विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में कुछ ही समय बाद सिंहस्थ महाकुंभ का आगाज होने वाला है. जिसमें अवंतिका नगरी मे करोड़ों रुपए की लागत से विकास के कार्य हो रहे हैं. बता दें कि सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश में विकास कार्यों की रफ्तार तेज कर दी गई है. श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है, जिसमें हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार सबसे अहम माना जा रहा है. प्रदेश को जल्द ही एक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट मिलने जा रहा है, जिसकी तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं.
महाकाल की नगरी को मिली सौगात
सिंहस्थ 2028 से पहले यहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एयरपोर्ट विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है. शुरुआती चरण में एयरपोर्ट को इस तरह तैयार किया जाएगा कि यहां एटीआर-72 जैसे छोटे विमानों की सुरक्षित लैंडिंग और टेकऑफ हो सके. इसके लिए आवश्यक निर्माण और आधारभूत ढांचे के विकास की योजना बनाई गई है. सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन ने इस परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेज दिया है. प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा, ताकि तय समयसीमा में एयरपोर्ट तैयार हो सके.
इस क्षेत्र का होगा विस्तार
उज्जैन-देवास रोड पर बनी दताना-मताना की हवाई पट्टी को भी सरकार ने विस्तार करने की योजना बना ली है. बताया जा रहा है कि इसे एयरपोर्ट के रूप में डेवलप किया जाएगा. मप्र सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के बीच एयरपोर्ट निर्माण के लिए एमओयू भी हो चुका है. यही वजह है कि यहां के कामों में तेजी आ रही है. क्योंकि पहले यहां केवल छोटे एटीआर-72 श्रेणी के विमानों को ही संचालित करने की योजना बन रही थी, लेकिन अब इसे विस्तार करने की योजना बन गई है, जिससे यहां पर बड़े स्तर के विमान उतारे जा सकेंगे. यहां अब बोइंग सी-20 के संचालन की तैयारी चल रही है.
सिंहस्थ में मिलेगा फायदा
सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के बीच उज्जैन में हवाई कनेक्टिविटी को लेकर सबसे बड़ा फोकस किया जा रहा है. अनुमान है कि आयोजन के दौरान देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचेंगे. इसी को ध्यान में रखते हुए एयर सेवाओं का विस्तार प्राथमिकता पर रखा गया है, ताकि यात्रियों को सीधे और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके. अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एयरपोर्ट विकसित होने से उज्जैन के लिए डायरेक्ट फ्लाइट संचालन का रास्ता आसान होगा. साथ ही, कमर्शियल विमानों की नियमित आवाजाही भी संभव हो सकेगी.
300 एकड़ में फैलेगी एयरपोर्ट परियोजना
इससे न सिर्फ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि उज्जैन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक उभरते व्यावसायिक और निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने में भी मदद मिलेगी. जानकारी के मुताबिक, एयरपोर्ट परियोजना के लिए पहले 241 एकड़ जमीन की आवश्यकता तय की गई थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाकर लगभग 300 एकड़ करने की योजना बनाई गई है. जमीन का विस्तार होने से भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहतर और विस्तृत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सकेगा, जिससे सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन को बड़ी हवाई सौगात मिल सके.
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