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Success Story: मध्यप्रदेश के मऊगंज की प्राची पटेल ने झोपड़ी से निकलकर मेडिकल कॉलेज तक का सफर तय किया है, कोटा में निशुल्क शिक्षा और शिक्षकों के सहयोग से उसने नीट 2025 पास किया, अब वह गांव की पहली डॉक्टर बनेगी, …और पढ़ें
झोपड़ी से मेडिकल कॉलेज तक – कैसे कोटा ने बदल दी प्राची की जिंदगीप्राची का परिवार झोपड़ी जैसे घर में रहता है और हमेशा आर्थिक तंगी से जूझता रहा है, लेकिन इन हालातों ने उसके हौसले को कम नहीं किया, बल्कि मजबूत बनाया, बचपन से ही पढ़ाई में होनहार प्राची ने डॉक्टर बनने का सपना देखा और उसी को सच करने की ठान ली, प्राची पटेल का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है, वह झोपड़ीनुमा कच्चे घर में रहती है, परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था लेकिन हालात ने उसके हौसले को कभी तोड़ा नहीं, उसने डॉक्टर बनने का सपना देखा और हर मुश्किल के बावजूद पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखा.
शिक्षा संबल कार्यक्रम के तहत प्राची का चयन हुआ और उसे कोटा में निशुल्क शिक्षा का अवसर मिला, प्राची कहती है कि कोटा जैसे शिक्षक कहीं नहीं मिलते, क्लास हो या डाउट काउंटर हर जगह फैकल्टीज ने पूरा सपोर्ट किया, यही कारण है कि नीट 2025 में उसने 720 में से 467 अंक हासिल किए और ओबीसी-एनसीएल कैटेगरी में 46215वीं रैंक पाई
सफलता का सफर
प्राची की ऑल इंडिया रैंक 95488 रही और अंक के आधार पर उसका चयन राजकीय श्याम शाह मेडिकल कॉलेज रीवा में हुआ, जैसे ही खबर गांव पहुंची तो जश्न का माहौल बन गया, परिवार और गांव के लोगों ने मिठाई बांटकर खुशी मनाई
प्रेरणा बनी प्राची
प्राची कहती है कि उसकी सफलता पूरी तरह कोटा के शिक्षकों को समर्पित है, उनके मार्गदर्शन ने ही सपनों को पंख दिए, यह कहानी उन बेटियों के लिए भी प्रेरणा है जो कठिन हालातों में रहकर भी बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं
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