Kheti Tips: खाली पड़ी जमीन में लगा दें ये फसल, एक पौधा देगा 700 की कमाई, खंडवा के किसान कमा रहे जबरदस्त मुनाफा

अगर आपकी खेत में कुछ जमीन अभी भी खाली पड़ी है और आप सोच रहे हैं कि कौनसी ऐसी फसल लगाई जाए जिससे कम लागत में अच्छा मुनाफा मिल सके, तो आज की ये जानकारी आपके लिए बेहद खास है. क्योंकि हम बात करने वाले हैं अरबी यानी घुइयां की. एक ऐसी फसल जो स्वाद, सेहत और बाजार तीनों में ही शानदार मानी जाती है. खास बात यह है कि अरबी का एक पौधा किसान को 500 से 700 रुपये तक का फायदा देता है, और इसकी खेती में खर्च भी बहुत कम आता है.

अरबी क्यों है किसानों के लिए मुनाफे की फसल?
अरबी जमीन के नीचे उगने वाली कंद वाली फसल है. भारत में इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है. अरबी की खासियत यह है कि इसके कंद के साथ पत्ते भी बिकते हैं, जिससे किसानों को दोहरी कमाई हो जाती है. अरबी के पत्तों का इस्तेमाल सब्जी, पकोड़े और कई पारंपरिक डिशेज में किया जाता है. वहीं इसके कंद बाजार में अच्छी कीमत देते हैं. यही कारण है कि कई किसान इसे अपनी मुख्य नकदी फसल के रूप में उगा रहे हैं.

कम लागत में ज्यादा मुनाफा
अरबी की खेती में बहुत ज्यादा निवेश की जरूरत नहीं होती. खेत की साधारण तैयारी, नमी और थोड़ी देखभाल से यह फसल बेहतरीन पैदावार देती है. एक बीघा जमीन में किसान 8–10 क्विंटल तक अरबी आराम से निकाल लेते हैं, और अगर पौधों की संख्या ज्यादा हो तो कमाई इससे भी बढ़ जाती है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट ?
जय किसान कृषि क्लिनिक के नवनीत रेवापाटी बताते हैं कि अरबी की खेती किसान के लिए सोने की खान साबित हो सकती है. अरबी जमीन के नीचे उगती है, इसलिए इसमें कीट और बीमारियों का असर बहुत कम होता है. इसकी बुवाई अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में करना सबसे सही समय माना जाता है. हर साल किसान इससे अच्छा लाभ उठाते हैं, क्योंकि इसकी मांग सालभर होती है. हालांकि इस वर्ष स्थानीय मंडियों में अरबी का भाव थोड़ा कम मिला, लेकिन बड़ी मंडियों में इसकी कीमतें अब भी आकर्षक हैं. खास बात यह है कि निमाड़ क्षेत्र से दिल्ली के व्यापारी खुद खेतों में आकर अरबी खरीदकर ले जाते हैं. यहां से अरबी दिल्ली और फिर विदेशों तक पहुंचाई जाती है, जिससे किसानों को मार्केट की चिंता भी नहीं रहती.

खाली जमीन का करें इस्तेमाल
अगर आपके पास खेत में कोई ऐसा हिस्सा है जहां इस समय कोई फसल नहीं लगी है, तो आप अरबी की खेती कर सकते हैं. अरबी सूखी और कम उपजाऊ मिट्टी में भी उग जाती है. प्रति पौधा 500–700 रुपये तक की कमाई देना इसकी सबसे बड़ी खासियत है. इसके पत्तों का बाजार हमेशा बना रहता है, जिससे शुरुआती दिनों में भी कमाई हो सकती है.

खेती की विधि
1. खेत की तैयारी
हल्की जुताई और मिट्टी में गोबर खाद मिलाकर खेत तैयार कर लें. अरबी को ज्यादा पोषक तत्व नहीं चाहिए, इसलिए अतिरिक्त खाद की जरूरत नहीं पड़ती.

2. बुवाई
समय: अक्टूबर से दिसंबर
बीज: अच्छी गुणवत्ता वाले कंद
दूरी: पौधे–पौधे में 45–60 सेमी
3. सिंचाई
अरबी में नमी रहनी चाहिए, पानी भराव नहीं होना चाहिए. 15–20 दिन के अंतर पर हल्की सिंचाई पर्याप्त है.
4. निराई–गुड़ाई
समय–समय पर खरपतवार निकालते रहें, कटाई और बाजार में बिक्री. अरबी लगभग 4–5 महीने में तैयार हो जाती है.

निमाड़ क्षेत्र के कई किसानों की अरबी दिल्ली तक जाती है जहां इसकी अच्छी कीमत मिलती है. वहीं बड़ी कंपनियां विदेश निर्यात के लिए भी इसे खरीदती हैं.
अगर किसान चाहें तो:
अरबी को धोकर पैकिंग कर बेच सकते हैं,
पत्तों को अलग पैक करके मंडी भेज सकते हैं,
या खेत से सीधे व्यापारी को बेच सकते हैं.

कुल मिलाकर देखा जाए तो अरबी किसानों के लिए कम लागत, कम मेहनत और ज्यादा मुनाफा देने वाली नकदी फसल है। एक पौधा 500–700 रुपये का लाभ दे सकता है और इसकी मार्केट वैल्यू सालभर बनी रहती है। खाली पड़ी जमीन को उपयोग में लाकर किसान इससे शानदार कमाई कर सकते हैं।
अगर आप भी कम खर्च में ज्यादा मुनाफा चाह रहे हैं, तो इस सीजन अरबी की खेती आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है।

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