साल 2012 में फोटोग्राफी की दुनिया के सबसे बड़े नाम ‘कोडक’ ने खुद को दिवालिया घोषित किया. तब कुछ लोगों को लगा कि उसी तरह की एक दूसरी कंपनी फुजीफिल्म के साथ भी शायद वैसा ही हो. सामने से आंधी चल रही थी, मगर फुजीफिल्म के अधिकारियों को खास फर्क नहीं पड़ा. यह वही दौर था जब डिजिटल कैमरों और स्मार्टफ़ोन ने रील (Film) वाले कैमरों का वजूद मिटा दिया था. जिस रील के बिजनेस से फुजीफिल्म अपनी 70 प्रतिशत कमाई करती थी, वह अचानक जीरो हो गई थी. हर कोई मान चुका था कि अब फुजीफिल्म का नाम भी इतिहास के पन्नों में खो जाएगा, जैसे कि कोडक के साथ हुआ था. लेकिन आज फुजीफिल्म न सिर्फ जिंदा है, बल्कि उसकी वैल्यू पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ चुकी है. ऐसा कैसे संभव हुआ? फुजीफिल्म ने खुद को कैसे जिंदा रखा, जबकि उससे भी बड़े नाम मिट्टी हो चुके थे. कहानी दिलचस्प है.
फुजीफिल्म की शुरुआत 1934 में जापान में हुई थी. तब इसका मकसद जापान के लोगों के लिए बेहतरीन फोटोग्राफिक फिल्म बनाना था. सालों तक इसने कोडक जैसी अमेरिकी कंपनी से लोहा लिया. 1980 और 90 के दशक में जापान में फुजीफिल्म के हरे डिब्बे वाली रील हर घर की पसंद बन चुकी थी. शादी हो या छुट्टियां, लोग फुजीफिल्म की रील ही खरीदते थे. कंपनी का मुनाफा आसमान छू रहा था, मानो पैसा छापने की मशीन चौबीसों घंटे घनघना रही हो. लेकिन साल 2000 के करीब ‘डिजिटल क्रांति’ का एक तूफान उठा, जिसने ऐसी कंपनियों का सबकुछ उड़ा डाला. लोग अब रील वाले कैमरों की जगह डिजिटल कैमरे पसंद करने लगे थे. रील का बाजार हर साल 20 से 30 प्रतिशत की रफ्तार से गिर रहा था. फुजीफिल्म के पास सिर्फ दो रास्ते थे, या तो हाथ पर हाथ रखकर कोडक की तरह मृत्यु का इंतजार करे या खुद को पूरी तरह बदल डाले.
कॉस्मेटिक और हेल्थकेयर की तरफ मुड़ी कंपनी
उस वक्त कंपनी की कमान शिगेताका कोमोरी के हाथों में थी. उन्होंने एक बहुत ही हिम्मत वाला फैसला लिया. उन्होंने अपनी रिसर्च टीम से एक सवाल पूछा, “क्या हमारी रील बनाने वाली तकनीक का इस्तेमाल कहीं और हो सकता है?” इंजीनियर्स ने इसी सवाल को आधार बनाकर खोज शुरू की. महीनों की मेहनत के बाद एक उन्होंने बताया कि जिस तरह कैमरा रील को खराब होने से बचाने के लिए कोलेजन (Collagen) का इस्तेमाल होता है, वही कोलेजन इंसान की स्किन को जवान रखने के काम आता है. कैमरा फिल्म बनाने में ऑक्सीकरण यानी सड़ने से बचाने वाली जो तकनीक लगती है, वही एंटी-एजिंग क्रीम में भी काम आ सकती है. फिर क्या था… कोमोरी को अपनी कंपनी बचाने का रास्ता मिल गया था. उन्होंने करोड़ों डॉलर का रिस्क लिया और अपनी पूरी लैब को कॉस्मेटिक्स और हेल्थकेयर की तरफ मोड़ दिया.
यह एक बड़ा जुआ था. जो साइंटिस्ट कल तक रील के रंगों पर काम कर रहे थे, वे अब चेहरे की झुर्रियां मिटाने वाली क्रीम बना रहे थे. फुजीफिल्म ने एस्तालिफ्ट (Astalift) नाम से अपना स्किनकेयर ब्रांड लॉन्च किया. लोग हैरान थे कि कैमरे वाली कंपनी क्रीम क्यों बेच रही है, लेकिन जब रिजल्ट सामने आए तो सबकी बोलती बंद हो गई. फुजीफिल्म ने पाया कि उनकी नैनो-टेक्नोलॉजी, जो फिल्म पर बारीकी से रंग चढ़ाती थी, वह दवाइयों को शरीर के अंदर सटीक जगह पहुंचाने में भी माहिर थी. देखते ही देखते उन्होंने कैंसर की जांच करने वाली मशीनें और नई दवाइयों पर काम करना शुरू कर दिया. उन्होंने अपनी पुरानी ताकत को छोड़ा नहीं, बल्कि उसे नए रूप में ढाल लिया.
कोडक अड़ा रहा, फुजीफिल्म ने किया सच का सामना
इस बदलाव के बीच एक टाइम ऐसा भी आया, जब कंपनी के अंदर काफी विरोध हुआ. पुराने कर्मचारियों को लग रहा था कि कंपनी अपनी पहचान खो रही है. लेकिन कोमोरी अडिग थे. उन्होंने साफ कर दिया था कि हमें अपनी पहचान बचाने के लिए खुद को मिटाना होगा. उन्होंने उन फैक्ट्रियों को बंद करना शुरू किया, जो घाटे में चल रही थीं और सारा पैसा नई तकनीक में झोंक दिया. जहां कोडक इस बात पर अड़ा रहा कि दुनिया फिर से रील की तरफ लौटेगी, वहीं फुजीफिल्म ने मान लिया था कि पुरानी दुनिया खत्म हो चुकी है और फिर से रील का दौर नहीं आएगा. फुजीफिल्म ने अपनी रील बनाने वाली मशीनों का इस्तेमाल एलसीडी स्क्रीन के लिए लगने वाली पतली फिल्म बनाने में भी किया. आज दुनिया के आधे से ज्यादा स्मार्टफोन और टीवी स्क्रीन में फुजीफिल्म की तकनीक का इस्तेमाल होता है, लेकिन आम ग्राहक को इसके बारे में पता भी नहीं चलता.
MRI, CT स्कैन मशीनें, सेमीकंडक्टर मैटीरियल
फुजीफिल्म का मुख्यालय टोक्यो, जापान में स्थित है. वर्तमान में कंपनी के CEO तेइची गोटो (Teiichi Goto) हैं. आज फुजीफिल्म में दुनियाभर में लगभग 72,000 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं और इसकी 270 से ज्यादा सब्सिडियरी कंपनियां हैं. अधिकतर लोग फुजीफिल्म को सिर्फ कैमरे और फोटो फिल्म बनाने वाली कंपनी के रूप में जानते हैं. लेकिन समय के साथ यह एक बड़ी मल्टी-सेक्टर कंपनी बन चुकी है.
आज फुजीफिल्म का सबसे बड़ा कारोबार हेल्थकेयर सेक्टर में है. इस क्षेत्र में कंपनी MRI, CT स्कैन मशीनें, एंडोस्कोप और दवाइयों से जुड़े उत्पाद बनाती है. इसके अलावा फुजीफिल्म सेमीकंडक्टर मैटीरियल भी तैयार करती है, जिनका इस्तेमाल AI चिप्स बनाने में किया जाता है. इमेजिंग सेगमेंट में कंपनी के इन्टैक्स कैमरे और X-Series व GFX-Series के प्रोफेशनल कैमरे काफी लोकप्रिय हैं. साथ ही बिजनेस इनोवेशन के तहत कंपनी प्रिंटर और ऑफिस से जुड़े कई समाधान भी उपलब्ध कराती है.
3 सालों से लगातार रिकार्ड मुनाफा
अगर कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो वित्त वर्ष 2025 (अप्रैल 2024 से मार्च 2025) में फुजीफिल्म की कुल सालाना बिक्री लगभग 21 अरब डॉलर रही. यह पिछले साल के मुकाबले करीब 8 प्रतिशत अधिक है. इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध मुनाफा लगभग 1.7 अरब डॉलर रहा. खास बात यह है कि यह लगातार तीसरा साल था, जब कंपनी ने अपने प्रदर्शन का नया रिकॉर्ड बनाया.
कुल मिलाकर फुजीफिल्म एक ऐसी कंपनी बन चुकी है जिसने खुद को केवल फोटो-फिल्म के पुराने कारोबार तक सीमित नहीं रखा. समय के साथ कंपनी ने हेल्थकेयर और नई तकनीकों में कदम बढ़ाकर खुद को सफलतापूर्वक बदल लिया है.
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