किम जोंग का वो ऐलान जिसने अमेरिका की नींद हराम कर दी थी, चीन-रूस भी रह गया दंग; उत्तर कोरिया की इनसाइड स्टोरी

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North Korea Nuclear Weapons: उत्तर कोरिया ने 10 फरवरी 2005 को पहली बार आधिकारिक रूप से यह स्वीकार किया कि इसके पास परमाणु हथियार हैं. यह घोषणा प्योंगयांग की सरकारी समाचार एजेंसी के माध्यम से सामने आई और तत्काल ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई. शीत युद्ध के बाद के दौर में यह बयान वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था, क्योंकि इससे परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) और कूटनीतिक प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे.

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उत्तर कोरिया के परमाणु ताकत बनने के ऐलान से अमेरिका हैरान रह गया था. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली.10 फरवरी 2005 का दिन इतिहास में एक ऐसे धमाके के रूप में दर्ज है, जिसने बिना बारूद के ही पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी थी. यह वह तारीख थी जब दुनिया के सबसे रहस्यमयी और जिद्दी देश उत्तर कोरिया (DPRK) ने अपना सबसे बड़ा पत्ता खोला. प्योंगयांग ने आधिकारिक तौर पर सीना ठोककर कबूल किया कि उसके पास परमाणु हथियार हैं.

इस एक बयान ने अमेरिका जैसी सुपरपावर के पैरों तले जमीन खिसका दी और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की धज्जियां उड़ा दीं. यह सिर्फ एक घोषणा नहीं थी, बल्कि शीत युद्ध के बाद वैश्विक सुरक्षा के मुंह पर एक करारा तमाचा था. किम जोंग-इल के इस दांव ने साफ कर दिया कि अब वह किसी की सुनने वाला नहीं है और दुनिया को उसकी शर्तों पर बात करनी होगी.

बातचीत का नाटक खत्म, परमाणु बम का सच बाहर
उत्तर कोरिया की यह स्वीकारोक्ति ऐसे वक्त में आई जब दुनिया को लग रहा था कि बातचीत से मसला हल हो जाएगा. अमेरिका, चीन, जापान, रूस और दक्षिण कोरिया के साथ चल रही ‘छह-पक्षीय वार्ता’ (Six-Party Talks) का मकसद कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु मुक्त करना था. लेकिन प्योंगयांग ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया. उसने साफ कर दिया कि वह अब केवल तकनीक पर काम नहीं कर रहा, बल्कि एक फुल-फ्लेज्ड न्यूक्लियर पावर बन चुका है. यह ऐलान अमेरिका और उसके सहयोगियों के गाल पर एक जोरदार तमाचा था, जिसने एनपीटी (NPT) और कूटनीतिक कोशिशों का मजाक बना दिया.

वॉशिंगटन में हड़कंप, जापान-दक्षिण कोरिया की सांसें अटकीं
अमेरिका ने इस बयान को सीधे अपनी सुरक्षा के लिए चुनौती मान लिया. वाशिंगटन में खतरे की घंटी बज गई. अमेरिका का तर्क था कि अगर उत्तर कोरिया के पास परमाणु बम रहा, तो पूरा क्षेत्र बारूद के ढेर पर बैठ जाएगा और दूसरे देश भी हथियार बनाने लगेंगे. सबसे ज्यादा खौफ जापान और दक्षिण कोरिया में फैल गया. ये दोनों देश उत्तर कोरिया की मिसाइलों की रेंज में आते हैं और प्योंगयांग की सनक उन्हें कभी भी निशाना बना सकती थी.

चीन और रूस भी सन्न, किम जोंग-इल का मास्टरस्ट्रोक
इस खुलासे ने उत्तर कोरिया के सबसे करीबी दोस्त चीन को भी असहज कर दिया. बीजिंग को डर था कि अगर तनाव बढ़ा तो उसकी इकोनॉमी और डिप्लोमेसी पर असर पड़ेगा, इसलिए उसने संयम की रट लगाई. रूस ने भी दबी जुबान में सैन्य टकराव से बचने की सलाह दी. असल में, यह किम जोंग-इल का एक सोचा-समझा ‘मास्टरस्ट्रोक’ था. उन्होंने परमाणु बम को अपनी सत्ता की गारंटी और विदेशी दुश्मनों के खिलाफ एक ढाल बना लिया. यह दुनिया को संदेश था कि उत्तर कोरिया को हल्के में लेने की गलती भारी पड़ेगी.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

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