सफेद छोड़ो… पर्पल, रेड और येलो आलू देखा क्या? जान लें कौन सा हार्ट को रखेगा हेल्दी, 1 तो बनाता है जवां

ज्यादातर घरों में आलू का मतलब सिर्फ सफेद आलू होता है, लेकिन अब वक्त आ गया है कि आप अपनी प्लेट में थोड़ा रंग भरें. रंगीन आलू, जैसे पर्पल, रेड और येलो आलू, न सिर्फ देखने में अलग होते हैं बल्कि सेहत के लिए भी किसी सुपरफूड से कम नहीं हैं. इनमें मौजूद नैचुरल पिगमेंट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में होने वाली सूजन को कम करने, कोशिकाओं को डैमेज से बचाने और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में अहम भूमिका निभाते हैं. यही वजह है कि न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स अब सफेद आलू की जगह रंगीन आलुओं को डाइट में शामिल करने की सलाह देने लगे हैं.

पर्पल आलू को खासतौर पर एंटी-एजिंग के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसका गहरा बैंगनी रंग एंथोसायनिन नाम के शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट की वजह से होता है, जो ब्लूबेरी और ब्लैकबेरी जैसे फलों में भी पाया जाता है. ये एंटीऑक्सीडेंट शरीर में फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम करता है, जिससे स्किन हेल्दी रहती है और झुर्रियों की रफ्तार धीमी हो सकती है. इसके अलावा पर्पल आलू ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और हार्ट हेल्थ सुधारने में भी मददगार माना जाता है.

रेड आलू भी पोषण से भरपूर होते हैं और सफेद आलू के मुकाबले इनमें फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है. ज्यादा फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है और पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे ओवरईटिंग की संभावना कम होती है. रेड आलू में विटामिन C और पोटैशियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है और मांसपेशियों की रिकवरी में मदद करता है. यही नहीं, इसके छिलके में मौजूद फाइटोन्यूट्रिएंट्स त्वचा की सेहत को भी सपोर्ट करते हैं.

येलो आलू की बात करें तो इनमें ल्यूटिन और ज़ीएक्सैंथिन जैसे कैरोटिनॉयड्स पाए जाते हैं, जो आंखों की सेहत के लिए बेहद जरूरी होते हैं. ये तत्व उम्र बढ़ने के साथ होने वाली आंखों की समस्याओं, जैसे मैक्युलर डिजेनरेशन, के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं. साथ ही येलो आलू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कुछ हद तक बैलेंस्ड माना जाता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ने से रोका जा सकता है, खासतौर पर जब इन्हें उबालकर या बेक करके खाया जाए.

रंगीन आलुओं की एक और खासियत यह है कि इनमें मौजूद पोषक तत्व पकाने के बाद भी काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं, खासकर जब इन्हें स्टीम या उबालकर खाया जाए. डीप फ्राई करने की बजाय अगर आप इन्हें रोस्ट, बेक या सब्जी के रूप में इस्तेमाल करें, तो इनके एंटी-एजिंग और हेल्थ बेनिफिट्स और भी ज्यादा मिलते हैं. साथ ही, छिलके के साथ आलू खाने से फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा बढ़ जाती है, इसलिए इन्हें अच्छे से धोकर छिलके समेत पकाना बेहतर विकल्प हो सकता है.

अगर आप उम्र बढ़ने की रफ्तार को धीमा करना चाहते हैं, तो सिर्फ स्किन केयर ही नहीं बल्कि डाइट पर ध्यान देना भी जरूरी है. रंगीन आलू आपकी डेली डाइट में आसानी से शामिल किए जा सकते हैं, चाहे वो सलाद में हों, हल्की सब्जी के रूप में या हेल्दी स्नैक की तरह. ये न सिर्फ आपकी प्लेट को रंगीन बनाते हैं बल्कि अंदर से शरीर को मजबूत और जवां बनाए रखने में भी मदद करते हैं. सफेद आलू की जगह अगर आप हफ्ते में कुछ दिन इन रंगीन आलुओं को चुनते हैं, तो इसका असर आपकी सेहत और एनर्जी लेवल पर साफ नजर आने लगेगा.

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