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सोचिए अगर एक साधारण पौधा आपकी किडनी और मूत्राशय की पथरी को आसानी से बाहर निकालने में मदद कर सके. आयुष चिकित्सक डॉ. आकांक्षा दीक्षित के अनुसार, पथरचट्टा का यही चमत्कारी फायदा है. इसके पत्तों का रस धीरे-धीरे पथरी को गलाने और पेशाब के रास्ते सुरक्षित रूप से बाहर निकालने में सहायक होता है.
भारत में आयुर्वेद की परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है, जहां प्रकृति में उपलब्ध औषधीय पौधों से अनेक रोगों का उपचार किया जाता रहा है. इन्हीं औषधीय पौधों में पथरचट्टा का विशेष स्थान है. पथरचट्टा को आयुर्वेद में एक प्रभावशाली जड़ी-बूटी माना गया है, जो खासकर पथरी की समस्या में बेहद लाभकारी होती है. इसके अलावा यह पौधा कई अन्य शारीरिक समस्याओं में भी उपयोगी साबित होता है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग घरेलू नुस्खों के रूप में पथरचट्टा का इस्तेमाल करते हैं.

पथरचट्टा को कई जगहों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे पत्थरचूर, पानफुटी या ब्रायोफिलम इसके पत्ते मोटे, रसीले और किनारों से दांतेदार होते हैं. खास बात यह है कि इसके पत्तों के किनारों से छोटे-छोटे नए पौधे उग आते हैं. पथरचट्टा में मूत्रवर्धक, सूजनरोधी और जीवाणुरोधी गुण पाए जाते हैं.

आयुष चिकित्सक डॉ आकांक्षा दीक्षित बताती हैं कि पथरचट्टा का सबसे बड़ा फायदा किडनी और मूत्राशय की पथरी में माना जाता है. इसके पत्तों का रस पथरी को धीरे-धीरे गलाने और पेशाब के रास्ते बाहर निकालने में मदद करता है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में सेवन करने से पेशाब में जलन, रुकावट और दर्द जैसी समस्याओं में राहत मिलती है.
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पथरचट्टा पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में भी सहायक है. इसका सेवन गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में लाभ देता है. इसके रस में सूजन कम करने के गुण होते हैं, जो आंतों की जलन को शांत करने में मदद करते हैं.

पथरचट्टा के पत्तों का लेप घाव, फोड़े-फुंसी और सूजन पर लगाने से जल्दी आराम मिलता है. इसके जीवाणुरोधी गुण संक्रमण को रोकने में सहायक होते हैं. आयुर्वेद में इसे जलन, कटे-फटे घाव और कीड़े के काटने पर भी उपयोगी माना गया है.

पथरचट्टा का उपयोग बुखार, खांसी और सांस से जुड़ी कुछ समस्याओं में भी किया जाता है. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक माना जाता है. साथ ही, यह मूत्र संक्रमण में भी राहत देता है.

डा आकांक्षा दीक्षित के मुताबिक पथरचट्टा एक औषधीय पौधा है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए. अधिक मात्रा में सेवन से नुकसान भी हो सकता है. गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोगों से पीड़ित लोगों को इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लेना चाहिए.