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रोजगार की तलाश में बाहर मजदूरी करने की जगह अब युवा छोटे लेकिन स्मार्ट बिजनेस की ओर रुख कर रहे हैं. ऐसा ही एक उदाहरण अररिया जिले में देखने को मिल रहा है, जहां उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से आए युवक अलग-अलग शहरों और बाजारों में बैग बेचकर अच्छी कमाई कर रहे हैं. कम लागत और सीजनल डिमांड के सहारे यह कारोबार उन्हें हर महीने हजारों नहीं, बल्कि 50 से 60 हजार रुपये तक की आमदनी दे रहा है, जिससे उनका जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है.
अररिया जिले में इन दिनों उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से आए युवक बैग बेचकर अच्छी कमाई कर रहे हैं. ये युवक दिल्ली और कानपुर जैसे बड़े शहरों से बैग खरीदकर अररिया जिले के अलग-अलग इलाकों में बिक्री करते हैं और इससे उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है.
लोकल 18 से बातचीत में यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के रहने वाले आनस ने बताया कि वे एक से दो महीने के लिए अररिया जिले में रुककर बैग बेचते हैं. उन्होंने कहा कि दिल्ली और कानपुर से 200 से 300 रुपये में खरीदे गए बैग को वे अररिया में 500 से 600 रुपये प्रति पीस के हिसाब से बेचते हैं। इस तरह प्रति बैग उन्हें लगभग दोगुना मुनाफा मिलता है.
आनस ने बताया कि बैग की कीमत उसके डिजाइन और क्वालिटी पर निर्भर करती है. उनके पास 200 रुपये से लेकर 600 रुपये तक के अलग-अलग रेंज के बैग उपलब्ध रहते हैं, जिसकी वजह से हर वर्ग के ग्राहक आसानी से खरीदारी कर लेते हैं. वे अररिया जिले के फारबिसगंज, रानीगंज, अररिया मुख्यालय और भरगामा प्रखंड समेत कई इलाकों में अपनी अस्थायी दुकान लगाते हैं. इन जगहों पर बैग की अच्छी मांग रहती है, जिससे बिक्री भी बेहतर होती है.
आनस ने बताया कि इससे पहले वे दिल्ली में मजदूरी का काम करते थे, जहां महीने में 8 से 10 हजार रुपये की ही कमाई हो पाती थी, लेकिन बैग का यह कारोबार शुरू करने के बाद अब वे हर महीने करीब 50 से 60 हजार रुपये तक कमा लेते हैं। इससे उनका जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है. उन्होंने बताया कि वे सीजन के अनुसार अलग-अलग तरह का कारोबार करते हैं, जिससे सालभर अच्छी कमाई हो जाती है. अररिया जिले में इस तरह का छोटे स्तर का कारोबार प्रवासी युवकों के लिए रोजगार का बेहतर विकल्प बनता जा रहा है.
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