इंदौर: 30 करोड़ का इंटेलिजेंट सिग्नलिंग सिस्टम नाकाम! नहीं कर पाया ट्रैफिक मैनेजमेंट, अब?

Indore News: इंदौर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के नाम पर कई प्रयोग होते रहते हैं और इसके लिए बड़ी राशि भी खर्च होती है. लेकिन, अब डिजाइनिंग की कमियों के चलते 30 करोड़ की लागत से बीआरटीएस कॉरिडोर पर लगे ITMS यानी Intelligent Traffic Management System को हटाकर इसे रीडिजाइन किया जाएगा. वहीं, एलिवेटेड कॉरिडोर बन जाने के बाद इसकी उपयोगिता भी नहीं के बराबर रह जाएगी.

30 करोड़ की लागत से बने इस ITMS का उद्देश्य बीआरटीएस कॉरिडोर पर ऑटोमेटिक हैवी ट्रैफिक का मैनेजमेंट था, ताकि ट्रैफिक का दबाव जल्द से जल्द काम किया जा सके और जाम की स्थिति ना बने. इस सिस्टम में कैमरे और सिग्नल का कोऑर्डिनेशन के माध्यम से ट्रैफिक को कंट्रोल किया जाना था. लेकिन, डिजाइनिंग में हुई कमियों के चलते यह कभी अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पाया. 11 प्रमुख चौराहों पर लगे ITMS का एक मुख्य उद्देश्य यह भी था कि BRTS कॉरिडोर में चलने वाली आई बसों को प्राथमिकता दी जाए.

यहां लगे थे ITMS
जैसे ही बस किसी चौराहे के पास पहुंचे, सिग्नल अपने आप ग्रीन हो जाए और बस बिना रुके यहां से निकल सके. 11.4 किमी के बीआरटीएस कॉरिडोर में LIG चौराहा, पलासिया, इंडस्ट्री हाउस, शिवाजी वाटिका, गीता भवन, नौलखा, भंवरकुआं, राजीव गांधी, सत्य साईं चौराहा, विजय नगर, रसोमा चौराहा पर ITMS लगाया गया था.

सिर्फ चालान काटने तक सीमित
हकीकत ये कि पिछले कई सालों में बीआरटीएस पर ट्रैफिक का दबाव इतना बढ़ गया कि यह 30 करोड़ का सिस्टम पूरी तरह कारगर साबित नहीं हुआ. कैमरो के चलते केवल चालान काटने वाली मशीन यह बनाकर रह गया था. चालान को प्रायोरिटी देने के चक्कर में आम ट्रैफिक का जाम किलोमीटर लंबा हो जाता था. अपर आयुक्त अभय राजनांदगांवकर ने बताया कि BRTS पर ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए इन सिस्टम को लगाया गया था, लेकिन अब क्योंकि बीआरटीएस कॉरिडोर हट चुका है, ऐसे में केवल डिवाइडर बचेंगे.

इंदौर में 13‌ साल पहले AB रोड पर चलती सड़क के बीच एक बैरिकेड लेने का निर्माण किया गया था, जिसमें केवल आई बस को चलने की अनुमति दी गई थी, इसका उद्देश्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सुलभ और तेज बनाना था. फिलहाल करीब 1 साल से कोर्ट के आदेश के बाद इसे तोड़ने का काम चल रहा है.

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