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आयुर्वेद में मदार (आक/Calotropis) को एक प्राचीन और शक्तिशाली औषधि के रूप में माना गया है. इसकी पत्तियां, फूल और दूधिया रस कई रोगों में लाभकारी माने जाते हैं, खासकर त्वचा रोग, जोड़ों का दर्द, बवासीर और पथरी जैसी समस्याओं में. हालांकि, इसकी ताकत के कारण मदार का उपयोग केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही सुरक्षित रहता है. आइए जानते है इसके बारे में…
आयुर्वेद में मदार को आक या कैलोट्रॉपिस कहा जाता है. इसकी पत्तियों, फूलों और दूधिया रस में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो कई बीमारियों में राहत प्रदान कर सकते हैं. यदि इसका सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह एक बेहद असरदार औषधि साबित होती है.

Local18 से बातचीत में सर्वोदय अस्पताल, सेक्टर 8, फरीदाबाद के वरिष्ठ आयुर्वेद कंसल्टेंट डॉ. चेतन शर्मा ने बताया कि मदार का उपयोग हजारों सालों से आयुर्वेद में होता आ रहा है. उन्होंने कहा कि यह कई प्रकार के रोगों में प्राकृतिक उपचार प्रदान करने में मदद करता है.

मदार की पत्तियों और फूलों का लेप खुजली, फोड़े, एक्जिमा और अन्य त्वचा संबंधी परेशानियों में राहत देता है. इसमें संक्रमण को रोकने और सूजन कम करने वाले गुण मौजूद होते हैं, इसलिए इसे त्वचा रोगों के प्राकृतिक इलाज में खास माना जाता है.

आयुर्वेदिक पद्धति में मदार के पत्तों का लेप या रस लगाने से जोड़ों के दर्द, गठिया और रुमैटिज्म जैसी तकलीफों में राहत मिलती है. इसकी ठंडी और सूजन कम करने वाली प्रकृति दर्द को कम करने में विशेष रूप से मददगार मानी जाती है.

आयुर्वेद में मदार की पत्तियों का पेस्ट बवासीर के दर्द और सूजन को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है. प्रभावित स्थान पर लगाने से आराम मिलता है, लेकिन विशेषज्ञ की सलाह के बिना इसका इस्तेमाल हानिकारक हो सकता है.

मदार का दूधिया रस आयुर्वेद में कई बार विशेष उपचारों में, जैसे पथरी और गहरे रोगों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह आंतरिक समस्याओं में लाभकारी माना जाता है, लेकिन केवल अनुभवी चिकित्सक की देखरेख में ही इसका सुरक्षित उपयोग संभव है.

मदार अत्यंत शक्तिशाली औषधि है. विशेषज्ञों के अनुसार, सही मात्रा और विधि से उपयोग करने पर यह त्वचा रोग, जोड़ों का दर्द, बवासीर और पथरी जैसी समस्याओं में प्राकृतिक राहत प्रदान कर सकता है.