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Balaghat millet cake : शिल्पा ने दो साल पहले केक बनाना सीखा और शुरुआत में वह पारंपरिक केक बनाया करती थी. इसके बाद वह धीरे-धीरे मिलेट्स पर काम करना शुरु किया और इसके केक बनाना शुरू किया. उन्होंने अपने बेटे के स्कूल में मिलेट्स के केक प्रेजेंटेशन शुरु किया और उन्हें वहाँ से नई पहचान मिलना शुरु हुई. अब वह अपने केक न सिर्फ लोकल इलाके में बेच रही है बल्कि बालाघाट के अलावा भो
Balaghat millet cake : मध्य प्रदेश का बालाघाट एक आदिवासी बहुल इलाका है. ऐसे में यहां पर मोटे अनाज का उत्पादन भी होता है. एक दौर था जब मिलेट्स यानी मोटे अनाज गुमनामी इतने साल तक रहे. लेकिन बीते कुछ सालों में ये फैंसी फूड की कैटेगरी में शामिल हो रहा है. अब बालाघाट के कोदो, कुटकी और राज्ञी के इस्तेमाल का तरीका बदल रहा है. लोग इनकी रोटी, भात या फिर खीर खाते थे लेकिन अब वह इसका केक भी खा सकते हैं. दरअसल, नई तरह की खोज शुरू करने वाली है बालाघाट के आदिवासी अंचल बैहर की रहने वाली शिल्पा मेरावी ने नया नवाचार शुरू किया है. अब वह नॉर्मल केक की जगह मिलेट्स के केक बनाकर क्षेत्र में अपना नाम बना रही है.
शिल्पा ने दो साल पहले केक बनाना सीखा और शुरुआत में वह पारंपरिक केक बनाया करती थी. इसके बाद वह धीरे-धीरे मिलेट्स पर काम करना शुरु किया और इसके केक बनाना शुरू किया. उन्होंने अपने बेटे के स्कूल में मिलेट्स के केक प्रेजेंटेशन शुरु किया और उन्हें वहाँ से नई पहचान मिलना शुरु हुई. अब वह अपने केक न सिर्फ लोकल इलाके में बेच रही है बल्कि बालाघाट के अलावा भोपाल, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र तक डिलिवर कर रही है.
अब उनके केक के अफसर भी हुए दीवाने
जब उन्होंने मिलेट्स के केक बनाना शुरु किया तो सिर्फ लोकल लेवल पर बेचा करती थी. लेकिन स्थानीय प्रशासनिक अफसरों को भी केक पसंद आया और उन्होंने भी केक लेना शुरु कर दिया. यहां तक कि उनके केक को सरकारी प्रदर्शनी में भी जगह मिलना शुरु हुई, जिसकी लोग जमकर तारीफ भी करने लगे. आगे उन्हें अलग-अलग जगह मिलेट्स को बढ़ावा देने मेले में बुला रहे है.
आम केक से ज्यादा सेहतमंद है ये केक
शिल्पा का कहना है कि पहले वह अंडों से बना केक बनाती थी. लेकिन अब उसकी जगह वह गुड़ का इस्तेमाल कर रही है. इसमें वह रागी, कोदो और कुटकी का इस्तेमाल करती है. साथ ही सुखे मेवे भी डाल रही है. ऐसे में ये केक लोगों के सेहत के लिए भी फायदेमंद है. उनका कहना है कि इस केक में कई तरह के पोषक तत्व है, जिसके ज्यादा खाने पर नुकसान नहीं होते हैं. ऐसे में बच्चे ज्यादा केक भी खा ले तो चिंता की बात नहीं है.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
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