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Indore Bypass News: इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर इंदौर बाईपास की बदहाली का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था. नितिन गडकरी ने इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए 100 करोड़ की राशि स्वीकृत कर दी.
Indore News: इंदौर शहर की लाइफलाइन कहे जाने वाले इंदौर बाईपास की सूरत अब बदलने वाली है. सालों से गड्ढों और खराब पैचवर्क की मार झेल रहे बाईपास को अब नई तकनीक से बनाया जाएगा, जिससे इसपर गड्ढे ही नहीं होंगे. साथ ही एक सपाट और समतल सड़क भी मिलेगी. ऐसे में वाहनों की रफ्तार भी बढ़ेगी. केंद्र सरकार ने इस व्यस्ततम मार्ग के लिए करीब 100 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत यहां देश की लेटेस्ट जियोग्रिड तकनीक का इस्तेमाल कर सड़क की नई लेयरिंग की जाएगी.
इंदौर बाईपास पर आसपास इंडस्ट्रियल एरिया होने की वजह से भारी वाहनों की आवाजाही रहती है. साथ ही यहां रफ्तार भरते हुए गाड़ियां निकलती हैं, लेकिन अचानक आने वाले गधों की वजह से कहीं दुर्घटनाएं देखने को मिलती हैं. वहीं, इसी वजह से यहां जाम की स्थिति भी बन जाती है. 34 किलोमीटर लंबा या बाईपास करीब 25 साल पुराना है. कई बार पैच वर्क होने के बाद भी गड्ढे और उखड़ी सड़क की वजह से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.
नितिन गडकरी ने लिया संज्ञान
इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर इंदौर बाईपास की बदहाली का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था. नितिन गडकरी ने इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए 100 करोड़ की राशि स्वीकृत कर अधिकारियों को बाईपास की व्यापक कारपेंटिंग और मजबूतीकरण के निर्देश दिए. गडकरी ने स्पष्ट किया कि अब पैचवर्क के बजाय पूरी सड़क को नई तकनीक से तैयार किया जाएगा, ताकि यह अगले कई सालों तक खराब न हो.
क्या होती है जियोग्रीड तकनीक?
सड़क निर्माण में जियोग्रिड एक जादुई जाल की तरह काम करती है. यह सिंथेटिक मटेरियल पॉलिमर से बनी एक ग्रिड या जाली होती है, जिसे सड़क की निचली परतों के बीच बिछाया जाता है. यह जाली सड़क के नीचे पत्थर और मिट्टी को कसकर पकड़ लेती है, जिससे भारी वाहनों के दबाव से सड़क दबती नहीं है. सामान्य सड़क पर जब भारी ट्रक गुजरता है तो पूरा दबाव एक ही जगह पड़ता है, जिससे दरारें आती हैं. जियोग्रिड इस दबाव को पूरी सड़क पर फैला देती है. इसके बाद इसके उपर डामर की परत बिछाई जाती है. नीचे नींव मजबूत होने से डामर एक समान रहता है. इससे सड़क समतल रहती है. गड्ढे नहीं होते. साथ ही वाहन भी रफ्तार से चल पाते हैं. इस तकनीक से बनी सड़कों की उम्र सामान्य सड़कों से 30-40% ज्यादा होती है.
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