जाने-अनजाने में ट्रंप ने कर दी भारत की मदद, 60 अरब डॉलर की इंडस्ट्री को दे दिया बड़ा तोहफा


H-1B Visa: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा के लिए फीस को बढ़ाकर 100,000 डॉलर कर दिया है. इस फैसले का असर उन लाखों भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा, जो अमेरिका आकर काम करने का सपना देखते हैं. अब अगर कोई अमेरिकी कंपनी H-1B वीजा पर किसी विदेशी कर्मचारी को अमेरिका लाना चाहेगी, तो उसे 100,000 डॉलर की फीस चुकानी होगी.

नया नियम 21 सितंबर 2025 से लागू होगा. अमेरिकी कंपनियां बड़े पैमाने पर भारत और चीन जैसे देशों से लोगों की हायरिंग करती है. इन्हें अमेरिका H-1B वीजा पर ही काम पर लाया जाता है. ज्यादातर  H-1B वीजा होल्डर भारतीय ही हैं.  2023 में इश्यू किए गए 386,000 H-1B वीजा में से 72.3 भारतीयों के थे. 

बिना फीस चुकाए नहीं मिलेगी एंट्री

व्हाइट हाउस की तरफ से यह साफ-साफ कह दिया गया है कि H-1B वीजा के लिए 100,000 डॉलर की फीस चुकाए बिना काम के सिलसिले में अमेरिका आने वाले विदेशियों को एंट्री नहीं मिलेगी. फीस नहीं चुकाने पर अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग और विदेश विभाग किसी भी H-1B वीजा होल्डर कर्मचारी को प्रवेश करने से मना कर देंगे. इस फीस का भुगतान सालाना एकमुश्त करना होगा. इसे रिन्यू कराने पर या मौजूदा वीजा होल्डर को इसके लिए यह फीस नहीं देनी होगी. इससे बेशक आईटी कंपनियों को कुछ राहत मिली है, लेकिन असमंजसता की स्थिति अब भी बनी हुई है.

लुटनिक के बयान से मची खलबली 

अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने कहा, “अब यह कंपनियों को तय करना है क्या विदेश से किसी इंजीनियर को लाने के लिए एक लाख डॉलर देना व्यावसायिक रूप से सही है या नहीं. अगर नहीं है तो उन्हें वापस भेज दो और उनकी जगह एक अमेरिकी को काम पर रख लो.”

भारतीय प्रोफेश्नल्स के लिए H-1B लंबे समय तक अमेरिका में रहकर उनके काम करने का एक जरिया है. सीधी-सीधी बात है कि ट्रंप के इस कदम से भारतीय आउटसोर्सिंग को बड़ा झटका लगा है, लेकिन इसमें एक पेंच है. ट्रंप का यह फरमान भारत के 60 अरब डॉलर के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) इंडस्ट्री के लिए फायदे की बात भी हो सकती है. GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव का कहना है कि H-1B वीजा के लिए फीस बढ़ाने से  भारत से ज्यादा अमेरिका को नुकसान होगा. 

कैसे होगा भारत को फायदा? 

दशकों से भारतीय पेशेवर अमेरिका में इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम की रीढ़ रहे हैं. ईटी ऑनलाइन से बात करते हुए अजय श्रीवास्तव ने बताया, इस भारी-भरकम फीस के चलते बेशक ऑन-साइट भारतीयों को नियुक्त करना महंगा हो जाएगा. इससे कंपनियां या तो विदेश में अपने ऑपरेशंस बढ़ा देगी या भारत से रिमोट तरीके से काम लेंगी. हर बार जब अमेजन, गूगल या मेटा जैसी कंपनियां H-1B वीजा पर वर्कर्स को लाते हैं, तो अब नए नियम के साथ उनके लिए भी स्पॉन्सशिप महंगा हो जाएगा.

मुंबई स्थित मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के आंकड़ों के मुताबिक, कारोबारी साल 24 में इन बड़ी टेक फर्मों और कॉग्निजेंट तथा कैपजेमिनी जैसी आईटी मल्टीनेशनल कंपनियों की अप्रूव्ड H-1B वीजा में 57 परसेंट हिस्सेदारी थी. अब फीस बढ़ने से कंपनियां प्रतिभाशाली विदेशी कर्मचारियों के साथ काम करने के लिए विदेशों या भारत में अपने कारोबार का दायरा बढ़ा सकती है. इसके अलावा, भारतीय युवा प्रोफेश्नल्स अमेरिका मूव करने की जगह देश में काम करने या नए-नए ऑप्शंस को ढूंढ़ने में अधिक तरजीह देंगे.   

 

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