Is Cancer A Genetic Disease: कैंसर एक घातक बीमारी है, जिसकी चपेट में आकर हर साल लाखों की तादाद में लोग जान गंवा देते हैं. जब शरीर के किसी हिस्से की कोशिकाएं अनकंट्रोल होकर बढ़ने लगती हैं, तब ये कैंसर बन जाती हैं. अक्सर माना जाता है कि कैंसर का खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है, जिनके परिवार में पहले भी यह बीमारी हुई थी. अक्सर लोग इस बात को लेकर कंफ्यूज रहते हैं कि क्या वाकई कैंसर जेनेटिक बीमारी है या फिर यह अन्य कारणों से पैदा होती है. अगर आप भी इस सवाल को लेकर कंफ्यूजन में हैं, तो नई स्टडी में इसकी हकीकत सामने आई है. इस स्टडी में कई हैरान करने वाली बातें सामने आई हैं, जिनके बारे में सभी को जान लेना चाहिए, ताकि कैंसर जैसी बीमारी से बचा जा सके.
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक कैंसर मूल रूप से जेनेटिक बीमारी है, लेकिन अधिकांश कैंसर जेनेटिक जीन और पर्यावरणीय प्रभावों के साथ परस्पर क्रिया करके एक्वायर्ड म्यूटेशंस से उत्पन्न होते हैं. कैंसर कोशिकाओं में आनुवंशिक परिवर्तनों के कारण होता है, फिर भी इनमें से अधिकांश परिवर्तन जिंदगी में एक्वायर्ड होते हैं. उम्र बढ़ने के साथ कोशिकाएं ग्रोथ करती हैं और DNA कॉपी करते समय भी गलतियां होती हैं. इसके अलावा किसी जहरीले पदार्थ या रेडिएशन से एक्सपोजर होता है. ये म्यूटेशन सॉमेटिक म्यूटेशंस (somatic mutations) कहलाते हैं. कुछ लोग जन्म से ही कुछ म्यूटेशन अपने डीएनए में लेकर आते हैं और इन्हें जर्मिलाइन म्यूटेशंस (germline mutations) होते हैं. रिसर्च बताती हैं कि अधिकांश ट्यूमर सॉमेटिक म्यूटेशंस की वजह से बनते हैं. ये म्यूटेशंस उन जीन्स में होते हैं, जो कोशिका वृद्धि, डीएनए मरम्मत या शरीर के इम्यून सिस्टम को कंट्रोल करते हैं.
स्टडी बताती है कि जैसे जैसे समय आगे बढ़ता है, इन म्यूटेशंस की संख्या बढ़ती है. उदाहरण के तौर पर स्मोकिंग, पॉल्यूशन, UV रेडिएशन और कुछ केमिकल्स सॉमेटिक म्यूटेशंस को बढ़ावा देते हैं. यह समझना जरूरी है कि हर म्यूटेशन कैंसर नहीं बनाता है, लेकिन कुछ ड्राइवर म्यूटेशंस होते हैं, जो जो कोशिकाओं को अनकंट्रोल्ड ग्रोथ की ओर धकेल देते हैं. जहां सॉमेटिक म्यूटेशंस ज्यादा सामान्य हैं, वहां आनुवांशिक म्यूटेशंस भी काफी महत्वपूर्ण होते हैं. ये म्यूटेशंस व्यक्ति में जन्म से मौजूद होते हैं और शरीर की हर कोशिका में होते हैं. उदाहरण के लिए BRCA1 या BRCA2 जीन में म्यूटेशन होने से ब्रेस्ट (breast) और अंडाशय (ovarian) कैंसर का जोखिम बहुत बढ़ जाता है. इसी तरह Lynch syndrome जैसे जीनों से कोलन कैंसर या यूटेरिन कैंसर का खतरा बढ़ता है. कुल कैंसर के मामलों में ये आनुवांशिक केस केवल 5 से 10% मामलों में कैंसर का कारण बनते हैं.
भारत में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं और इसका कारण बदलती जीवनशैली, ज्यादा प्रदूषण, शहरीकरण, अनहेल्दी डाइट और HPV, हेपेटाइटिस जैसे इंफेक्शन हैं. आनुवांशिकता की जानकारी से यह तय किया जा सकता है कि कौन सी जनसंख्या या परिवार ज्यादा जोखिम में हो सकते हैं. इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में सुधार हो सकता है. जब कैंसर हो जाए, तब यह जानना काफी महत्वपूर्ण है कि ट्यूमर के अंदर कौन से ड्राइवर म्यूटेशंस मौजूद हैं. आधुनिक जीनोमिक परीक्षण डॉक्टर्स को यह बताते हैं कि किस तरह की दवाएं या इलाज बेहतर काम करेंगे. इसके अलावा अगर डॉक्टर्स को आनुवांशिक म्यूटेशंस मिले, तो परिवार के सदस्यों को भी जांच और संभावित रोकथाम उपाय मिल सकते हैं.
अधिकांश म्यूटेशंस जीवन भर की क्रियाएं और पर्यावरण से आते हैं, इसलिए जीवनशैली सुधारने पर जोर देना चाहिए. तंबाकू छोड़ना, शराब कम करना, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, प्रदूषण से बचाव करना, संक्रमणों के प्रति सावधानी रखना और वैक्सीनेशन जैसे उपाय कैंसर के जोखिम को काफी कम कर सकते हैं. ये कदम सिर्फ व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर स्वास्थ्य लाभ देने वाले साबित होते हैं. अगर किसी परिवार में बहुत से मामले हों, तो जर्मिलाइन जेनेटिक टेस्टिंग की सलाह दी जाती है. यह जांच बताती है कि कोई आनुवांशिक म्यूटेशन है या नहीं. अगर है, तो समय रहते नियमित स्क्रीनिंग कराई जा सकती है और कुछ मामलों में रोकथाम सर्जरी या दवाओं पर विचार किया जा सकता है. इससे रोग की शुरुआत को रोका जा सकता है या इलाज जल्दी शुरू हो सकता है.
कुल मिलाकर नई स्टडी यह सिखाती है कि कैंसर सिर्फ आनुवांशिक नहीं है, लेकिन आनुवंशिकी और पर्यावरण दोनों मिलकर प्रभाव डालते हैं. जीवनशैली बदलकर, पर्यावरणीय जोखिम कम करके और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को अपनाकर कैंसर से बचाव कर सकते हैं. साथ ही अगर कोई आनुवांशिक जोखिम में हो, तो उचित परामर्श और जीन परीक्षण से समय पर निदान और बेहतर इलाज संभव है. इस तरह कैंसर की वृद्धि को नियंत्रित किया जा सकता है और लोगों की जीवन गुणवत्ता सुधारी जा सकती है.