क्या सफेद बालों को दोबारा काला करना पॉसिबल है? इस बारे में क्या कहता है मेडिकल साइंस

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Truth About Reversing White Hair: 20-30 साल की उम्र में बाल सफेद होने के कई कारण हो सकते हैं. पोषक तत्वों की कमी, थायरॉइड डिसऑर्डर और जेनेटिक कारणों से भी बाल जल्दी सफेद हो जाते हैं. मेडिकल साइंस के अनुसार अगर बालों के सफेद होने का कारण आनुवंशिक है, तो बालों का दोबारा काला होना संभव नहीं है. पोषण या स्वास्थ्य समस्याओं से सफेद हुए बालों के रंग में थोड़ा बहुत सुधार संभव है, लेकिन दोबारा की तरह काला होने की संभावना बहुत कम होती है.

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सफेद बालों को दोबारा पूरी तरह काला करना पॉसिबल नहीं है.

Gray Hair Myths and Facts: एक जमाने में बालों का रंग लोगों की उम्र को दर्शाता था, लेकिन अब 20-30 साल के युवा भी सफेद बालों की समस्या से जूझ रहे हैं. मेडिकल की भाषा में इसे प्रीमेच्योर ग्रेइंग कहा जाता है. युवाओं के बाल सफेद हो जाएं, तो वे दोबारा काला करने की लाख कोशिशें करते हैं. इसके लिए महंगे हेयर केयर प्रोडक्ट्स का खूब इस्तेमाल करते हैं. हालांकि एक बार बाल सफेद होने पर उनकी रंगत वापस लाना बेहद मुश्किल होता है. इससे परेशान लोग अक्सर यही सवाल पूछते हैं कि क्या सफेद बालों को दोबारा काला किया जा सकता है? चलिए जानते हैं कि इस बारे में मेडिकल साइंस की क्या राय है.

सेहत से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी देने वाली वेबसाइट हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति के बाल उम्र या जेनेटिक कारणों से सफेद हुए हैं, तो उन्हें रिवर्स करना संभव नहीं है. प्रीमेच्योर ग्रेइंग के मामले में आंशिक रिवर्सल यानी नए बालों में रंग वापस आना देखा गया है. अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (AAD) और नेचरल जर्नल की स्टडीज बताती हैं कि सफेद बाल होने पर मेलेनोसाइट स्टेम सेल्स स्टक हो जाते हैं, जिससे पिगमेंट बनना बंद होता है. इसे ठीक करने की रिसर्च जारी है, लेकिन फिलहाल कोई प्रमाणित ट्रीटमेंट नहीं है.

बालों का रंग मेलेनिन पिगमेंट से आता है, जो मेलानोसाइट कोशिकाएं हेयर फॉलिकल में बनाती हैं. 20-30 साल की उम्र में बालों का रंग सफेद होने की वजह जेनेटिक्स, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, प्रदूषण या फैमिली हिस्ट्री हो सकती है. अगर कारण जेनेटिक है, तो मेलेनिन-प्रोड्यूसिंग सेल्स स्थायी रूप से प्रभावित हो जाती हैं और बालों का मूल रंग वापस नहीं लौटता है. जेनेटिक प्रीमेच्योर ग्रेइंग को रिवर्स नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह मेलेनोसाइट्स की स्थायी कमी या डैमेज से होता है.

हालांकि प्रीमेच्योर ग्रेइंग के कई मामलों में सुधार संभव है. विटामिन B12, फोलेट, कॉपर, आयरन या थायरॉयड डिसऑर्डर की कमी मेलेनिन प्रोडक्शन रोक सकती है. इनका इलाज करने से नए उगने वाले बालों में रंग आंशिक रूप से वापस आ सकता है. इसी तरह क्रॉनिक स्ट्रेस से ग्रेइंग होता है. कई रिसर्च से पता चला कि स्ट्रेस कम होने पर कुछ बालों का रंग वापस आ सकता है. स्ट्रेस या मेडिकल कंडीशंस से जुड़े ग्रेइंग में रिवर्सल संभव है, लेकिन एजिंग या जेनेटिक में नहीं है. कुछ रेयर मामलों में दवाओं या टॉपिकल ट्रीटमेंट से रिवर्सल देखा गया है. इंटरनेट पर चलने वाले घरेलू नुस्खे बालों को हेल्दी बना सकते हैं, लेकिन मेलेनिन प्रोडक्शन रिस्टोर नहीं करते हैं. कोई फूड, विटामिन या प्रोडक्ट जेनेटिक ग्रेइंग को परमानेंट रिवर्स नहीं करता. ये सिर्फ बालों की चमक बढ़ा सकते हैं या आगे ग्रेइंग धीमा कर सकते हैं.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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