नए साल के लिए महाकाल ही नहीं… इन मंदिरों की भी दर्शन व्यवस्था बदली, आने से पहले जानें ये जरूरी बात

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Ujjain Mahakal New Year Darshan: बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन जिसे धार्मिक नगरी के नाम से जाना जाता है. नए साल के पहले ही यहां लाखों श्रद्धालु आ चुके हैं. नए साल को लेकर उज्जैन के तमाम मंदिरों में दर्शन व्यवस्था बदली है. आइए जानते हैं कौन से मंदिर में क्या परिवर्तन हुआ है.

विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के दरबार में नए साल की शुरुआत के पहले ही श्रद्धालुओं की जमकर भीड़ देखने को मिल रही है. महाकाल मंदिर समिति श्रद्धालु की बेहतर सुविधा के लिए कई प्रकार के परिवर्तन कर रही है. इतना ही नहीं, उज्जैन के तमाम मंदिरों में भी अलग-अलग व्यवस्था की गई है. आप भी अगर महाकाल के दरबार में दर्शन करने आने वाले हैं तो यहां महाकाल मंदिर के साथ उज्जैन के अन्य प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन की बदली व्यवस्था जरूर जानें.

उज्जैन

25 दिसंबर से अभी तक महाकाल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 11 लाख रिकॉर्ड हो चुकी है. श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए महाकाल मंदिर में दर्शन व्यवस्था में विशेष बदलाव किए गए हैं. प्रोटोकॉल दर्शन सुविधा भी 5 जनवरी तक बंद कर दी है. इस दौरान श्रद्धालुओं को केवल चलित भस्म आरती दर्शन की सुविधा मिलेगी. मंदिर प्रशासन के अनुसार, 31 दिसंबर और 1 जनवरी को लगभग 5 लाख श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है. इसी को ध्यान में रखते हुए दर्शन की विस्तृत और नियंत्रित व्यवस्था लागू की गई है.

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दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को अपने वाहन निर्धारित पार्किंग स्थलों पर खड़े करने होंगे. इसके बाद चारधाम चौराहा से पैदल यात्रा शुरू करनी होगी. श्रद्धालु शक्तिपथ मार्ग से होते हुए त्रिवेणी द्वार से मंदिर परिसर में प्रवेश करेंगे. मंदिर के भीतर मानसरोवर द्वार से प्रवेश मिलेगा, जहां से टनल मार्ग के जरिए भगवान महाकाल के दर्शन कराए जाएंगे. दर्शन के पश्चात श्रद्धालु निर्धारित निकास मार्ग से बाहर निकलेंगे. वहीं, शीघ्र दर्शन की सुविधा लेने वाले श्रद्धालुओं को रुद्रसागर के नए पुल के रास्ते मानसरोवर पहुंचना होगा, जहां से अलग व्यवस्था के तहत दर्शन कराए जाएंगे.

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नववर्ष की शुरुआत श्री चिंतामण गणेश के दर्शन के साथ करने की परंपरा के चलते मंदिर में हर साल भारी भीड़ उमड़ती है. बाहरी श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय भक्तों की संख्या भी काफी रहती है. 1 जनवरी 2025 को भी 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे. मंदिर प्रबंधक अभिषेक शर्मा के अनुसार 31 दिसंबर और 1 जनवरी को सुबह 4 बजे से चोला-शृंगार होगा, जबकि सुबह 6 बजे से रात 9:30 बजे तक दर्शन कराए जाएंगे. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेड्स लगाए गए हैं. इन दो दिनों में करीब एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. गर्भगृह प्रवेश और प्रोटोकॉल दर्शन बंद रहेंगे.

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बात करें मंगलनाथ मंदिर की तो आगामी दो दिनों के दौरान लगभग 3 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. मंदिर प्रबंधक केके पाठक के अनुसार, श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है. साथ ही शीघ्र दर्शन और प्रोटोकॉल दर्शन सुविधा भी अगले दो दिन तक बंद रहेगी. हालांकि, दिव्यांग और नि:शक्त श्रद्धालुओं के लिए मंदिर समिति द्वारा निःशुल्क एवं सुगम दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई है. दर्शन व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए बैरिकेड्स लगाकर तीन अलग-अलग कतारें बनाई गई हैं, जिनके माध्यम से श्रद्धालु गर्भगृह के सामने से दर्शन कर सकेंगे. दर्शन का समय सुबह 6:30 बजे से रात 10 बजे तक निर्धारित है.

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भगवान शिव के कोतवाल भगवान कालभैरव मंदिर में भी श्रद्धालुओं का ताता लगा हुआ है. यहा भी गर्भगृह प्रवेश बंद रखा गया है. साथ ही प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था 5 जनवरी तक स्थगित रहेगी. श्रद्धालुओं को सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक दर्शन की सुविधा मिलेगी. भीड़ नियंत्रण के लिए मंदिर परिसर में बैरिकेडिंग कर दो जिग-जैग कतारें बनाई गई हैं, जिनमें एक समय में करीब 25 हजार से अधिक श्रद्धालु सम्मिलित हो सकते हैं. प्रशासन का अनुमान है कि महाकाल मंदिर आने वाले लगभग 60 प्रतिशत श्रद्धालु कालभैरव मंदिर में भी दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इसी को देखते हुए आगामी दो दिनों में यहां करीब 3 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना है.

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शिव की नगरी मे शक्ति का भी विशेष महत्व है. इस बार भी नववर्ष के अवसर पर 1 जनवरी को मां चामुंडा माता मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रसाद की व्यवस्था की गई है. पूरे दिन भक्तों को शुद्ध घी से बना हलवा प्रसाद वितरित किया जाएगा. मंदिर भक्त समिति के अनुसार प्रातः आरती के दौरान माता को लगभग 5 क्विंटल मिठाई का भोग अर्पित किया जाएगा. इसके बाद रात 12 बजे तक दर्शन के लिए आने वाले सभी श्रद्धालुओं को घी से निर्मित हलवा प्रसाद दिया जाएगा. वहीं 2 जनवरी को भक्तों के लिए 56 भोग की प्रसादी बांटी जाएगी. नववर्ष को खास बनाने के लिए मंदिर को हिमालय पर्वत की थीम पर आकर्षक रूप से सजाया जा रहा है.

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शिव की नगरी उज्जैन मे शक्ति के रूप में मां हरसिद्धि भी विराजमान हैं. यह मंदिर महाकाल मंदिर से कुछ ही दुरी पर है. यहां भी नए साल को लेकर तैयारी कई गई है. यहा भी लाखों भक्तों के पहुंचने का अनुमान है, इसलिए मंदिर में सुबह पट खुलने के बाद विशेष श्रृंगार के साथ विशेष पूजा व आरती की जाएगी. भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था कर रखी है. इसमें भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग, दर्शनार्थियों के लिए पानी-शौचालय की व्यवस्था और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे व पुलिस बल तैनात किए गए हैं.

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नए साल के लिए महाकाल ही नहीं इन मंदिरों की भी व्यवस्था बदली, आने से पहले जानें

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