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Birth Control Pill Breast Cancer: एक अध्ययन में दावा किया गया है कि महिलाएं अगर कॉम्बिनेशन हार्मोन वाली बर्थ कंट्रोल गोलियों का रेगुलर सेवन करती हैं तो इससे ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ सकता है.
Birth Control Pill Breast Cancer: महिलाओं में सबसे ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर की बीमारी होती हैं. डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक 2022 में 23 लाख महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर हुआ जिनमें 6.70 लाख महिलाओं की मौत हो गई. लेकिन क्या गर्भनिरोध गोलियां खाने से कैंसर हो सकता है. एक रिसर्च की मानें तो ऐसा हो सकता है. रिसर्च में कहा गया है कि कॉम्बिनेशन वाली हार्मोन की गोलियां जिससे बच्चे को होने से रोका जाता है,को रेगुलर खाने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. आज की डेट में बर्थ कंट्रोल पिल्स महिलाओं को सबसे अधिक प्रिस्क्राइब की जाने वाली दवाएं हैं. लाखों महिलाएं प्रेग्नेंसी से बचने के लिए कंट्रासेप्टिव पिल्स का यूज करती हैं. इससे बच्चे होने की टेंशन खत्म होती है जिससे मन को शांत मिलती है. लेकिन क्या ये महिलाओं के लिए यह आगे आने वाली परेशानियों का सबब है. क्या इससे कैंसर हो सकता है. एक भारतीय मूल के अमेरिकी डॉक्टर कुणाल सूद ने इस बारे में सोशल मीडिया पर अगाह किया है.
क्या सच में ब्रेस्ट कैंसर होता है
मैरीलैंड के जर्मनटाउन में प्रैक्टिस कर रहे एनेस्थेसियोलॉजी और इंटरवेंशनल पेन मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. कुणाल सूद ने महिलाओं के मन में मौजूद इस महत्वपूर्ण सवाल का जवाब इंस्टाग्राम वीडियो में दिया है. वे बताते हैं कि क्या आप जानते हैं कि कॉम्बिनेशन बर्थ कंट्रोल पिल्स को ग्रुप-1 कार्सिनोजेन के रूप में वर्गीकृत किया गया है. कार्सिनोजेन का मतलब होता है कैंसरकारक चीजें. तो क्या बर्थ कंट्रोल पिल्स कैंसर को बढ़ावा देती हैं. दरअसल, बर्थ कंट्रोल पिल्स और कैंसर के बीच संबंध को लेकर लंबे समय से भ्रम बना हुआ है. डॉ. सूद के अनुसार असलियत अधिक जटिल है. इसके जोखिम तो हैं लेकिन इसके साथ ही महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक लाभ भी हैं. उन्होंने कहा कि अध्ययन बताते हैं कि इनके यूज के दौरान ब्रेस्ट और गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर के जोखिम अधिक होते हैं, लेकिन वे ओवेरियन, एंडोमेट्रियल और कोलोरेक्टल कैंसर के खिलाफ लंबे समय तक सुरक्षा भी दिखाते हैं.
इस दवा के फायदे भी कम नहीं
डॉ. सूद ने यह भी बताया कि कॉम्बाइंड बर्थ कंट्रोल पिल्स को 2005 से ही कैंसर कारक के रूप में पहचाना गया है. 2007 में WHO की कैंसर एजेंसी ने सबूतों के आधार पर उन्हें औपचारिक रूप से ग्रुप-1 कार्सिनोजेन के रूप में वर्गीकृत किया. इसमें कहा गया था कि ये गोलियां कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकती हैं. उदाहरण के लिए जो महिलाएं वर्तमान में पिल ले रही हैं, उनमें स्तन कैंसर का जोखिम 24% अधिक है. अगर वे 10 साल या इससे अधिक वर्षों से इसे खा रही हैं तो उनमें सर्वाइकल कैंसर का रिस्क दोगुना है. लेकिन अच्छी बात यह है कि जैसे ही महिलाएं ये दवा खाना बंद कर देती है वैसे कैंसर का जोखिम भी कम हो जाता है. एक अच्छी बात और है कि ये गोलियां ओवेरियन कैंसर के जोखिम को 30–50% तक कम करती हैं. वहीं एंडोमेट्रियल कैंसर में 30% कमी और कोलोरेक्टल कैंसर में 20% तक कमी कर देती है. वास्तव में इन दवाओं का इस्तेमाल जब पीरियड्स बहुत ज्यादा पेनफुल हो जाता है, तब भी किया जाता है. इसके अलावा PCOS और एंडोमेट्रियोसिस की बीमारी में भी ये दवा बेहद कारगर है. डॉ. कुणाल सूद ने बताया कि इसलिए इस दवा पर ग्रुप-1 लेबल सही है, लेकिन यह एकतरफा जोखिम को नहीं दर्शाता.किसी महिला में ब्रेस्ट कैंसर के लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य, परिवार के इतिहास और पिल्स कैसे उपयोग की जाती हैं, उस पर निर्भर करती है.
Excelled with colors in media industry, enriched more than 19 years of professional experience. Lakshmi Narayan is currently leading the Lifestyle, Health, and Religion section at News18. His role blends in-dep…और पढ़ें
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