हमारी प्रकृति में एक से बढ़कर एक औषधीय पेड़. इनका उपयोग कर विभिन्न प्रकार की आयुर्वेदिक दवाइयां तैयार की जाती है. इन्हीं में से एक है कालमेघा का प्लांट. चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में संचालित बॉटनी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विजय मलिक ने कालमेघ प्लांट के बारे में बताया है. प्रोफेसर विजय मलिक बताते हैं की बदलती खानपान शैली के कारण भी अब लोगों के लीवर में काफी इन्फेक्शन देखने को मिलता है. कुछ का लीवर भी बढ़ जाता है. जिसके बाद उन्हें विभिन्न प्रकार की दवाइयां का सेवन करना पड़ता है. ऐसे लोग भी अगर इसके काढ़े का उपयोग करेंगे. तो लीवर संबंधित जो भी समस्याएं हैं. उससे उन्हें काफी राहत मिलेगी. आइए विस्तार से बताते हैं.