सवा साल की बच्ची के गले से निकाली लोहे की स्प्रिंग, फिर एम्स के डॉक्टरों ने छोटे बच्चों के पेरेंट्स को दी ये जरूरी सलाह

AIIMS Doctors Warning for parents of Kids: एम्स नई दिल्ली के डॉक्टरों ने एक बेहद गंभीर और जान बचाने वाला इलाज करते हुए यमुनानगर की सवा साल की बच्ची की जान बचाई है. 14 महीने की इस बच्ची की खाने की नली (फूड पाइप) में एक बड़ा लोहे का स्प्रिंग फंस गया था, जिसे निकालना काफी मुश्किल ही नहीं बल्कि रिस्की भी था, लेकिन एम्स के डॉक्टरों ने न केवल इस स्प्रिंग को निकाला बल्कि पेरेंट्स को बेहद जरूरी सलाह भी है कि घर की छोटी-छोटी चीजों से बच्चों को दूर रखें क्योंकि ये चीजें उनके लिए कितनी खतरनाक हो सकती हैं, ये इस केस से समझ सकते हैं.

बता दें कि बच्ची को एम्स में बच्चों की इमरजेंसी में लाया गया था. उसे लगभग एक हफ्ते से बार-बार उल्टी हो रही थी और पिछले दो दिनों से उसने ठीक से खाना-पीना भी बंद कर दिया था. माता-पिता को यह पता नहीं था कि बच्ची ने कोई बाहरी चीज निगली है या नहीं, क्योंकि इतने छोटे बच्चे बता नहीं पाते कि उन्होंने क्या निगला है. जब एक्स-रे किया गया तो सब हैरान रह गए. बच्ची की खाने की नली के ऊपरी हिस्से में एक बड़ा धातु का स्प्रिंग फंसा हुआ था.

पहले एक निजी अस्पताल में एंडोस्कोपी से स्प्रिंग निकालने की कोशिश की गई, लेकिन वह बहुत ज्यादा अंदर फंसा हुआ था. आसपास की नली में सूजन और घाव भी हो चुके थे. स्प्रिंग निकालना खतरनाक माना गया, क्योंकि नली फटने का खतरा था. इसलिए बच्ची को तुरंत एम्स भेजा गया.
एम्स में बच्चों के पेट रोग विशेषज्ञों ने जांच की, लेकिन चोट और सूजन ज्यादा होने के कारण उन्होंने सर्जरी टीम को केस सौंप दिया और यह केस पीडियाट्रिक सर्जरी प्रोफेसर डॉ. विशेष जैन ने संभाला.

डॉक्टर जैन ने बताया कि यह बहुत जोखिम भरा मामला था. स्प्रिंग का आकार, उसकी बनावट और लंबे समय से फंसे रहने के कारण खाने की नली फटने और खुली सर्जरी की जरूरत पड़ सकती थी. माता-पिता को सभी संभावित खतरों के बारे में समझाया गया और ऑपरेशन से पहले पूरी तैयारी की गई. बेहोशी (एनेस्थीसिया) की जिम्मेदारी डॉ. पारिन ने संभाली.

ऑपरेशन के दौरान एंडोस्कोपी से पता चला कि स्प्रिंग नली की दीवार में आंशिक रूप से धंस चुका था और अंदर घाव बन चुके थे. डॉक्टरों ने बिना कोई नई चोट पहुंचाए, बहुत सावधानी से आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए स्प्रिंग को धीरे-धीरे घुमाकर बाहर निकाला. बाद में दोबारा जांच की गई और राहत की बात यह रही कि खाने की नली में कोई छेद नहीं हुआ था.

ऑपरेशन के बाद बच्ची की हालत तेजी से सुधरी. अगले ही दिन उसे मुंह से खाना देना शुरू कर दिया गया और अब उसे स्वस्थ हालत में छुट्टी देने की तैयारी है. डॉक्टरों ने बताया कि यह सफलता सर्जरी, गैस्ट्रोएंट्रोएलॉजी, एनेस्थीसिया, नर्सिंग स्टाफ और इमरजेंसी टीम के बेहतरीन तालमेल से संभव हो पाई.
यह मामला माता-पिता और देखभाल करने वालों के लिए एक बड़ी चेतावनी है.

छोटे बच्चों के पेरेंट्स रखें इन बातों का ध्यान
डॉ. जैन ने कहा कि स्प्रिंग, सिक्के, बैटरी, खिलौनों के छोटे हिस्से जैसी चीजें हमेशा छोटे बच्चों की पहुंच से दूर रखें. कई बार बच्चों द्वारा कोई चीज निगलने का पता ही नहीं चलता. अगर बच्चा बिना कारण उल्टी करे, खाना न खाए या ज्यादा लार टपकाए, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं. एक हफ्ते की सामान्य लगने वाली उल्टी दरअसल एक जानलेवा खतरा थी, जिसे समय पर सही इलाज और एम्स के टीमवर्क से टाल दिया. हालांकि बहुत बार बच्चों के लक्षण पेरेंट्स की पकड़ में नहीं आते और ये चीजें जानलेवा हो सकती हैं.

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