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Balaghat News: बालाघाट के किरनापुर तहसील में प्रमुख दो नदिया बहती है. एक सोन नदी और दूसरी बाघ नदी. दोनों की स्थलाकृति ऐसी है कि उसमें कई मोड़ बनते है, जो नदियों के मुहाने पर डेल्टा बनाते है. वहीं, इन मुहानों पर नदियों में आने वाली बाढ़ के साथ कई सारी रेतीली दोमट मिट्टी लेकर आती है और अपने उपजाऊपन को बरकरार रखती है.
बालाघाट जिला आमतौर पर धान के उत्पादन और उत्पादकता के लिए जाना जाता है. लेकिन जिले की किरनापुर तहसील में सब्जियों का भरपूर उत्पादन होता है और जहां पर सब्जियों का उत्पादन होता है उसे किरनापुर के कछार के नाम से जाना जाता है. यहां कि सब्जियों की डिमांड न सिर्फ बालाघाट जिले में बल्कि आसपास के जिले और दूसरे राज्यों में नाम से ही सब्जियां बिक जाती है. ऐसे में लोकल 18 की टीम भी उन्हीं कछार में पहुंची, जहां पर सब्जियों की जोरदार खेती होती है….
बालाघाट के किरनापुर तहसील में प्रमुख दो नदिया बहती है. एक सोन नदी और दूसरी बाघ नदी. दोनों की स्थलाकृति ऐसी है कि उसमें कई मोड़ बनते है, जो नदियों के मुहाने पर डेल्टा बनाते है. वहीं, इन मुहानों पर नदियों में आने वाली बाढ़ के साथ कई सारी रेतीली दोमट मिट्टी लेकर आती है और अपने उपजाऊपन को बरकरार रखती है. नदियों के किनारे पर मौजूद मुहानों को ही कछार कहते है. किसानों ने बताया कि कछार पर यहां पर साल के 8-9 महीने खेती होती है वहीं, बाकि समय पर बाढ़ के कारण खेती नहीं हो पाती है.
ये कछार होते है बेहद उपजाऊ
किसानों ने लोकल 18 को बताया कि ये कछार इतने उपजाऊ होते है कि यहां पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम के लिए अलग से उर्वरकों के छिड़काव की जरूरत ही नहीं होती है. ऐसे में किसानों के लिए कछार वरदान बनकर आते है. इसके पीछे के कारण ये है कि नदी में आई बाढ़ हर साल नई मिट्टी लेकर आती है, जो सब्जियों की खेती के लिए बेहद फायदेमंद है. यानी की यहां पर प्राकृतिक तौर पर ही जैविक खेती होती है.
एक ही कूल के पास 20 एकड़ जमीन
किरनापुर के मुरकुड़ा गांव में बाघ नदी के किनारे पर भी कछार है और यहां पर 20 एकड़ इलाके में बाघ नदी के कछार है. ये एक ही मरठे कूल के लोगों के है. इस कूल में करीब 15 परिवार है, जिसमें सभी के सभी सब्जी की खेती का काम करते है. इसमें पूरे परिवार के लोग खेती में काम करते है. यानी की महिला, पुरुष और बच्चे सहित सभी लोग इसमें काम करते है.
जहां तक नजर जाए वहां सब्जियां
किरनापुर के कछार काफी लंबे फैले हुए है, जहां पर आपकी जहां तक नजर जाएगी वहां तक सब्जियों की खेती नजर आती है. ऐसे में इस इलाके में ज्यादातर किसान सब्जियों की खेती करते हैं. आपको बता दें कि यहां पर हर तरह की सब्जियों का उत्पादन होता है. इसमें खास तौर से मिर्च की खेती होती है. इसके अलावा बैंगन, गोभी, आलू, मटर, टमाटर, खीरा, मूली, गाजर सहित की सब्जियों की खेती की जाती है. यहां की सब्जियां जिला में तो जाती ही है लेकिन महाराष्ट्र के गोंदिया और छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में सब्जियों की डिमांड रहती है.
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