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देशभर में कुत्तों से संबंधित मामलों ने हाल के दिनों में लोगों का ध्यान खींचा है. जहां कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश हैं, वहीं कुत्तों के हमलों और काटने की घटनाओं ने आम लोगों में चिंता बढ़ा दी है. खासकर जिन इलाकों में कुत्तों की संख्या अधिक है, वहां लोगों के लिए सावधानी और समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी हो गया है.

इन दिनों देश भर में कुत्ते चर्चा का विषय बने हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से कुत्ता प्रेमियों में खुशी का माहौल रहा, वहीं इनके आतंक से लोग बहुत परेशान भी नजर आ रहे हैं.

प्रयागराज में अगर किसी को कुत्ते ने काट या चाट लिया है और उन्हें इंजेक्शन लगवाना है, तो तेज बहादुर सप्रू अस्पताल और काल्विन अस्पताल में इसका इंजेक्शन लगाया जाता है.

इन दोनों जिला अस्पतालों के साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी कुत्ते काटने का इंजेक्शन लोगों को मुफ्त में लगाया जाता है. तेज बहादुर सप्रू अस्पताल में यह इंजेक्शन सुबह 8:00 बजे से लेकर दोपहर 2:00 बजे तक मुफ्त में उपलब्ध रहता है.

मुफ्त में इंजेक्शन लगवाने के लिए सबसे पहले आपको ओपीडी में जाकर अपना मेडिकल पर्चा कटवाना होगा. इसके बाद इंजेक्शन कक्ष में जाकर डॉक्टर के परामर्श के बाद आपको इंजेक्शन की डोज़ दी जाती हैं.

कुत्ते काटने के बाद आपको एंटी रेबीज टीका के चार डोज दिए जाते हैं, जो क्रमशः 0, 3, 7 और 28वें दिन लगाए जाते हैं. इसके लिए अस्पताल किसी भी प्रकार का चार्ज नहीं लेता.

प्रयागराज के तेज बहादुर अस्पताल में रोजाना लगभग 200 से अधिक लोग कुत्ते काटने या चाटने के कारण एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं. इनमें कुछ को कुत्ते ने काटा होता है, कुछ को डांट लगी होती है और कुछ को कुत्ते के नाखून से चोट आई होती है. खतरनाक बीमारी रेबीज के चलते सभी लोग जागरूक होकर इंजेक्शन लगवाते हैं.

डॉक्टर प्रशांत पांडे, राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम प्रयागराज के नोडल अधिकारी, लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि यदि किसी को कुत्ते ने काट लिया और वह समय पर इंजेक्शन नहीं लगवाता है, तो रेबीज के लक्षण जैसे पानी से डरना, थकावट, भ्रम आदि प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं.

कुत्ते द्वारा काटे गए व्यक्ति को सबसे पहले अपने घाव को बहते हुए पानी में लगभग 10 मिनट तक धोना चाहिए. इसके बाद सबसे जरूरी कदम टिटनेस का इंजेक्शन लगवाना है. किसी भी हालत में इंजेक्शन लगवाने से पीछे नहीं हटना चाहिए.

अगर कुत्ते ने काटा नहीं है बल्कि केवल हाथ चाट लिया है, तब भी डॉक्टर के परामर्श के बाद इंजेक्शन लगवाना जरूरी है. कभी-कभी ऐसा होता है कि वायरस संक्रमित जगह से शरीर में प्रवेश कर जाता है. इस स्थिति में एंटी रेबीज टीका के साथ रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन भी लगाया जाता है.
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