमी से आपको पैरों में सुन्नपन, झुनझुनी या थकान भी महसूस हो सकती है. ऐसे में अगर आपको ऐसी चीजों का सेवन करें इन पोषक तत्वों की पूर्ति कर सकें.
किस चीज के सेवन से क्या मिलेगा
विटामिन बी12: विटामिन बी12 की कमी को पूरा करने के लिए विटामिन बी6 और बी12 से युक्त चीजों का सेवन करना चाहिए. विटामिन बी12 के लिए अपनी डाइट में संतरा, अंगूर, सेब और कीवी जैसे खट्टे फलों और डेयरी प्रोडक्ट्स को शामिल करें. इसी के साथ मांस में भी विटामिन बी12 भरपूर मात्रा में पाया जाता है. वहीं विटामिन बी6 के लिए खमीर वाले खाद्य पदार्थ, साबुत अनाज, मछली और फलियों का सेवन करें.
विटामिन सी: किडनी से जुड़ी परेशानी की स्थिति में पैर ऐंठन की समस्या हो सकती है. ऐसे में विटामिन सी का भरपूर मात्रा में सेवन करने से किडनी को स्वस्थ और आरएलएस को नियंत्रित रखा जा सकता है. विटामिन सी के लिए अपनी डेली डाइट में नींबू, संतरा, आंवला, नारंगी, टमाटर, अंगूर जैसे खट्टे फल शामिल करें. साथ ही अमरूद, केला, सेब, मुनक्का, चुकंदर आदि का सेवन करें.
विटामिन डी: विटामिन डी की कमी से डोपामाइन डिसफंक्शन हो सकता है, जिसके कारण आरएलएस का जोखिम बढ़ सकता है. इसलिए विटामिन डी का सेवन करें. सुबह की धूप विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत है. इसी के साथ दूध, साबुत अनाज, संतरा, बेरीज, फैटी फिश, फिश ऑयल, मशरूम में भी विटामिन डी पाया जाता है.
विटामिन ई: किडनी की बीमारी आरएलएस रोग को ट्रिगर करती है. ऐसे में जरूरी है कि आप अपनी किडनी की सेहत का खास ध्यान रखें. विटामिन ई क्रोनिक किडनी रोग से पीड़ित लोगों के लिए महत्वपूर्ण है. बादाम और सूरजमुखी के बीज विटामिन ई से भरपूर होते हैं. वहीं पालक, एवोकाडो, टमाटर, कीवी, कद्दू, मूंगफली में भी विटामिन ई पाया जाता है.