Kadha Recipe: मौसम बदलते ही ज्यादातर घरों में सर्दी, खांसी, जुकाम और गले में खराश जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं. अक्सर लोग तुरंत दवाइयों की तरफ भागते हैं, लेकिन कई बार दवाइयां जल्दी आराम नहीं देती और परेशानी बनी रहती है. ऐसे में अगर हम अपने घर के आसान और प्राकृतिक उपाय अपनाएं, तो जल्दी राहत मिल सकती है. आयुर्वेद में ऐसे कई घरेलू नुस्खे हैं, जो सर्दी और खांसी को दूर करने में कारगर साबित हुए हैं. इनमें से एक बहुत ही सरल और असरदार तरीका है घर पर काढ़ा बनाना. घर में आसानी से मिलने वाले तुलसी के पत्ते, अदरक, इलायची, लौंग, काली मिर्च और दालचीनी जैसी सामग्री से तैयार यह काढ़ा इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है और गले की खराश, खांसी और बलगम को कम करता है. इसे बनाने में ना तो बाजार जाना पड़ेगा, ना ही कोई खास सामग्री ढूंढनी पड़ेगी. केवल कुछ मिनटों में आप इस आयुर्वेदिक काढ़े को तैयार कर सकते हैं और रोजाना इसका सेवन करके सर्दी-जुकाम से राहत पा सकते हैं.
सामग्री:
-तुलसी के 25-30 पत्ते
-1 इंच अदरक
-3 हरी इलायची
-5 लौंग
-15-20 काली मिर्च के दाने
-1 इंच दालचीनी
बनाने की विधि:
1. सबसे पहले तुलसी के पत्तों को अच्छे से धोकर सूती कपड़े से सुखा लें.
2. अदरक का छिलका उतारकर छोटे टुकड़ों में काट लें.
3. इलायची, लौंग, काली मिर्च और दालचीनी को हल्का सा क्रश करें, ताकि इनका स्वाद और गुण काढ़े में अच्छे से निकलें.
4. तुलसी के पत्तों को भी हल्का क्रश कर लें. ध्यान रखें कि सारी सामग्री को पीसने की जरूरत नहीं है, हल्का सा क्रश करने से काढ़े का स्वाद कड़वा नहीं होगा.
अब एक कप पानी लें और इसे पैन में गर्म करें. पानी में धीरे-धीरे क्रश की हुई सभी सामग्री डालें. पहले पानी को मीडियम फ्लेम पर एक मिनट उबालें, फिर गैस धीमी कर दें और 4-5 मिनट तक पकाएं. पानी का स्तर जब आधा रह जाए, तब गैस बंद कर दें.
काढ़े को छानकर एक कप में डालें, अगर चाहें तो इसमें थोड़ा सा दूध या शहद मिलाकर इसे और स्वादिष्ट बनाया जा सकता है. इस काढ़े को रोजाना तीन बार पीने से सर्दी, खांसी, जुकाम और गले की खराश में जल्दी आराम मिलता है.
इस आयुर्वेदिक काढ़े का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित है. कोई साइड इफेक्ट नहीं होता और बच्चों सहित पूरे परिवार के लिए यह लाभकारी है. इसके नियमित सेवन से शरीर की इम्यूनिटी भी मजबूत होती है और मौसम बदलने पर होने वाली बीमारियों से बचाव होता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)