आम दिखने वाला, असर में कमाल… सत्यानाशी से पाएं संजीवनी जैसी ताकत, जानिए कैसे

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घर के आस-पास उगने वाला सत्यानाशी पौधा (Indian Poppy) औषधीय गुणों से भरपूर है. इसके अर्क और तेल का उपयोग त्वचा रोग, जोड़ों के दर्द, वायरल बुखार और संक्रमण से राहत दिलाने के लिए किया जाता है. आयुर्वेद में इसे कई गंभीर बीमारियों के इलाज में कारगर माना गया है.

घर के आस-पास या सड़क किनारे निकली झाड़ियों में अक्सर पाए जाने वाले पौधे बेकार माने जाते हैं. लेकिन, इनमें कुछ ऐसे पौधे भी होते हैं जो औषधीय रूप से बेहद फायदेमंद होते हैं. इसी तरह सत्यानाशी का पौधा है, जो अक्सर झाड़ियों में उगता है. यह हमारे आसपास दिखने वाला आम पौधा है, लेकिन इसके फायदे बहुत खास हैं.

आयुर्वेद में सैकड़ों ऐसे पौधे और जड़ी-बूटियों के औषधीय गुण बताए गए हैं, जिनका सेवन हमें कई तरह के रोगों से बचाने में बेहद लाभदायक हो सकता है. इन्हीं में से सत्यानाशी भी एक ऐसा पौधा है, जिसे इंडियन पॉपी भी कहा जाता है.

इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी पत्तियां, बीज और यहां तक कि इसके फूल भी बेहद उपयोगी होते हैं. प्राचीन काल में यह पौधा कई गंभीर रोगों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता था. एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसके तने और पत्तियों से मेथेनॉलिक अर्क तैयार किया जाता है, जो शरीर की सेहत सुधारने में किसी अमृत की तरह काम कर सकता है.

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आयुर्वेदिक दवाओं के सलाहकार डॉ. आशीष बताते हैं कि सत्यानाशी का पौधा कई तरह की संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करने में उपयोगी हो सकता है. इस पौधे से निकलने वाला अर्क यानी दूध, त्वचा पर होने वाले दाद, खाज, खुजली और फोड़े-फुंसी से राहत दिलाने में बेहद कारगर हो सकता है.

इस पौधे में एंटी-इंफेक्शन गुण भी पाए जाते हैं. बदलते मौसम में बढ़ते बैक्टीरिया और फंगस के प्रकोप से बचने के लिए सत्यानाशी का पौधा फायदेमंद हो सकता है. इसमें एंटीबैक्टीरियल के साथ-साथ एंटीफंगल गुण भी मौजूद हैं, जो संक्रमण से बचाव के लिए बेहद उपयोगी होते हैं.

यह पौधा बरसात के दिनों में बेहद उपयोगी हो जाता है. इस मौसम में वायरल और मलेरिया जैसे बुखार सबसे अधिक प्रभावशाली होते हैं. ऐसे समय में सत्यानाशी की पत्तियों से तैयार किए गए अर्क से बुखार के असर को कम किया जा सकता है.

यह पौधा जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है. सत्यानाशी का तेल या अर्क जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में विशेष लाभकारी माना जाता है. यह पुराने गठिया रोगों के उपचार के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रमुख औषधियों में से एक मानी जाती है.

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