जानें अपने अधिकार- उपभोक्ता का प्राइवेसी का अधिकार: दुकानदार मोबाइल नंबर नहीं मांग सकता, सिर्फ इन 6 जगहों पर दें पर्सनल नंबर

2 घंटे पहलेलेखक: संदीप सिंह

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अक्सर दुकानदार बिल बनाते समय ग्राहकों से मोबाइल नंबर मांग लेते हैं। कई लोग इसे जरूरी समझकर अपना नंबर बता भी देते हैं। लेकिन सच यह है कि बिल बनाने के लिए मोबाइल नंबर देना अनिवार्य नहीं है।

सरकार और कानून साफ कहते हैं कि यह गलत तरीका है। हालांकि यह काफी चलन में है और अक्सर ग्राहकों पर थोपा भी जाता है, लेकिन यह सही प्रैक्टिस नहीं है। हर उपभोक्ता को बिना मोबाइल नंबर दिए भी बिल लेने का पूरा हक है और अपनी प्राइवेसी की रक्षा करना उसका अधिकार है।

तो चलिए, ‘जानें अपने अधिकार’ में बात करते हैं कि क्या दुकानदार ग्राहक से मोबाइल नंबर लिए बिना भी बिल देने के लिए बाध्य है? साथ ही जानेंगे कि-

  • अगर दुकानदार मोबाइल नंबर मांगे तो क्या करें?
  • नियम तोड़ने वाले दुकानदार की शिकायत कहां करें?

एक्सपर्ट: सरोज कुमार सिंह, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट

सवाल- दुकानदार मोबाइल नंबर क्यों मांगते हैं?

जवाब- अक्सर आपने देखा होगा कि किसी दुकान से सामान खरीदते समय कैशियर या सेल्समैन आपसे मोबाइल नंबर मांगता है। वह कहता है कि ऑफर भेजने हैं, बिल पर प्रिंट करना है या लॉयल्टी पॉइंट्स के लिए जरूरी है।

असल में दुकानदार या बड़ी कंपनियां ग्राहक का मोबाइल नंबर लेकर अपना डेटाबेस तैयार करती हैं। बाद में इन्हीं नंबरों पर मार्केटिंग मैसेज भेजे जाते हैं, डिस्काउंट या ऑफर प्रमोट किए जाते हैं, कॉल करके प्रोडक्ट बेचने की कोशिश की जाती है।

कई बार यह डेटा थर्ड पार्टी कंपनियों को भी बेच दिया जाता है। यही वजह है कि आपको अनजाने नंबरों से कॉल, SMS या वॉट्सएप मैसेज आने लगते हैं। यही आपके प्राइवेसी अधिकार का उल्लंघन है क्योंकि आपने अपनी निजी जानकारी केवल खरीदारी के लिए दी थी, न कि विज्ञापन और मार्केटिंग के लिए।

सवाल- क्या उपभोक्ताओं को अपनी निजी जानकारी की सुरक्षा का हक है?

जवाब- हां, उपभोक्ता अधिकारों के तहत प्राइवेसी भी एक अहम हक है। कंपनियां या सर्विस प्रोवाइडर आपकी पर्सनल जानकारी (जैसे मोबाइल नंबर, पता, बैंक डिटेल्स) का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकते। किसी भी तरह का डेटा शेयर करने से पहले आपकी सहमति जरूरी है। अगर प्राइवेसी का उल्लंघन होता है तो आप कानूनी शिकायत कर सकते हैं।

सवाल- क्या दुकानदार बिल देने के लिए मोबाइल नंबर मांग सकते हैं?

जवाब- भारत में ग्राहकों को बिल लेने का हक है और इसके लिए मोबाइल नंबर देना जरूरी नहीं है। अगर कोई दुकानदार कहता है कि बिना नंबर के बिल नहीं मिलेगा तो यह ‘अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice)’ माना जाएगा, जो कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत गलत है।

सवाल- अगर कोई ग्राहक मोबाइल नंबर देने से मना करे तो क्या दुकानदार बिल देने से मना कर सकता है?

जवाब- नहीं, दुकानदार बिल देने से मना नहीं कर सकता। हर ग्राहक को सामान खरीदते समय बिल लेना और दुकानदार को देना दोनों ही जरूरी है। बिल आपके लिए खरीद का सबूत होता है और इसी के आधार पर आप रिटर्न, वारंटी या शिकायत कर सकते हैं। अगर दुकानदार बिल देने से इनकार करता है तो वह कानून का उल्लंघन कर रहा है और उसकी शिकायत उपभोक्ता फोरम या संबंधित विभाग में की जा सकती है।

सवाल- कब मोबाइल नंबर देना जरूरी हो सकता है?

जवाब- अक्सर दुकानदार बिल बनाते समय या खरीदारी के दौरान ग्राहकों से मोबाइल नंबर मांग लेते हैं। कई बार लोग समझ नहीं पाते कि यह जरूरी है या सिर्फ एक औपचारिकता। सच यह है कि हर खरीदारी पर मोबाइल नंबर देना अनिवार्य नहीं है। ग्राहक चाहें तो मना कर सकते हैं।

लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में मोबाइल नंबर देना व्यावहारिक और जरूरी हो सकता है। जैसे अगर आपने सामान घर मंगवाया है तो होम डिलीवरी के लिए नंबर जरूरी होगा या किसी इलेक्ट्रॉनिक आइटम की गारंटी/वारंटी रजिस्ट्रेशन में नंबर की जरूरत पड़ सकती है।

इसके अलावा कभी-कभी कंपनियां प्रोडक्ट रिकॉल या सर्विस अपडेट के लिए भी ग्राहक से संपर्क करती हैं। इन सब परिस्थितियों में भी सबसे अहम बात यह है कि ग्राहक की सहमति जरूरी है। अगर आप नहीं चाहते तो कोई भी दुकानदार आपको मजबूर नहीं कर सकता है।

सवाल- अगर दुकानदार जबरदस्ती करे तो क्या करें?

जवाब- अक्सर ऐसा होता है कि दुकानदार बिल बनाने या सामान देने से पहले ग्राहक पर दबाव डालते हैं कि वह अपना मोबाइल नंबर बताए।

कई बार ग्राहक झिझकते हैं और मजबूरी में नंबर दे देते हैं। लेकिन यह जानना जरूरी है कि किसी भी हालत में मोबाइल नंबर देना आपकी मजबूरी नहीं है। अगर कोई दुकान इस नियम को नहीं मानती तो आप कार्रवाई कर सकते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्या दुकानदार मेरे डेटा का गलत इस्तेमाल कर सकता है?

जवाब- नहीं, किसी भी दुकानदार या कंपनी को आपके मोबाइल नंबर, ईमेल या अन्य निजी जानकारी का मनमाने तरीके से इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। भारत में अब दो बड़े कानून आपकी प्राइवेसी की रक्षा करते हैं।

कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019

इसके तहत दुकानदार अगर आपको बिल देने से मना करता है या आपकी सहमति के बिना जानकारी मांगता है तो यह अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) माना जाएगा।

डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023

यह नया कानून साफ कहता है कि आपकी सहमति के बिना आपका डेटा स्टोर, शेयर या थर्ड पार्टी को बेचना गैरकानूनी है। अगर कोई दुकानदार आपके डेटा का गलत इस्तेमाल करता है तो उस पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। ग्राहक को भी हक है कि वह शिकायत दर्ज कर अपने अधिकार की रक्षा करे।

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