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Success Story: प्राइवेट नौकरी की बंदिशों को तोड़कर वैशाली के रंजीत पासवान ने स्वरोजगार की ऐसी राह चुनी कि आज वे दूसरों के लिए मिसाल बन गए हैं. बढ़ती महंगाई और सीमित वेतन से तंग आकर रंजीत ने अपनी आइसक्रीम फैक्ट्री शुरू की और कड़ी मेहनत से उसे एक सफल मुकाम पर पहुंचाया. आज वे न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि 5 स्थानीय युवाओं को रोजगार देकर उनके घरों का चूल्हा भी जला रहे है.
प्रभात कुमार/वैशाली: कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत करने का जज़्बा हो, तो कोई भी राह मुश्किल नहीं होती. इस कहावत को वैशाली के एक संघर्षशील युवक रंजीत पासवान ने सच कर दिखाया है. सालों तक निजी कंपनियों की बंदिशों और सीमित वेतन में काम करने वाले रंजीत ने जब पराई नौकरी को अलविदा कहा कि तो उनका लक्ष्य सिर्फ खुद को सफल बनाना नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी अवसर पैदा करना था. आज वे एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं.
सीमित वेतन और बढ़ती महंगाई ने बदला रास्ता
रंजीत पासवान बताते हैं कि निजी कंपनी में नौकरी के दौरान उन्हें हर वक्त भविष्य की चिंता सताती थी. बढ़ती महंगाई और परिवार की जरूरतों के आगे महीने का वेतन कम पड़ने लगा था. नौकरी में तरक्की की संभावनाएं भी बहुत सीमित थीं. रंजीत के मन में हमेशा से कुछ अपना करने की टीस थी. इसी सोच ने उन्हें स्वरोजगार के विकल्पों की तलाश करने के लिए प्रेरित किया.
बाजार की नब्ज पहचानकर शुरू किया व्यवसाय
बाजार की मांग को समझते हुए रंजीत ने आइसक्रीम मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में कदम रखा. उन्होंने गौर किया कि गर्मी के मौसम में आइसक्रीम की भारी मांग रहती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर अच्छी गुणवत्ता वाली आइसक्रीम की आपूर्ति कम है. इसी अवसर को पहचानते हुए उन्होंने अपनी छोटी सी जमा-पूंजी से एक आइसक्रीम फैक्ट्री की नींव रखी.
चुनौतियां आईं, पर नहीं मानी हार
शुरुआत में राह आसान नहीं थी. मशीनों की खरीद, कच्चे माल का जुगाड़ और बाजार में जमे-जमाए ब्रांड्स के बीच अपनी जगह बनाना एक बड़ा संघर्ष था. रंजीत बताते हैं कि कई बार आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने क्वालिटी और हाइजीन को अपनी प्राथमिकता बनाया. धीरे-धीरे लोगों को उनकी आइसक्रीम का स्वाद पसंद आने लगा और ग्राहकों का भरोसा बढ़ता गया.
खुद मालिक बने और दूसरों को दिया सहारा
आज रंजीत की फैक्ट्री में विभिन्न फ्लेवर की आइसक्रीम तैयार की जाती है. जिसकी सप्लाई आसपास के बाजारों और ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही है. सबसे गर्व की बात यह है कि रंजीत ने अपने साथ 5 स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया है. उनके इस छोटे से स्टार्ट-अप से आज पांच परिवारों का चूल्हा जल रहा है. वहीं स्थानीय रंजीत की सफलता ने हमारे इलाके के युवाओं को नई दिशा दी है. आज वे सिर्फ एक व्यवसायी नहीं, बल्कि प्रेरणा स्रोत बन गए हैं.
सफलता जरूर मिलेगी
उद्यमी रंजीत पासवान ने अपनी सफलता राज बतलाते हुए कहा कि नौकरी के पीछे भागने के बजाय अगर सही योजना के साथ स्वरोजगार अपनाया जाए, तो भविष्य ज्यादा सुरक्षित है. मेहनत और ईमानदारी हो तो सफलता जरूर मिलती है.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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