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डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि छोटे बच्चे अक्सर रंग-बिरंगे फूलों की ओर आकर्षित होते हैं. कनेर के चमकीले फूल उन्हें छूने और तोड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं. अगर गलती से वे इसे चबा लें, तो पेट दर्द, उल्टी और कमजोरी जैसे लक्षण दिख सकते हैं. गंभीर स्थिति में मेडिकल इमरजेंसी भी बन सकती है.
Nerium oleander जिसे आमतौर पर कनेर कहा जाता है, एक सदाबहार और बेहद आकर्षक सजावटी पौधा है. इसके गुलाबी, सफेद और पीले फूल सड़कों, पार्कों और घरों की बाउंड्री पर अक्सर नजर आते हैं. कम पानी में भी हरा-भरा रहने की क्षमता इसे लोकप्रिय बनाती है. लेकिन इसकी खूबसूरती के पीछे एक सख्त सच्चाई छिपी है. यह पौधा जितना सुंदर दिखता है, उतना ही खतरनाक भी साबित हो सकता है.
कनेर के पौधे का हर हिस्सा जहरीला माना जाता है. इसकी पत्तियां, फूल, तना और यहां तक कि रस भी टॉक्सिक तत्वों से भरे होते हैं. अगर कोई बच्चा खेलते समय इसकी पत्ती तोड़कर मुंह में डाल ले, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या पैदा कर सकता है. कई मामलों में हल्की मात्रा भी उल्टी, चक्कर और दिल की धड़कन पर असर डाल सकती है. इसलिए इसे सामान्य सजावटी पौधा समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है.
डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि छोटे बच्चे अक्सर रंग-बिरंगे फूलों की ओर आकर्षित होते हैं. कनेर के चमकीले फूल उन्हें छूने और तोड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं. अगर गलती से वे इसे चबा लें, तो पेट दर्द, उल्टी और कमजोरी जैसे लक्षण दिख सकते हैं. गंभीर स्थिति में मेडिकल इमरजेंसी भी बन सकती है. इसलिए जिन घरों में छोटे बच्चे हैं, वहां इस पौधे को लगाने से पहले दो बार सोचना जरूरी है.
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कुत्ते और बिल्लियां भी कभी-कभी पौधों की पत्तियां चबा लेते हैं. कनेर उनके लिए भी उतना ही खतरनाक है. थोड़ी सी मात्रा भी उनके दिल और पाचन तंत्र पर असर डाल सकती है. सुस्ती, उल्टी और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिख सकते हैं. अगर पालतू जानवर कनेर के आसपास खेलते हैं, तो उन पर नजर रखना बेहद जरूरी है.
यह पौधा सड़कों के किनारे और पार्कों में बड़े पैमाने पर लगाया जाता है क्योंकि यह कम देखभाल में भी पनप जाता है. प्रदूषण और धूप सहने की क्षमता इसे नगर निगमों की पसंद बनाती है. लेकिन आम लोगों को इसके खतरों की जानकारी कम होती है. जागरूकता की कमी कई बार अनजाने जोखिम को जन्म दे सकती है.
अगर घर में पहले से कनेर लगा है, तो बच्चों और पालतू जानवरों को उससे दूर रखें. पौधे की कटाई या छंटाई करते समय दस्ताने पहनें. इसके रस के सीधे संपर्क से बचें. सूखी पत्तियों को खुले में न छोड़ें. जागरूकता और थोड़ी सी सावधानी बड़े खतरे को टाल सकती है.
हर स्थिति में पौधा हटाना जरूरी नहीं है, लेकिन जोखिम को समझना जरूरी है. यदि घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर हैं, तो सुरक्षित दूरी या वैकल्पिक पौधों पर विचार किया जा सकता है. बगीचे की सुंदरता के लिए कई ऐसे पौधे उपलब्ध हैं जो कम जोखिम वाले होते हैं.
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