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Giloy ke fayde: गिलोय का पौधा कोई आम पौधा नहीं है. कई बीमारियों के इलाज के लिए इस पौधे के रस का प्रयोग किया जाता है. यह पौधा आप को आसानी से गांव वह नीम के पेड़ पर मिल जाएगा. कोरोना के समय गिलोय का उपयोग सबसे अधिक बढ़ा था. यह एक बेल नुमा पौधा है. गिलोय लिवर के कार्य को भी बेहतर बनाती है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करती है.
बदलते मौसम के कारण बीमारियां भी तेजी से बढ़ने लगी है. बरसात के मौसम में अक्सर डेंगू मलेरिया जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ती है. जिस कारण लोग बीमार हो जाते है और डॉक्टर के पास इलाज करने के लिए जाते है. आज हम आपको एक ऐसे पौधे के बारे में बताने जा रहे है जो कई बीमारियों के लिए रामबाण है.

गिलोय का पौधा कोई आम पौधा नहीं है, यह पौधा घर में आसानी से उगाए जाने वाली देसी औषधि है. इसका उपयोग प्राचीन काल से लेकर अब तक कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है.

यह एक बेल नुमा पौधा है. इसकी खास विशेषता यह है कि यह जिस पेड़ पर चढ़ती है. उसी पेड़ के गुणों को अपने अंदर समाहित कर लेती है. नीम की गिलोय बहुत ही फायदेमंद मानी जाती है.

आयुर्वेदिक पूर्व चिकित्सक डॉ. सुरेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि गिलोय को आयुर्वेद का अमृत कहा जाता है. यह त्रिदोष शामक मानी जाती है, विशेषकर पित्त और कफ दोष को संतुलित करने में प्रभावी है. यह औषधि जीवाणुरोधी और विषाणुरोधी गुण संक्रमणों से लड़ने में मदद करती है.

खांसी, बुखार और अन्य आम बीमारियों की आवृत्ति और तीव्रता कम होती है. इसके अलावा गिलोय डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू, टाइफाइड के बुखार से निजात दिलाने में मदद करती है.

गिलोय लिवर के कार्य को भी बेहतर बनाती है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करती है. गिलोय एंटी-डायबिटिक गुणों से भरपूर है. यह डायबिटीज के स्तर को कम करने में मदद कर सकती है.