Jabalpur News: ठंड में जन्नत से कम नहीं दिखते नर्मदा के ये घाट, 4000 KM का सफर तय कर आते हैं साइबेरियन बर्ड

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Jabalpur Tourism: साइबेरियन पक्षी हर साल 4 हजार किलोमीटर सफर कर जबलपुर के नर्मदा तट पर आते हैं, तीन महीने रहते हैं और टूरिस्टों को आकर्षित करते हैं. इनको देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग.

Jabalpur News. मध्य प्रदेश का शहर जबलपुर जो ठंड में जन्नत से कम नहीं दिखाई देता. यहां सिर्फ आओ.. आओ… कहने पर पक्षियों का झुंड चला आता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं साइबेरियन पक्षी की, जिनका ठंड होते ही साइबेरिया से जबलपुर शहर में आगमन हो जाता है. यह पक्षी 4 हजार किलोमीटर दूरी तय कर जबलपुर शहर पहुंचते हैं और अपना डेरा जबलपुर के नर्मदा तट किनारे डाल लेते हैं.

साइबेरियन बर्ड्स का झुंड टूरिस्टों को अपनी ओर खींचने लगता है, जहां नर्मदा तट गौरीघाट हो या फिर तिलवारा घाट शहर के तमाम घाटों में विहंगम नजारे टूरिस्ट को देखने को मिलते हैं. ऐसा ही नजारा फिलहाल अभी देखने को मिल रहा है. जहां ठंड आते ही साइबेरियन पक्षियों ने नर्मदा तट किनारे डेरा डाल लिया है. जहां टूरिस्ट इन पक्षियों को दाना डालते हैं, वैसे ही साइबेरियन पक्षियों का झुंड खिंचा चला आता हैं.

साइबेरियन बर्ड नहीं भूलते पता, 3 महीने रहते हैं 
साइबेरियन बर्ड की खासियत है, यह पता नहीं भूलते हैं. यही कारण है की 4 हजार किलोमीटर का सफर तय कर भारत आते हैं और करीब 3 महीने तक जबलपुर में डेरा डाले रहते हैं. वहीं ठंड समाप्त होने के एक सप्ताह पहले अपने देश वापस लौट जाते हैं. इन वर्ड की खासियत है कि इंसानों से करीब 10 गुना ज्यादा इन बर्ड्स की याददाश्त तेज होती है. यह बर्ड ठंडे खून के होते हैं, जिसके कारण साइबेरियन बर्ड नर्मदा तट जबलपुर की ओर रुख करते हैं और इन बर्ड्स के आने के बाद टूरिस्ट की संख्या में भी इजाफा हो जाता है.

घाटों में ही करते हैं प्रजनन, वॉलपेपर से कम नहीं नजारा
साइबेरियन बर्ड खाना, घोसला बनाने से लेकर प्रजनन करने जबलपुर के घाटों में आते हैं. इतना ही नहीं जब इन बर्ड्स को दाना देकर आओ.. आओ… कह कर बुलाया जाता है, तब जो नजारा होता है, किसी वॉलपेपर से कम दिखाई नहीं देता है. लिहाजा साइबेरियन बर्ड्स के साथ सेल्फी लेना हो या फिर फोटोशूट करना, इसकी होड़ टूरिस्ट में मची रहती है. टूरिस्ट नाव में बैठकर सुंदर नजारे को देखकर अचंभित तक हो जाते हैं. मां नर्मदा के घाट में साइबेरियन पक्षी चार चांद लगाने का काम कर रहे हैं.

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें

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ठंड में जन्नत से कम नहीं दिखते नर्मदा के ये घाट, 4000 KM से आते हैं ये पक्षी

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