दरभंगा : देसी मुर्गी पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जो कम समय में लोगों को धनवान बना सकता है. यह बाहर नौकरी करने से बेहतर व्यवसाय है. आज हम आपको दरभंगा जिले के एक ऐसे युवक के बारे में बताने वाले हैं. जो बाहर नौकरी छोड़कर आज गांव में ही देसी मुर्गी के पालन से बंपर कमाई कर रहा है. दरभंगा के इस युवक का नाम शशि रंजन कुमार ठाकुर है.
शशि रंजन कुमार पहले मुंबई में स्थित निजी अस्पताल में कंपाउंडर का काम किया करते थे, लेकिन उससे परिवार चलाना मुश्किल हो रहा था. फिर गांव आकर उन्होंने देसी मुर्गी पालन को एक नए स्तर पर ले जाकर दिखाया. जहां उनका फार्म स्वच्छ वातावरण में देसी मुर्गियों का पालन करता है. आज वह घर बैठे तगड़ी कमाई कर रहे हैं.
बता दें कि देसी मुर्गी में ताकत और पोषण की मात्रा अधिक होती है, जो फॉर्म या हाई नस्ल की मुर्गियों में नहीं होती है. देसी मुर्गी 7-8 महीने में अंडा देती है और जितना अधिक भोजन दिया जाता है, उतना अधिक अंडा देती है. देसी मुर्गा ₹400 किलो के हिसाब से बिकती है. जबकि अंडा देने वाली मुर्गी ₹220-230 किलो के हिसाब से बिकती है.
जानें इस देसी फार्म की विशेषता
शशि रंजन कुमार ठाकुर का फार्म पूरी तरह से स्वच्छ वातावरण में देसी मुर्गियों का पालन करता है. यहां मुर्गियों को गंदगी या गलत चीजें नहीं खिलाई जाती हैं, जिससे वे स्वस्थ और मजबूत रहती हैं. फार्म में मुर्गियों को संतुलित आहार दिया जाता है, जिससे वे अधिक अंडे देती हैं. .
जानें आमदनी और देसी मुर्गियों की डिमांड
देसी मुर्गी का व्यापार काफी अच्छा है. इससे अच्छी आमदनी होती है. आसपास के इलाके के लोग काफी संख्या में यहां खरीदारी के लिए आते हैं और अपने साथ देसी मुर्गी को लेकर जाते हैं. वहीं, फार्म की डिमांड इतनी अधिक है कि यहां मुर्गियों की कमी हो जाती है.
जानें क्या मिलती है सरकारी सहायता
देसी मुर्गी पालन के लिए सरकार भी सहायता प्रदान करती है. नाबार्ड मुर्गी पालन पर सब्सिडी देता है, जिससे किसानों को आर्थिक सहायता मिलती है. उन्होंने बताया कि देसी मुर्गी पालन एक स्वस्थ और लाभदायक व्यवसाय है, जो न केवल आमदनी प्रदान करता है, बल्कि लोगों को स्वस्थ और ताजा मुर्गी भी प्रदान करता है.
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