सरसों तेल की मालिश और तुलसी-अदरक की चाय, पुराने नुस्खे कितने कारगर हैं? जानिए

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ठंड के मौसम में बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ रखना किसी चुनौती से कम नहीं होता. नाक बहना, खांसी या बार-बार बीमार पड़ना, ऐसे में माता-पिता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि बच्चों को सर्दी से कैसे बचाया जाए. क्या सिर्फ दवाइयां ही उपाय हैं या फिर रोज़मर्रा की कुछ आसान आदतें, खानपान और घरेलू तरीके बच्चों की इम्यूनिटी को मजबूत बना सकते हैं? यही जानने के लिए आगे पढ़िए.

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मथुरा. जैसे-जैसे सर्दी का मौसम बढ़ रहा है, वैसे-वैसे छोटे बच्चे भी ठंड की चपेट में आने लगे हैं. सर्दियों में बच्चों की देखभाल करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है. पुराने समय में महिलाएं किस तरह अपने बच्चों की देखभाल करती थीं और उन्हें ठंड से बचाने के लिए कौन-कौन से घरेलू उपाय अपनाए जाते थे, यही हम आपको बता रहे हैं.

खानपान में भी बदलाव जरूरी
ठंड का मौसम बच्चों के लिए बेहद नाजुक होता है. सर्दियों में बच्चे ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं, ऐसे में उनकी खास देखभाल के साथ-साथ खानपान में भी बदलाव जरूरी हो जाता है. ठंड के मौसम में बच्चों की देखभाल कैसे की जाए और खाने-पीने में क्या देना चाहिए और क्या नहीं, इस बारे में लोकल 18 से बातचीत में भगवान देवी नाम की बुजुर्ग महिला ने अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में बच्चों को गर्म रखने के लिए आधुनिक साधन नहीं होते थे, लेकिन तब भी घरेलू नुस्खों से बच्चों की अच्छी देखभाल की जाती थी. पुराने नुस्खे आज भी कारगर साबित होते हैं और कई बार जहां अंग्रेजी दवाइयां असर नहीं करतीं, वहां ये उपाय काम आ जाते हैं.

ये है कुछ जरूरी टिप्स
उन्होंने कहा कि सर्दियों में बच्चों को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका उनके खानपान में बदलाव है. शाम को सोते वक्त बच्चों को एक बादाम भूनकर खिलाने से शरीर में गर्माहट आती है. बच्चों को सर्दी से बचाने के लिए गरम और तरल पदार्थ जैसे तुलसी-अदरक की चाय और गुनगुना पानी देना चाहिए. पौष्टिक आहार में विटामिन C युक्त फल, हरी सब्जियां और दूध शामिल करना फायदेमंद होता है. इसके साथ भाप दिलाना, सरसों या लहसुन वाले गर्म तेल से मालिश करना और पर्याप्त आराम देना भी जरूरी है.

डॉक्टर को दिखाना जरूरी
उन्होंने यह भी बताया कि गुनगुना पानी, नींबू पानी और एक साल से ऊपर के बच्चों को तुलसी-अदरक-शहद की चाय देने से गले को आराम मिलता है और बलगम पतला होता है. सरसों के तेल में लहसुन और अजवायन डालकर गर्म करके बच्चे की छाती, पीठ, पैरों और माथे पर हल्के हाथ से मालिश करने से राहत मिलती है. बंद नाक के लिए भाप उपयोगी है. साथ ही साफ-सफाई, नियमित हाथ धोना, गुनगुने पानी से नहलाना, अच्छे से सुखाकर गर्म कपड़े पहनाना, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. अगर लक्षण बिगड़ें या एक हफ्ते से ज्यादा रहें तो डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए.

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Madhuri Chaudhary

पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें

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