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कोरोना महामारी के बाद बिहार के युवाओं की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अब वे दूसरे राज्यों में 8-10 घंटे की नौकरी करने के बजाय अपने गांव और कस्बों में ही रोजगार के नए अवसर तलाश रहे हैं. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सारण जिले के नीतीश कुमार की है, जिन्होंने बाहर की नौकरी छोड़कर अपने गांव में जीरो कार्बन इन्वेंशन ड्राइव मशीन बनानी शुरू की. इस मशीन के जरिए न सिर्फ किसानों को फल-सब्जियों को सुखाकर बेहतर दाम मिल रहे हैं, बल्कि सैकड़ों युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है. रिपोर्ट- विशाल कुमार
बिहार के युवा अब दूसरे राज्य में जाकर किसी फैक्ट्री में 8-10 घंटा नौकरी करने के बदले अपने गांव-घर में और कस्बे में तरह-तरह के रोजगार कर रहे हैं. ये युवा फूड कार्ट लगाने से लेकर दुकान खोलने और फैक्ट्री लगाने तक का काम कर रहे हैं. कई युवा तो बढ़िया सफल हैं और अच्छी कमाई भी कर रहे हैं.
इतना ही नहीं वह अन्य बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने का भी काम कर रहे हैं. यह सिलसिला शुरू हुआ कोरोना महामारी के समय. किसी तरह से पैदल और ट्रकों में भूसे की तरह लदकर अपने घर लौटकर जब लोग अपने परिवार के पास पहुंचे तो उन्हें जीवन के मायने समझ आए. इसके बाद कई लोगों को परिवार की ऐसी आदत लगी कि वो अपने माता-पिता और बीवी-बच्चों से दूर रहने की जगह वहीं कुछ करने के बारे में सोचने लगे.
आज हम आपको एक ऐसे ही युवा के बारे में बताने जा रहे हैं जो आईटीआई करने के बाद पंजाब और हरियाणा जैसे दूसरे राज्य में काम कर रहा था. जब वह कोरोना के समय बिहार लौट तो उसने अपने साथ कई युवाओं की भी किस्मत बदली.
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हम बात कर रहे हैं दरियापुर प्रखंड के महमदपुर गांव निवासी नीतीश कुमार की. नीतीश कुमार फैक्ट्री में खास तरह की जीरो कार्बन इन्वेंशन ड्राइव मशीन बनाते थे. जब वह कोरोना के समय बिहार लौटे तब से हजारों युवाओं को अपनी मशीन के जरिए उन्होंने सैकड़ों लोगों को रोजगार दिया है.
नीतीश कुमार ने बताया कि जीरो कार्बन इन्वेंशन ड्राइव मशीन को वह खुद से अपने ही जिले में बनाते हैं. इस मशीन के जरिए फल और सब्जी को सुखा सकते हैं. इससे कमाई कर सकते हैं. इसमें फल और सब्जियों को सुखाकर दवा तैयार करने वाले कंपनियों को सूखे फल और सब्जी सप्लाई किए जाते हैं. इसकी अच्छी कीमत मिलती है. कैच अप इंडस्ट्री को टमाटर सुखाकर सप्लाई किया जाता है. कॉस्मेटिक कंपनी को गाजर सुखाकर सप्लाई किया जाता है. इस तरह से अलग-अलग कंपनियों को सूखे फल-सब्जी सप्लाई कर किसान अपनी आए बढ़ा सकते हैं. किसानों के लिए यह मशीन काफी लाभदायक है.
यह मशीन ऐसे किसानों के लिए भी उपयोगी है जिनके पास फल और सब्जी की पैदावार अधिक हो जाती है और मंडी में सही भाव नहीं मिलता. ऐसे किसान टमाटर और गाजर जैसे पालक आदि सब्जियों को सुखाकर उनकी बिक्री कर सकते हैं. नीतीश ने बताया कि इस मशीन का उनके पास पेटेंट है.
वह इसकी मैन्युफैक्चरिंग दरियापुर प्रखंड के महम्मदपुर गांव में करते हैं. सारण की धरती पर इस मशीन को बनाकर केरला, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, आसाम, बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में सप्लाई कर रहे हैं. इसकी कीमत महज 45 हजार है. उन्होंने बताया कि इस मशीन पर पीएम एफएम और पीएम ईजीपी के जरिए सब्सिडी ले सकते हैं. 35% इस मशीन पर किसानों को अनुदान मिल जाता है. जिसे लगाकर किसान तगड़ी कमाई कर सकते हैं.
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