क्‍या सेहत और फूड-डाइट जैसे मामलों में AI पर भरोसा करना सही है? जानिए क्‍यों है ये खतरनाक

एनडीटीवी की र‍िपोर्ट में रुपाली दत्ता (न्यूट्रिशनिस्ट) कहती हैं, “AI इंफॉर्मेशन का अच्छा स्रोत है, लेकिन ये डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की जगह नहीं ले सकता. खासकर डायबिटीज, PCOD, दिल की बीमारी जैसी कंडीशन में तो बिल्कुल नहीं.’ वहीं पीएचडी न्‍यूट्र‍िशन‍िस्‍ट डॉ. नीचेता भाटिया बताती हैं, ‘AI के जवाब जनरल होते हैं, हर व्यक्ति के लिए अलग नहीं. ज्यादा AI पर निर्भर रहने से हमारी सोचने की क्षमता कम हो सकती है.

AI के नुकसान क्या हैं?

जैसे अगर आपको थायरॉइड है और आप वजन कम करने के ल‍िए AI से डाइट मांगते हैं तो वो आपको सिर्फ “लो-कार्ब डाइट” बताएगा, जबकि आपके लिए अलग डाइट चाहिए.

सिर्फ एक्‍सपर्ट ही नहीं, खुद चैटजीपीटी भी फूड या हेल्‍थ के मामले में अपनी सलाह मानने से इनकार करता है.

जब हमने ChatGPT से पूछा कि क्‍या सेहत या फूड से जुड़ी जानकारी के ल‍िए उसपर भरोसा क‍िया जा सकता है? तो इस टूल ने जवाब दिया,
‘नहीं — किसी भी AI टूल, चाहे मैं ही क्यों न हूँ, से मिली डाइट, फिटनेस या हेल्थ जानकारी पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए. लेकिन इसे स्मार्ट तरीके से उपयोग करने से आपको बहुत फायदा हो सकता है.’

चैटजीपीटी खुद बताया है कि ‘क्यों पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए?

1. AI आपकी मेडिकल हिस्ट्री नहीं जानता
हर व्यक्ति की बॉडी, बीमारियाँ, एलर्जी, मेटाबॉलिज़्म अलग होता है.
AI सामान्य जानकारी देता है, लेकिन personalized medical judgement नहीं दे सकता.

2. कई बार जानकारी 100% सटीक या अप-टू-डेट नहीं होती
डाइट और हेल्थ साइंस लगातार बदलते रहते हैं.
AI कभी-कभी पुराने डेटा या अधूरे संदर्भ पर आधारित सुझाव दे सकता है.

3. कुछ हेल्थ कंडीशन्स में छोटे सलाह भी नुकसान कर सकती हैं
जैसे—थाइरॉयड, PCOS, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, दवाएं चल रही हों, प्रेग्नेंसी आदि.
इन मामलों में सिर्फ डॉक्टर या लाइसेंस्ड न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह ही सही होती है.

वह अपने जवाब में आगे खुद कहता है, ‘AI का रोल Reference + Planning + Awareness जैसा होना चाहिए, न कि डॉक्टर जैसा. AI आपकी समझ बढ़ाता है ताकि आप अपने हेल्थ एक्सपर्ट से बेहतर बात कर सकें. मेडिकल डायग्नोसिस, दवाओं की सलाह, टेस्ट रिपोर्ट की मेडिकल इंटरप्रिटेशन, किसी बीमारी का ट्रीटमेंट, इमरजेंसी हेल्थ सलाह जैसी चीजों के लिए AI टूल्‍स का भरोसा नहीं करना चाहिए. याद रखिए AI आपको शुरुआती दिशा दे सकता है, लेकिन चिकित्सीय फ़ैसले हमेशा मानव विशेषज्ञ ही दें.’

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