Injection given before MRI: एमआरआई से पहले पेशेंट को कौन सी और क्यों लगाई जाती है इंजेक्शन? ये है कारण

What injection is given before an MRI: जब व्यक्ति को कोई शारीरिक समस्या या गंभीर कोई लक्षण नजर आने लगते हैं तो वो डॉक्टर के पास उसकी जांच कराने जाता है. किसी व्यक्ति को कौन सी बीमारी हुई है, इसका पता लगाने के लिए कई तरह के मेडिकल टेस्ट किए जाते हैं. एक्स-रे होता है, ब्लड टेस्ट, स्टूल और यूरिन टेस्ट आदि किए जाते हैं. जब आसानी से बीमारी का पता नहीं चल पाता है, तो इस स्थिति में कई गंभीर मामलों में सिटी स्कैन और एमआरआई (MRI) के जरिए भी बीमारी का पता लगाया जाता है. बात करें एमआरआई यानी मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग की तो इसका उपयोग मुख्य रूप से हार्ट, पेट, दिमाग, रीढ़ की हड्डी, जोड़ों, कैंसर आदि बीमारियों के निदान में किया जाता है. वैसे तो MRI को सेफ माना जाता है, लेकिन एमआरआई कराने से पहले पेशेंट को एक इंजेक्शन दिया जाता है. क्या है वो इंजेक्शन और क्यों किया जाता है इसका इस्तेमाल, जानिए यहां.

क्या है MRI?
एमआरआई को इंग्लिश में (Magnetic Resonance Imaging-MRI) कहते हैं, जो एक नॉन-इन्वेसिव मेडिकल इमेजिंग टेक्नीक है. इसके जरिए शरीर के अंदर मौजूद अंगों, टिशू, हड्डियों की 3डी इमेज ली जाती है. एमआरआई पावरफुल मैगनेट और रेडियो तरंगों का इस्तेमाल करती है. इसमें किसी भी तरह की नुकसानदायक रेडिएशन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, इसलिए ये पेशेंट के लिए पूरी तरह से सुरक्षित होती है.

एमआरआई में शरीर के सॉफ्ट टिशूज जैसे मसल्स, अंग सभी बहुत स्पष्ट और साफ तरीके से नजर आते हैं, जिसकी वजह से ये एक्स-रे की तुलना में काफी बेहतर मेडिकल जांच की टेक्निक है.

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क्यों करते हैं एमआरआई?
जब डॉक्टर एक पेशेंट का एमआरआई करता है तो इसके जरिए मरीज के अंदर कौन सी बीमारी है और वो किस हद तक बढ़ चुकी है, इसकी क्लियर इमेज प्रदान करता है, जो कई बार नॉर्मल टेस्ट, एक्स-रे से नहीं प्राप्त हो पाता है. जैसे कैंसर होने की आशंका है तो इसमें ट्यूमर कहां तक फैल चुका है, ब्लड वेसल्स किस हद तक खराब हो चुके हैं, नसों में सूजन कितनी है, ये सब पता चल जाता है. MRI को सुरक्षित माना जाता है और इसके जरिए चेकअप करने के दौरान कोई दर्द भी नहीं होता.

एमआरआई से पहले कौन सी इंजेक्शन दी जाती है?
जब किसी मरीज को एमआरआई टेस्ट के लिए लैब में ले जाया जाता है, तो उसे एक इंजेक्शन लगाई जाती है. आमतौर पर MRI स्कैन से पहले या उसके दौरान एक कॉन्ट्रास्ट एजेंट गैडोलिनियम आधारित (Gadolinium) इंजेक्शन पेशेंट के नस आईवी (IV) के जरिए दिया जाता है. आईवी एक सॉफ्ट, लचीली सी ट्यूब है, जिसे मरीज के हाथ या बांह की नस में एक छोटी सी सुई या कैथेटर (आईवी लाइन) के जरिए इंजेक्ट किया जाता है. इस कॉन्ट्रास्ट एजेंट की मदद से शरीर के अंदर के भागों, ब्लड वेसल्स, टिशूज, ट्यूमर, सूजन को अधिक क्लियर रूप से दिखाने में कारगर होता है. इसके जरिए आप बीमारी का बेहतर और सटीक निदान पा सकते हैं. हालांकि, मरीज को पहले से कोई किडनी, लिवर आदि संबंधित बीमारी है तो डॉक्टर से साफ बता दें. पहले आपको कंट्रास्ट लगने से कोई एलर्जी हुई है तो ये भी बताएं. वैसे, इसका इस्तेमाल सभी एमआरआई में नहीं किया जाता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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