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Indore News: इस विद्रोह का सबसे बड़ा सेंटर इंदौर में स्थित ब्रिटिश रेजिडेंसी था. 1 जुलाई 1857 को होल्कर की सेना के कुछ वफादार सिपाहियों ने जिनमें घुड़सवार और पैदल सेना भी शामिल थी, अचानक रेजिडेंसी पर हमला बोल दिया. इस हमले का नेतृत्व सआदत खान ने किया था.
इंदौर. एक दौर था जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था लेकिन गुलामी की बेड़ियों में जकड़े भारतीयों ने कभी हार नहीं मानी. अपनी हिम्मत कभी टूटने नहीं दी. इसी का नतीजा है कि हमारा भारत जिसे ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था, आजाद हुआ. इस आजादी की कीमत इंदौर के क्रांतिकारियों ने भी चुकाई. उन्होंने उन अंग्रेजी अफसरों को लोहे के चने चबाने और उल्टे पैर भागने पर मजबूर कर दिया था. इंदौर शहर के बीचोंबीच जीपीओ के पास एक ऐसा कुआं स्थित है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां का पानी अंग्रेजी अफसर पीया करते थे और क्रांतिकारियों ने इसमें जहर मिला दिया था.
ब्रिटिश सत्ता की नींव हिला दी
कर्नल डूरंड तो किसी तरह बचकर महू छावनी की ओर भाग निकले लेकिन इस घटना ने इंदौर में ब्रिटिश सत्ता की नींव हिला दी. इसी दौरान स्थानीय विद्रोहियों के एक समूह ने छावनी के भीतर स्थित कुछ महत्वपूर्ण पानी के स्रोतों को दूषित करने और उन्हें अनुपयोगी बनाने का प्रयास किया, जिससे शेष बचे हुए अंग्रेज सैनिकों में हताशा फैल गई. हालांकि इस घटना का कोई ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है.
क्रांतिकारियों को फांसी की सजा
डूरंड सहित शेष बचे अंग्रेज अधिकारियों को यह स्पष्ट हो गया कि वे अब सुरक्षित नहीं हैं. इस स्थिति का फायदा उठाते हुए विद्रोही सैनिकों ने महू छावनी के एक बड़े हिस्से पर प्रतीकात्मक रूप से कब्जा कर लिया. इस कब्जे ने न केवल ब्रिटिश सैन्य शक्ति को गंभीर झटका दिया बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए यह एक संदेश था कि अब भारतीय नेतृत्व में क्रांति शुरू हो चुकी है. हालांकि यह क्रांति पूरी तरह सफल नहीं हो सकी और बाद में अंग्रेजों ने अत्यधिक सेना बुलाकर विद्रोहियों को खदेड़ दिया. इस दौरान पकड़े गए कई क्रांतिकारियों को फांसी की सजा दी गई.
जाली से ढका है कुआं
रेजीडेंसी कोठी जहां कभी अंग्रेज रहा करते थे, वह इलाका इंदौर के नवलखा और GPO के पास स्थित है, जिसके ठीक पास से कान्ह नदी बहती थी. जिस कुएं का जिक्र हमने यहां किया है, वह आज भी केंद्रीय संग्रहालय के परिसर में स्थित है, जिसे जालियों से ढका गया है.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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