Success Story: 700 लगाकर 2000 रोजाना! बरौनी के अरविंद पटेल से जानें कम बजट बिजनेस के लिए बेस्ट टिप्स

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Success Business Idea: बरौनी जंक्शन पर अरविंद पटेल रोज 700 रुपए की लागत से लिट्टी-चोखा बेचकर 2000 रुपए से ज्यादा कमाते हैं. मेहनत और स्वच्छता से उनका बिजनेस सफल है.

बेगूसराय: आपने रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को अक्सर लिट्टी-चोखा खाते हुए और इसे बेचने वाले फेरीवालों को देखा होगा. थाली में दो लिट्टी, ऊपर से छोखा और प्याज-नींबू सजाकर बेचते ये लोग यात्रियों की भूख मिटाते हैं. लेकिन इस छोटे से बिजनेस में कितनी बड़ी कमाई छिपी है, यह शायद ही आपने सोचा होगा. लोकल 18 स्पेशल में आज हम बरौनी जंक्शन पर ऐसे ही लिट्टी-चोखा बेचने वाले अरविंद पटेल से बातचीत की, जिनकी कहानी खुद में एक बिजनेस टिप्स है और जीवन संघर्ष की कहानी भी. देखिए यह प्रेरणादायक रिपोर्ट.

लोकल 18 से बरौनी जंक्शन पर अरविंद बताते हैं कि महज 700 रुपए की लागत से उनका रोज का धंधा चलता है. ये स्टॉल एक ठेकेदार से लेते हैं. फिर इस पूंजी से वे स्टॉल लगाते हैं और सुबह सात बजे करीब 200 पीस लिट्टी-चोखा तैयार कर स्टेशन लेकर आते हैं. देर रात तक यात्रियों को परोसते हुए उनका स्टॉक लगभग पूरा बिक जाता है. एक लिट्टी छोखा की कीमत 15 रुपए है और अधिकतर यात्री एक बार में 2 पीस (30 रुपए) खरीदते हैं. इससे रोजाना उनकी कमाई 2000 रुपए से ज्यादा हो जाती है, यानी छोटी लागत पर कई गुना मुनाफा.

मेहनत, समय और स्वच्छता पर फोकस

अरविंद सुबह 6 बजे से लेकर रात 11 बजे तक लगातार यात्रियों को सेवा देते हैं. उनका मानना है कि इस काम में सफलता के लिए मेहनत और स्वच्छता दोनों जरूरी हैं. ग्राहक तभी बार-बार आते हैं जब उन्हें साफ-सुथरा खाना परोसा जाए. वे बताते हैं कि स्टेशन पर कितनी ट्रेन रुक रही है या भीड़ कितनी है, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि यात्रियों की भूख हर हाल में उनकी थाली तक पहुंचा ही देती है.

ठेकेदार पर निर्भरता, रेलवे से मांग

फिलहाल अरविंद को ठेकेदार से रोजाना 700 रुपए देकर ही स्टॉल लगाने का मौका मिलता है. उनकी लोकल 18 के जरिए मांग है कि रेलवे प्रशासन सीधे वेंडरों को पास जारी करे, ताकि बिचौलियों पर निर्भर न रहना पड़े. उनका कहना है कि मेहनत तो हम करते हैं, फिर कमीशन ठेकेदारों को क्यों जाए.

सीख क्या है?

अरविंद की कहानी से यह साफ है कि कम पूंजी में भी बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है. सही सोच, मेहनत और समय प्रबंधन से एक छोटा स्टॉल भी रोजगार और आत्मनिर्भरता की राह खोल सकता है.

Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले… और पढ़ें

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