इंदौर फिर पहले नंबर पर! देश का पहला प्लांट, कचरे से बनेगा धागा, लाखों में कमाई

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Indore News: लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्लांट के लिए निगम जमीन और बिजली उपलब्ध कराएगा जबकि निजी कंपनी मशीनरी और संचालन का जिम्मा संभालेगी. नगर निगम की गाड़ियां घर-घर और कलेक्शन पॉइंट्स से पुराने कपड़े इकट्ठा करेंगी.

इंदौर. स्वच्छता के लिए पूरे देश में मिसाल बनने के बाद मध्य प्रदेश का इंदौर अब एक ऐसा काम करने जा रहा है, जो देश में पहली बार होने वाला है. नगर निगम के इस काम के बाद खराब कपड़ों के नियोजन की तस्वीर पूरी तरह से बदलने जा रही है. वेस्ट क्लॉथ प्रोसेसिंग प्लांट में बेकार कपड़ों को रूई में तब्दील कर नया धागा बनाया जाएगा‌. खास बात यह है कि इससे नगर निगम की कमाई भी होने वाली है.‌ स्वास्थ्य प्रभारी आश्विन शुक्ला ने लोकल 18 को बताया कि यहां देश का पहला ऐसा संयंत्र लगाया जा रहा है, जहां वेस्ट कपड़ों को सेग्रीगेट कर उससे रुई बनाई जाएगी और उसके बाद इसी रुई से धागा तैयार किया जाएगा. इससे नगर निगम को हर माह 1.75 लाख रुपये की कमाई भी होने वाली है. यह वेस्ट क्लॉथ प्रोसेसिंग प्लांट पीपीपी मॉडल पर तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए HMS कंपनी को कांट्रैक्ट दिया है. वही प्लांट बना रही है. कंपनी ही धागा बनाने से लेकर उसे बेचने तक का काम करेगी. महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कंपनी को 120 दिन में प्लांट तैयार करने का टारगेट दिया है.‌

दरअसल हर साल नगर निगम के पास कपड़ों का ढेर इकट्ठा हो जाता है. नगर निगम के आरआर सेंटर्स और नेकी की दीवार पर लोग अपने इस्तेमाल किए हुए कपड़े छोड़कर चले जाते हैं. इसमें से कुछ जरूरतमंद लोगों के काम आ जाते हैं लेकिन बाकी के कपड़े कचरे में आ जाते हैं. इसी तरह से हर साल लाखों कपड़े एकत्रित हो जाते हैं, जो देवगुराड़िया के ट्रंचिंग ग्राउंड में बड़ी समस्या बनते जा रहे थे. इसी के निपटान को देखते हुए यह योजना तैयार की गई है.‌

कैसे बनेगा धागा?
लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्लांट के लिए निगम जमीन और बिजली उपलब्ध कराएगा जबकि निजी कंपनी मशीनरी और संचालन का जिम्मा संभालेगी. नगर निगम की गाड़ियां घर-घर और कलेक्शन पॉइंट्स से पुराने कपड़े इकट्ठा करेंगी. प्लांट में इन कपड़ों को उनके फैब्रिक और रंग के आधार पर अलग किया जाएगा. खराब कपड़ों को मशीनों के जरिए छोटे-छोटे रेशों में बदला जाएगा और फिर इन रेशों को प्रोसेस कर उनसे औद्योगिक ग्रेड का धागा तैयार किया जाएगा.

कहां होगा इस्तेमाल?
इस प्लांट से निकलने वाले धागे का उपयोग दरी, पायदान, मोटे कपड़े और औद्योगिक उपयोग के कपड़े बनाने में किया जाएगा. साथ ही पोंछे समेत अन्य थर्ड ग्रेड के काम में भी इस धागे का इस्तेमाल हो सकेगा. इससे न केवल पर्यावरण बचेगा बल्कि निगम को हर महीने लगभग 1.75 लाख रुपये का राजस्व भी मिलेगा.‌ इसकी मदद से आसपास अन्य शहरों में कचरा ढेर में पड़े लाखों टन कपड़े के कचरे को प्रोसेस कर उससे भी धागा बनाया जा सकेगा.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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