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कॉरपोरेट जगत की यह कहानी उस सीईओ की है, जिसने कंपनी के बुरे वक्त में अपनी लगभग 85 फीसदी सैलरी घटा दी. कर्मचारियों के साथ कैंटीन में लाइन में लगकर लंच किया. महंगी कार त्यागकर बस-ट्रेन से ऑफिस आना-जाना शुरू कर दिया.
कॉरपोरेट जगत में कई दिलचस्प किस्से और कहानियां हैं. यह कहानी दुनिया की एक बड़ी कंपनी के बड़े बॉस की है. बॉस आमतौर पर महंगे सूट पहनते हैं, आलीशान घरों में रहते हैं और करोड़ों की सैलरी उठाते हैं. इस बॉस के साथ भी ऐसा ही था. मगर जब कंपनी संकट में आई, तो इस बॉस ने जिस साहस और सादगी का परिचय दिया, वह अद्धुत था. कर्मचारियों में अपने बॉस के लिए इज्जत का लेवल बहुत ऊंचा हो गया. हम बात कर रहे हैं जापान एयरलाइंस (JAL) के सीईओ हारुका निशिमात्सु (Haruka Nishimatsu) की.
ट्रेन से करने लगे सफर, कैंटीन में खाया खाना
निशिमात्सु की सादगी की चर्चा पूरे जापान में होने लगी. सैलरी के त्याग के बाद उन्होंने अपने सीईओ पद के लिए मिली हुई कार और ड्राइवर को भी हटा दिया. वे रोजाना आम लोगों की तरह ट्रेन और बस से ऑफिस आने-जाने लगे. वो भीड़ में खड़े होकर अखबार पढ़ते, लोगों की मदद करते, और किसी को यह अहसास तक नहीं होता कि वह शख्स जापान की सबसे बड़ी एयरलाइन का बॉस है.
खाने के वक्त भी निशिमात्सु किसी खास कमरे या महंगे रेस्टोरेंट में नहीं जाते थे. वो JAL के कर्मचारियों के साथ कैंटीन में लाइन लगाकर खाना खाते थे. उनका लंच सादा होता था, जैसे करी-राइस या मिसो सूप, और वो कर्मचारियों से उनके काम, परिवार और परेशानियों के बारे में बात करते. धीरे-धीरे लोग कहने लगे, “वो हममें से ही एक हैं.” इस अपनेपन के चलते संकट के समय में भी कर्मचारियों का भरोसा कंपनी पर बना रहा.
दिवालिया हो गई कंपनी, सरकार ने उबारा
JAL की हालत उस समय बहुत खराब थी. भारी कर्ज था, उड़ानें घट रही थीं, और सबकुछ पुराने ढर्रे पर चल रहा था. तब निशिमात्सु ने कुछ कठोर फैसले लिए. उन्होंने कंपनी के खर्चों में कटौती की, रूट बदले, और सप्लायर्स संग नए समझौते किए. उन्होंने खुद उदाहरण पेश किया, ताकि बाकी कर्मचारी भी बदलाव के लिए तैयार हों. आखिरकार, 2010 में जब कंपनी ने दिवालियापन घोषित किया, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पद छोड़ दिया. बाद में सरकारी सहयोग से कंपनी फिर से खड़ी हुई और 2012 में मुनाफे में लौट आई.
मलखान सिंह पिछले 17 वर्षों से ख़बरों और कॉन्टेंट की दुनिया में हैं. प्रिंट मीडिया से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई नामी संस्थानों का नाम प्रोफाइल में जुड़ा है. लगभग 4 साल से News18Hindi के साथ काम कर रहे …और पढ़ें
मलखान सिंह पिछले 17 वर्षों से ख़बरों और कॉन्टेंट की दुनिया में हैं. प्रिंट मीडिया से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई नामी संस्थानों का नाम प्रोफाइल में जुड़ा है. लगभग 4 साल से News18Hindi के साथ काम कर रहे … और पढ़ें
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