भारत से बड़ा है या छोटा ईरान, उसमें समा जाएंगे कितने इजरायल, कैसे पिछड़ा इस छोटे से देश से

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भारत से बड़ा या छोटा है ईरान, उसमें समा जाएंगे कितने इजरायल

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ये जवाब आपको हैरान कर देगा कि ईरान का क्षेत्रफल कितना है और आबादी कितनी है. उसमें कितने इजरायल समा जाएंगे. अगर इजरायल इतना छोटा है हर लिहाज से तो ये देश कैसे अब ईरान से ज्यादा ताकतवर लगने लगा है. किस बात ने आगे बढ़ते ईरान को रोक दिया.

पूरी दुनिया में अगर इस समय किसी बात की चर्चा है तो वो इजरायल – अमेरिका के ईरान युद्ध के बारे में है. बेशक अमेरिका ने अब तक इसे युद्ध नहीं कहा है. क्या आपको मालूम है कि ईरान का कुल क्षेत्रफल भारत से कम है या ज्यादा. ये भी बता देते हैं कि ईरान को अगर एरिया के हिसाब से देखा जाए तो इजरायल की स्थिति एक बड़े अपार्टमेंट एक छोटे से कमरे जैसी होगी. तब ये भी उत्सुकता हो सकती है कि इतना बड़ा देश आखिर पिछड़ कैसे गया. जबकि एक जमाने में वो दुनिया का सबसे तेज तरक्की करता हुआ देश था.

पहले बात भारत और ईरान के क्षेत्रफल के बारे में कर लेते हैं. अगर दोनों देशों का नक्शा सामने रखेंगे तो ये तो नजर आ जाएगा कि ईरान का क्षेत्रफल कम है. दरअसल ईरान, भारत के कुछ क्षेत्रफल एकदम आधा है. भारत का क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग किमी है तो ईरान का 16.5 लाख वर्ग किमी. ईरान की आबादी 9.2 करोड़ है तो भारत की 145 करोड़. वैसे ईरान मध्य पूर्व दूसरा सबसे बड़ा देश है. उसकी आबादी का घनत्व भारत के मुकाबले बहुत कम है. वहां रहने वालों के पास रहने की खुली जगह ज्यादा है.

ईरान में 31 प्रांत हैं, जिन्हें वो ओस्तान कहते हैं. 429 जिले हैं, जिन्हें वहां शेह्रेस्तान कहा जाता है. इन 31 प्रांतों का शासन स्थानीय केंद्रों से होता है. यहां गांव भी खूब हैं. भारत में 28 राज्य यानि प्रांत हैं और 8 केंद्र शासित प्रदेश. नवीनतम जानकारी के अनुसार, भारत में कुल जिलों की संख्या लगभग 780 से 806 के बीच है.

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अब आइए जरा ईरान और इजरायल के क्षेत्रफल पर भी निगाह दौड़ा ही लें. जानें आखिर क्यों ईरान को एक बड़ा अपार्टमेंट तो उसके सामने इजरायल को एक छोटा कमरा कहा जाता है. ईरान भौगोलिक रूप से इजरायल से बेहद विशाल है. इजरायल का क्षेत्रफल केवल 22,072 वर्ग किमी है. यानि मौजूदा ईरान में करीब-करीब 75 से 80 इजरायल समा सकते हैं. इजरायल की आबादी केवल 1 करोड़ है.

ईरान इतना बड़ा है कि उसके पास अपनी सैन्य संपत्तियों, परमाणु केंद्रों और मिसाइल ठिकानों को पहाड़ों और रेगिस्तानों के नीचे बहुत दूर-दूर तक छिपाने की जगह है. इसे पूरी तरह नष्ट करना किसी भी सेना के लिए बहुत मुश्किल है. इसके विपरीत इजरायल इतना छोटा है कि वहां एक मिसाइल हमला भी पूरे देश को प्रभावित कर सकता है.

बड़े क्षेत्रफल के कारण ईरान के पास तेल, गैस और खनिजों का विशाल भंडार है, जबकि इजरायल को अपनी ऊर्जा और संसाधनों के लिए तकनीक और आयात पर निर्भर रहना पड़ता है. ईरान की सीमाएं 7 देशों से लगती हैं. उसके पास एक लंबी समुद्री तटरेखा है, जबकि इजरायल चारों तरफ से दुश्मन या अस्थिर देशों से घिरा एक छोटा सा कोना है.

भले ही इजरायल क्षेत्रफल में बहुत छोटा है, लेकिन उसकी अर्थव्यवस्था यानि जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय ईरान के मुकाबले बहुत ज्यादा है. इजरायल अपनी क्वालिटी तकनीक से ईरान की “क्वांटिटी” यानि विशालता से सीधे मुकाबला करने की स्थिति में रहता है.

1970 के दशक तक ईरान और इजरायल के बीच काफी अच्छे संबंध थे. ईरान आर्थिक रूप से इस क्षेत्र की सबसे बड़ी शक्ति बनने की ओर था. पिछले 4 दशकों में दोनों देशों के रास्ते पूरी तरह अलग हो गए. ईरान के पिछड़ने और इजरायल के आगे निकलने की सबसे बड़ी वजह ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति है, जिसके बाद वो दुनिया में अलग थलग पड़ गया. उसकी विदेश नीति पूरी बदल गई. “अमेरिका और इजरायल विरोध” उसकी मुख्य पहचान बन गई.

अमेरिका और पश्चिमी देशों ने ईरान पर इतने कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए कि वह अपनी तेल और गैस की दौलत का सही इस्तेमाल नहीं कर पाया. क्रांति के बाद ईरान के सबसे काबिल इंजीनियर, डॉक्टर और वैज्ञानिक देश छोड़कर चले गए. आज सिलिकॉन वैली में हजारों सफल ईरानी मूल के लोग हैं, जिनका लाभ ईरान को मिलना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.

ईरान पूरी तरह कच्चे तेल पर निर्भर रहा. जब तेल की कीमतें गिरती हैं या प्रतिबंध लगते हैं, तो ईरान की अर्थव्यवस्था बैठ जाती है. उन्होंने नई इंडस्ट्री विकसित करने पर कम ध्यान दिया तो इजरायल के पास प्राकृतिक संसाधन नहीं थे, इसलिए उन्होंने ‘ह्यूमन कैपिटल’ यानि मानव संसाधन पर निवेश किया आज इजरायल दुनिया का हाई-टेक हब है. इंटेल, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के बड़े रिसर्च सेंटर वहां हैं.

ईरान ने अपनी जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा अपने देश के अंदर विकास करने के बजाय “क्षेत्रीय प्रभाव” बढ़ाने में खर्च किया. प्रॉक्सी वॉर के तौर पर लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हूती विद्रोहियों को पैदा करने और उन्हें पालने पोसने में किया. सीरिया में चल रहे संघर्षों में ईरान अरबों डॉलर खर्च करता है.इसके उलट इजरायल ने अपने रक्षा बजट का इस्तेमाल तकनीकी विकास में किया, जिसे बाद में उसने दूसरे देशों को बेचकर मुनाफा भी कमाया.

ईरान की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ और धार्मिक संस्थाओं के नियंत्रण में है. पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार ने व्यापारिक माहौल को खराब कर दिया है.इजरायल एक स्थिर लोकतांत्रिक व्यवस्था है. वहां की न्यायपालिका और संस्थाएं स्वतंत्र हैं, जिससे विदेशी निवेश के लिए निवेशकों का भरोसा बना रहता है.

ईरान में सख्त सामाजिक नियमों और इंटरनेट सेंसरशिप ने युवाओं की रचनात्मकता को दबा दिया है.इजरायल में शिक्षा व्यवस्था बच्चों को सवाल पूछने के लिए प्रेरित करती है, जो बिजनेस और स्टार्टअप की दुनिया में बहुत काम आता है.

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