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ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज ने कहा कि बच्चे के नाम का सीधा असर उसके भाग्य और भविष्य पर पड़ता है. हर नाम अपने भीतर एक खास अर्थ और ऊर्जा को समेटे होता है. अगर नाम का मतलब सकारात्मक हो, तो वह बच्चे के जीवन में शुभ प्रभाव डालता है. (रिपोर्ट: शुभम/उज्जैन)
भारतीय संस्कृति में बच्चे का नाम रखना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक पवित्र संस्कार माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र में इसे नामकरण संस्कार कहा गया है. मान्यता है कि व्यक्ति का नाम उसके स्वभाव, व्यक्तित्व और भविष्य पर गहरा प्रभाव डालता है. यही कारण है कि प्राचीन काल से लेकर आज तक लोग अपने बच्चों के नाम सोच-समझकर रखते आए हैं.

अक्सर देखा गया है कि माता-पिता अपने बच्चों का नाम राम, लक्ष्मण, भरत या सीता जैसे पवित्र नामों पर रखते हैं लेकिन कंस, रावण या अन्य दुष्ट प्रवृत्ति से जुड़े नाम रखने से बचते हैं. इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक आधार है. माना जाता है कि नाम की ध्वनि और उसका अर्थ व्यक्ति के जीवन में ऊर्जा का संचार करता है.

मध्य प्रदेश के उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, बच्चे के नाम का सीधा असर उसके भाग्य और भविष्य पर पड़ता है. हर नाम अपने भीतर एक विशेष अर्थ और ऊर्जा समेटे होता है. यदि नाम का अर्थ सकारात्मक हो, तो वह बच्चे के जीवन में शुभ प्रभाव डालता है.
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वहीं नकारात्मक अर्थ वाला नाम जीवन में बाधाएं उत्पन्न कर सकता है. आचार्य का कहना है कि नाम केवल अलग या आकर्षक दिखने के लिए नहीं रखा जाना चाहिए. नाम ऐसा होना चाहिए, जो सार्थक, शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर हो. जिन नामों से नकारात्मक भाव उत्पन्न होता है या जिनका अर्थ अस्पष्ट होता है, ऐसे नामों से बचना चाहिए.

शास्त्रों के अनुसार, बच्चे का नाम छोटा, सरल और अर्थपूर्ण होना चाहिए. इसके साथ ही जन्म के समय का नक्षत्र नामकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. नक्षत्र के अनुसार रखा गया नाम बच्चे के जीवन में संतुलन और सफलता लाता है. इसके अलावा वंश और गोत्र का ध्यान रखना भी आवश्यक माना गया है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की धार्मिक या सामाजिक बाधा उत्पन्न न हो.

धार्मिक ग्रंथों जैसे- रामचरितमानस और सुंदरकांड में नाम और उसके प्रभाव से जुड़े कई उदाहरण मिलते हैं. एक प्रसंग में माता सीता अशोक वृक्ष के नीचे बैठी होती हैं और कहती हैं, ‘सत्य नाम करु हरूमम शोका.’ यहां अशोक का अर्थ है, जो शोक का नाश करता है. इसी प्रकार चंद्रमा के दो नाम शशि और मयंक का उल्लेख मिलता है. एक प्रसंग में शशि को कलंक से जोड़ा गया है, जिसके कारण कई विद्वान इस नाम से बचने की सलाह देते हैं.

उज्जैन के आचार्य भारद्वाज का कहना है कि बच्चों को हमेशा ऐसे नाम देने चाहिए, जो सद्गुण, सकारात्मकता और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक हों, राक्षसी प्रवृत्ति या दुष्ट चरित्रों से जुड़े नाम जैसे- कंस, रावण या उनके पर्यायवाची बच्चों के नाम से कभी नहीं जोड़ने चाहिए. ऐसे नाम बच्चे को अनजाने में नकारात्मक सोच और गलत दिशा की ओर ले जा सकते हैं.
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