शिवकांत आचार्य
भोपाल. मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जातिगत विमर्श तेज हो गया है. इस बार मुद्दा बना है ब्राह्मण समाज और उसका राजनीतिक प्रतिनिधित्व. प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठतम नेताओं में शामिल विधायक गोपाल भार्गव के एक बयान ने सत्ता, संगठन और समाज तीनों स्तरों पर खलबली मचा दी है. भार्गव ने खुले मंच से यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि आज ब्राह्मण समाज सभी की नजरों में खटक रहा है. उन्होंने यहां तक कह दिया कि या तो हमें मार दिया जाए या दबा दिया जाए. इस बयान को लेकर सियासत गरमा गई है और अलग-अलग सामाजिक संगठनों व राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. बयान को जहां ब्राह्मण समाज की पीड़ा से जोड़ा जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे बीजेपी की अंदरूनी सच्चाई बता रहा है.
सागर के मंच से दिया गया विवादित बयान
सागर के रविंद्र भवन में आयोजित ब्राह्मण समाज के मेधावी सम्मान समारोह में गोपाल भार्गव ने बेहद तीखे शब्दों में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि पहले मुख्यमंत्री हमारे होते थे, अधिकारी हमारे होते थे, आधी कैबिनेट हमारी होती थी. अब स्थिति यह है कि गिने-चुने लोग ही बचे हैं. भार्गव ने यह भी कहा कि ब्राह्मण समाज बिखरा हुआ है और वोट बैंक नहीं है, इसलिए उसकी बात नहीं सुनी जाती. उन्होंने साफ कहा कि सारे नियम-कानून ब्राह्मणों के खिलाफ बनाए जा रहे हैं और हमें योजनाबद्ध तरीके से हाशिये पर धकेला जा रहा है.
धर्म और सनातन पर हमले का आरोप
गोपाल भार्गव ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि ब्राह्मण सदियों से धर्म का मार्गदर्शन करता आया है. इसी कारण सनातन धर्म पर हमला करने वाले तत्व सबसे पहले ब्राह्मणों को निशाना बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि परिस्थितियां अब विपरीत हो चुकी हैं और अगर धर्म को बचाना है तो ब्राह्मणों को एकजुट होना ही पड़ेगा. उनका यह बयान सीधे तौर पर सामाजिक एकजुटता की अपील के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बीजेपी के भीतर असंतोष का संकेत भी माना जा रहा है.
इस पूरे मामले को और धार तब मिली जब इसे प्रदेश के कुछ आईएएस अधिकारियों के पुराने बयानों से जोड़कर देखा जाने लगा. पहले आईएएस संतोष वर्मा का विवादित बयान सामने आया था, जिसमें ब्राह्मण बेटियों को लेकर टिप्पणी की गई थी. इसके बाद आईएएस नियाज खान ने सोशल मीडिया पर ब्राह्मणों को आरक्षण देने की बात कही थी. पूर्व आईएएस मनोज श्रीवास्तव ने भी फेसबुक पर ब्राह्मण समाज की भूमिका को लेकर टिप्पणी की थी. अब एक वरिष्ठ ब्राह्मण नेता का यह बयान इस पूरी श्रृंखला को और संवेदनशील बना रहा है.
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और आयोजन
रविंद्र भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में 266 मेधावी विद्यार्थियों को कौटिल्य सम्मान से नवाजा गया. इसके साथ ही विप्र वैवाहिक स्मारिका का विमोचन भी किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता एसकेवीएन विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति डॉ. अनिल तिवारी ने की. उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज हमेशा सबकी भलाई की बात करता है, लेकिन उसके हितों पर न सरकारें ध्यान देती हैं और न ही राजनीतिक दल. उन्होंने ऐसे आयोजनों को समाज को जगाने का माध्यम बताया.
सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया
परशुराम सेवा संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुनील पांडे ने कहा कि ब्राह्मण समाज की मौजूदा स्थिति के लिए समाज के भीतर की उदासीनता भी जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि जब ब्राह्मण बड़े पदों पर होते हैं, तब वे अपने समाज के कमजोर वर्ग को पहचानने से इनकार कर देते हैं. यही कारण है कि आज समाज की आवाज कमजोर पड़ गई है.
भोपाल में दलित-पिछड़ा समाज संगठन के अध्यक्ष दामोदर यादव ने गोपाल भार्गव के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि जिस पीड़ा की बात आज ब्राह्मण समाज कर रहा है, वही पीड़ा एसटी, एससी और ओबीसी वर्ग दशकों से झेल रहा है. कांग्रेस प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने भी तंज कसते हुए कहा कि अगर बीजेपी के भीतर ही ब्राह्मण उपेक्षित हैं तो भार्गव को अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से सवाल करना चाहिए, सिर्फ बयानबाजी से कुछ नहीं बदलेगा.
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