स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग में दो पायदान आगे बढ़ने से उत्साहित निगम के जिम्मेदार एक बार फिर आराम के मूड में आ गए हैं। मॉनीटरिंग के अभाव में न तो सड़कों से कचरा उठ पा रहा है और न ही नालियों के सफाई के बाद उसमें से निकली गाद। नालियों से निकाली गाद क
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डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की व्यवस्था भी लड़खड़ा गई हैं। समय पर वाहन न पहुंचने से लोग घरों के बाद कचरा फेंक रहे हैं। जिससे कई स्थानों पर गंदगी के ढेर दिनभर दिखाई देते हैं। बीते माह ग्वालियर को स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 के सर्वे में 14वें पायदान पर आने पर अवार्ड मिला था। जबकि इससे पहले ग्वालियर का स्थान 16वें पर था। 2 पायदान रैंक बढ़ने के बाद सफाई में सुधार नहीं दिख रहा है।
देखिए…… कहां-कहां डला मिला कचरा
- विनय नगर: यहां के सेक्टर 2 के निवासी कमलेश सिंह का कहना है कि यहां सड़क पर लोग कचरा डालते हैं। निगम के स्वास्थ्य विभाग में शिकायत करने के बाद भी रोड पर कचरा डलना बंद नहीं हुआ।
- पड़ाव चौराहा: यहां पर होटल साया के पास आस-पास के लोग और दुकानदार कचरा फेंक देते हैं। ये कचरा दिनभर डला रहता है।
- एजी पुल: यहां दीवार के बगल से 2 दिन से कचरा पड़ा है। जबकि मदाखलत का ऑफिस भी यहां है।
नालियों से गाद और सड़कों की डस्ट तक नहीं उठ रही
- नदी गेट से गुरुद्वारा की तरफ जाने वाले मार्ग पर निगम स्टाफ ने नाली में जमी गाद तो निकाल दी। लेकिन उसे सड़क पर ही डालकर छोड़ दिया है।
- एजी पुल के बगल में डस्ट सड़क किनारे से निकाली, जिसे मौके पर ही छोड़ दिया। बारिश के बाद अब इसमें गाजर घास तक उग आई है।
- झांसी रोड पर पिछले दिनों मिट्टी को डिवाइडर के किनारे से हटाने की कार्रवाई हुई। उस मिट्टी को उठाने की बजाय डिवाइडर के किनारे डाल दी।
टूटे डस्टबिन भी नहीं बदले… शहर के बाजारों में कचरा न हो इसके लिए जगह-जगह डस्टबिन लगाए थे। उनमें से कई टूटे पड़े है। इसके बाद भी नगर निगम ने टूटे डस्टबिन अब तक नहीं बदलवाए।
इंदौर नगर निगम की तरह यहां भी कामचोरों को बाहर करें: हाई कोर्ट
कचरा निष्पादन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान डोर टू डोर कलेक्शन में बरती जा रही लापरवाही का मुद्दा उठा। सोमवार को सुनवाई के दौरान न्यायमित्र के द्वारा कलेक्शन में बरती जा रही लापरवाही का मुद्दा उठाया। साथ ही डीजल चोरी की भी बात कही गई। इस पर हाई कोर्ट ने ग्वालियर नगर निगम में सफाई का काम कर रहे कामचोरों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए कहा।
डिवीजन बेंच ने इंदौर नगर निगम का उदाहरण देते हुए कहा कि एक बार वहां भी काम न करने वालों को बड़ी संख्या में बाहर का रास्ता दिखाया था। ग्वालियर में भी ऐसा किया जा सकता है। ऐसा करने से कामचोरों को सख्त संदेश जाएगा। वहीं, कोर्ट ने बायो सीएनजी प्लांट, वेस्ट टू एनर्जी और लैंडफिल साइट प्रोजेक्ट के संबंध में भी जानकारी दी गई। सीएनजी प्लांट के संबंध में बताया कि 27 अगस्त को इसके लिए टेंडर आमंत्रित किए हैं।
इसके अलावा अन्य दो प्रोजेक्ट की डीपीआर स्टेट लेवल की तकनीकी कमेटी के समक्ष भेज दी गई है। अगले सप्ताह उन पर निर्णय लिया जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलते ही निगम फिर से प्रस्ताव बनाकर भेजेगी।
इसके बाद राशि स्वीकृत की जाएगी। इसके अलावा हाई कोर्ट ने न्यायमित्र की सलाह पर पर्यावरण से जुड़ी एजेंसी, सिया को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को होगी। सुनवाई में स्वच्छ भारत मिशन के संचालक भी वीसी के माध्यम से जुड़े थे।
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