बस खेत में इन जानवरों को बैठाना शुरू कर दें, 40 साल पहले किसान करते थे ये काम, बिना खर्च जमीन उगलेगी सोना

Desi Khad: मध्य प्रदेश में रीवा के किसानों ने महंगी रासायनिक उर्वरकों से हो रही परेशानी का समाधान अपनी पुरानी परंपरा की ओर लौटकर खोज लिया है. अब खेतों में फिर वही काम हो रहा है, जो चार दशक पहले हुआ करता था. यह तरीका न केवल आर्थिक रूप से किसानों को राहत दे रहा है, बल्कि खेतों की मिट्टी की उर्वरता में भी तेजी से सुधार कर रहा है.

रीवा कृषि महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. आरपी जोशी कहते हैं कि भारत में खाद के रूप में ज्यादातर गाय के गोबर का इस्तेमाल किया जाता है. यह मिट्टी और फसलों के लिए बेहद उपयोगी भी है. लेकिन, क्या आपको पता है कि गाय और भैंस के गोबर से बनी खाद की तुलना में भेड़ और बकरी के गोबर (पिलेट्स) से तैयार खाद ज्यादा असरदार होती है. प्राचार्य से विस्तार से जानें…

गाय के गोबर की खासियत
डाॅ. जोशी के अनुसार, गाय के गोबर से बनी खाद को पारंपरिक रूप से सबसे उत्तम और उर्वरक माना जाता है. गाय का गोबर जैविक खाद के रूप में सबसे ज्यादा प्रभावी होता है, क्योंकि इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम की मात्रा संतुलित होती है. यह मिट्टी की संरचना को सुधारने में भी मदद करता है और फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है.

भैंस के गोबर की खासियत 
भैंस के गोबर से भी खाद बनाई जाती है, लेकिन उसकी उर्वरक क्षमता गाय के गोबर की तुलना में थोड़ी कम होती है. भैंस का गोबर अधिक मात्रा में मिलता है, लेकिन इसमें नाइट्रोजन की मात्रा कम होती है. हालांकि, इसका उपयोग बड़े पैमाने पर खेतों में किया जाता है, खासकर जहां खाद की मात्रा ज्यादा चाहिए.

भेंड या बकरी के गोबर की खासियत 
भेड़ या बकरी के पिलेट्स (गोबर) से तैयार खाद, गाय और भैंस के गोबर से बनी खाद की तुलना में बेहद अधिक उर्वरक होती है. यूं कहें तो भेड़–बकरी का गोबर उर्वरक के रूप में उत्तम होता है. यदि आपके पास इसकी उपलब्धता है, तो बिना सोचे खेत में बढ़–चढ़कर इसका उपयोग करें. इसके लिए खेतों में भेड़ या बकरी के समूहों को बैठाएं.

कम मात्रा में उच्च गुणवत्ता
डॉ. जोशी ने बताया कि भेड़ का गोबर खाद के रूप में बहुत प्रभावी है, लेकिन इसकी उपलब्धता सीमित होती है. इसका उपयोग कम किया जाता है. इसमें नाइट्रोजन की मात्रा बेहद अच्छी होती है, जो फसलों के लिए बहुत लाभदायक है. खेतों में इसकी हल्की मात्रा भी मिट्टी की उर्वरता और फसलों की गुणवत्ता को कई गुना बढ़ा सकता है. मुख्य रूप से छोटे स्तर के खेतों के लिए यह बेहद लाभप्रद साबित हो सकता है.

किसके गोबर से बने सबसे ज्यादा खाद
डॉ. आरपी जोशी बताते हैं कि विंध्य क्षेत्र में गाय के गोबर से बनी खाद का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है. भैंस की तुलना में इसकी उर्वरक क्षमता भी बेहतर होती है. सरलता से उपलब्ध होने की वजह से गाय के गोबर से खाद का निर्माण सबसे अधिक किया जाता है. समझने वाली बात ये कि भैंस का गोबर भी उपयोगी है, लेकिन इसे गाय के गोबर के साथ मिलाकर उपयोग करने से ज्यादा फायदा होता है. जहां तक बात भेड़ या बकरी के पिलेट्स (गोबर) की है, तो गाय और भैंस की तुलना में यह बेहद अधिक उर्वरक होता है. यूं कहें तो भेड़–बकरी का गोबर उर्वरक के रूप में उत्तम होता है.

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *