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Knee pain injections: 50-55 की उम्र के बाद घुटनों में होने वाले दर्द को रोकने के लिए घुटनों में इंजेक्शन लगवाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि रूमेटोलॉजी में 40 साल का अनुभव रखने वाले डॉ. रोहिणी हांडा कहते हैं कि ये इंजेक्शन अस्थाई इलाज हैं, इन्हें लगवाकर नी रिप्लेसमेंट सर्जरी को रोका नहीं जा सकता है.
Knee Pain Injections are good or not: आजकल घुटनों में इंजेक्शन लगवाना काफी कॉमन हो गया है. ऑस्टियो अर्थराइटिस या रूमेटाइड अर्थराइटिस के चलते कट-कट करते घुटनों में होने वाले भीषण दर्द से राहत के लिए डॉक्टर मरीजों को इंजेक्शन लगवाने की सलाह देते हैं. वहीं कुछ मरीज भी घुटनों के प्रत्यारोपण को रोकने के लिए इंजेक्शन लगवा लेते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि क्या घुटनों के इंजेक्शन सच में कारगर हैं? इन्हें लगवाना चाहिए या नहीं? क्या ये इंजेक्शन सच में दर्द को भगा देते हैं या इन्हें लगवाने के बाद साइड इफैक्ट बढ़ जाते हैं और फिर घुटनों का प्रत्यारोपण ही करवाना पड़ता है? आइए जानते हैं 40 साल के अनुभवी डॉक्टर और जाने-माने रूमेटोलॉजिस्ट डॉ. रोहिणी हांडा से..
डॉ. रोहिणी हांडा कहते हैं कि घुटनों में इंजेक्शन की सफलता नी ऑस्टियो अर्थराइटिस के मरीज के चुनाव पर निर्भर करती है कि आप ये इंजेक्शन कि मरीज को लगा रहा हैं. बीमारी की शुरुआती स्टेज में अगर ये इंजेक्शन दिए जाते हैं तो ये कम से कम 2 से 6 महीनों तक आराम दे सकते हैं लेकिन एडवांस स्टेज में ये काम नहीं करते हैं. अगर इन इंजेक्शनों के साथ-साथ दूसरी दवा भी चले, मरीज एक्सरसाइज करे और वजन भी घटाए तो इन इंजेक्शनों का लाभ ज्यादा होता है. ऐसी स्थिति में ये नी सर्जरी को पुश बैक कर सकते हैं यानि कुछ दिनों के लिए टाल सकते हैं.
डॉ. हांडा ने कहा कि ये बीमारी के शुरुआती चरण में राहत का एक तरीका जरूर है लेकिन ऐसा नहीं है कि यह घुटनों के प्रत्यारोपण को रोक सकते हैं और मरीज को नी रिप्लेसमेंट की जरूरत नहीं पड़ेगी. अगर मरीज के घुटनों की हालत खराब है तो उसे नी रिप्लेसमेंट करवाना ही होगा.
अब सरल हो गई है नी रिप्लेसमेंट सर्जरी
हालांकि आजकल रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट के चलते मरीजों को न तो ज्यादा परेशानियां होती हैं और न ही पूरे घुटने को निकाला जाता है. बल्कि आजकल कस्टमाइज्ड सर्जरी होती हैं. यानि घुटने के जितने हिस्से में परेशानी है सिर्फ उसे ही निकालकर उस जगह पर अंग प्रत्यारोपित कर दिया जाता है. इसका फायदा ये होता है कि बहुत कम हिस्सा रिप्लेस होता है और बाकी शरीर का पुराना हिस्सा ही काम करता है.
अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्…और पढ़ें
अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्… और पढ़ें