भारत का देसी जीरा सोडा किंग! ऑटो रिक्शा से रोल्स रॉयस तक का सफर, आज 800 करोड़ की कंपनी का मालिक

Success Story: जब कोई इंसान एक बड़ा सपना देखता है, तो सारी कायनात उसके साथ आकर खड़ी हो जाती है. ऐसा आपने सुना होगा, लेकिन यदि हम आपको ऐसा जीवित उदाहरण दें तो कैसा रहे? मजा आएगा ना! तो… यह स्टोरी एक ऐसे ही जुनूनी आदमी की है, जिसने अपने सफर की शुरुआत बेंगलुरु की सड़कों पर ऑटो चलाकर की, और आज उसकी बनाई हुई कंपनी की वैल्यूएशन करोड़ों में है. यह कहानी है सत्य शंकर (Sathya Shankar) की, जिन्होंने बिंदु जीरा मसाला सोडा (Bindu Jeera Masala Soda) को एक ऐसा ब्रांड बना दिया, जो कोल्ड ड्रिंक की बड़ी-बड़ी विदेशी कंपनियों को टक्कर दे रहा है. उनके हाथ में कभी ऑटो का स्टीयरिंग था, और आज वो एक रोल्स रॉयस (Rolls-Royce) जैसी लग्जरी कार के मालिक हैं. ये सिर्फ एक बिज़नेस की कहानी नहीं है, बल्कि एक दृढ निश्चय और साधारण सोच के असाधारण सफ़र का जिंदा-जागता उदाहरण है.

सत्य शंकर का जन्म कर्नाटक के पुत्तूर के पास बेल्लारे गांव में हुआ था. उनका परिवार खेती-बाड़ी से जुड़ा था और पिता जी गांव के पुजारी थे. घर की आर्थिक हालत ऐसी नहीं थी कि बच्चों को खूब पढ़ा सकें. इसी वजह से सत्य शंकर को अपनी 12वीं के बाद मजबूरन पढ़ाई छोड़नी पड़ी. एक गरीब किसान परिवार के बेटे के लिए बड़ा सपना देखना भी एक विलासिता थी, पर सत्य के अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा शुरू से ही था. उन्हें पता था कि अगर ज़िंदगी बदलनी है, तो बड़े शहर की तरफ कदम बढ़ाना होगा.

ऑटो से कार, कार से ड्रिंकिंग वॉटर

1984 में जब सत्य शंकर महज़ 18 साल के थे, उस समय उनके लिए सबसे जरूरी था पैसा कमाना. उन्होंने केंद्र सरकार की एक सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट स्कीम के तहत लोन लिया और अपना पहला ऑटो-रिक्शा खरीदा. बेंगलुरु की भीड़ भरी सड़कों पर सत्य का ऑटो दौड़ने लगा. वो जी-तोड़ मेहनत करते थे और उनकी मेहनत का नतीजा एक साल के अंदर सामने आया. उन्होंने ऑटो का लोन चुका दिया था. यह उनके लिए सिर्फ एक किश्त चुकाना नहीं था, यह आत्मविश्वास की पहली जीत थी. उनका सपना अब ऑटो तक सीमित नहीं था. उन्होंने अपना ऑटो बेचा और एक पुरानी एंबेसडर कार खरीद ली. अब वो टैक्सी चलाने लगे, जो उन्हें ज़िले की सीमाओं से बाहर दूसरे राज्यों तक ले जाने लगे. इस दौरान, उन्होंने एक बात पर गौर किया कि टूरिस्ट हो या आम आदमी, हर कोई रास्ते में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर (Packaged drinking water) खरीदता था. यह उनके दिमाग में एक छोटे से बिज़नेस आईडिया की तरह बैठ गया. उन्हें लगा कि इस मार्केट में बड़ा स्कोप है.

ऑटो चलाने वाला दे रहा था ऑटो लोन

टैक्सी चलाने में भी सत्य का मन नहीं लगा. उन्हें लगा कि वो एक जगह रुक गए हैं. साल 1987 में उन्होंने अपनी एम्बेसडर कार को भी अलविदा कह दिया और ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स का एक छोटा सा काम शुरू कर दिया. जल्द ही, उन्होंने देखा कि गांव-देहात के लोग गाड़ी खरीदने के लिए बैंक से नहीं, बल्कि छोटे-मोटे लोगों से ऊंची ब्याज दर पर लोन लेते हैं. यहां से उनके दिमाग में दूसरा बिज़नेस आईडिया आया- गाड़ी फाइनेंस करने का. 1994 में उन्होंने अपनी ऑटो फाइनेंस कंपनी प्रवीण कैपिटल (Praveen Capital) शुरू कर दी. एक ऑटो ड्राइवर अब लोगों को ऑटो-रिक्शा खरीदने के लिए लोन दे रहा था. इसी को दिनों और किस्मत का फेर कहा जाता है.

फिर शुरू किया पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर का काम

फाइनेंस के काम में अच्छा चला, लेकिन सत्य शंकर अब FMCG (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) सेक्टर में अपनी किस्मत आज़माना चाहते थे, खासकर ड्रिंकिंग वॉटर के बिज़नेस में, जिसका आईडिया उन्होंने टैक्सी चलाते समय आया था. उनके पास पुत्तूर में अपने पिता की 50 एकड़ ज़मीन थी, जिसमें पानी का एक नैचुरल सोर्स था. उन्होंने पानी की जांच कराई, जो बिल्कुल शुद्ध निकला. साल 2000 में, सत्य शंकर ने अपनी पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की कंपनी शुरू की और उसका नाम बिंदु (Bindu) रखा. कन्नड़ भाषा में इसका मतलब होता है एक बूंद. नाम साधारण, पर इरादे बड़े थे. बिंदु मिनरल वॉटर (Bindu Mineral Water) ने अच्छा काम करना शुरू कर दिया, लेकिन सत्य शंकर को पता था कि यह उनकी मंज़िल नहीं है.

2 साल बाद आया टर्निंग पॉइन्ट

और फिर आया वो टर्निंग पॉइंट… साल 2002 की बात है. सत्य शंकर अपने दोस्तों के साथ नॉर्थ इंडिया (उत्तर भारत) घूमने गए थे. वो सड़कों पर घूम रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक ठेले वाला एक अजीब-सा ड्रिंक बेच रहा है. वह सोडा वॉटर में जीरा पाउडर (Cumin Powder) और नमक मिलाकर लोगों को दे रहा था. भीड़ लगी हुई थी, और लोग बड़े चाव से वो ड्रिंक पी रहे थे. विदेशी कोल्ड ड्रिंक्स के जमाने में, ये देसी ड्रिंक उन्हें बहुत रोचक लगा. सत्य शंकर के दिमाग की बत्ती जल गई!

उन्होंने सोचा, “क्यों न इस देसी स्वाद को एक पैकेज्ड सोडा में बदल दिया जाए?” उन्हें लगा कि हिंदुस्तान को जीरे और मसाले का स्वाद बहुत पसंद है. बस, इसी एक छोटे से आईडिया से बिंदु फिज़ जीरा मसाला (Bindu Fizz Jeera Masala) का जन्म हुआ.

सत्य शंकर ने कर्नाटक लौटकर तुरंत अपनी टीम के साथ फ़ॉर्मूले पर काम करना शुरू कर दिया. कम पैसे और सीमित साधनों के साथ उन्होंने अपने पुत्तूर प्लांट में टेस्टिंग शुरू की. शुरुआत में, यह प्रोडक्ट सफल नहीं हुआ. लोगों को एक जीरा-मसाला सोडा अजीब लगा, क्योंकि मार्केट में सिर्फ मीठी और बढ़िया पैकिंग वाली कोल्ड ड्रिंक्स का दबदबा था. लेकिन सत्य शंकर अपनी देसी सोच पर अड़े रहे. उन्हें पता था कि एक दिन यह स्वाद लोगों के दिल में उतर जाएगा.

देसी फ़्लेवर: उन्होंने इंटरनेशनल फ्लेवर्स को टक्कर देने की बजाय, भारत के पारंपरिक स्वाद (जीरा और मसाला) को चुना. यह एक साहसिक कदम था, क्योंकि उस वक्त कोई बड़ी कंपनी ऐसा नहीं कर रही थी.

कम लागत: उन्होंने अपने पैकेज्ड वॉटर प्लांट की सुविधाओं का इस्तेमाल किया, जिससे नई फैक्ट्री लगाने का बड़ा खर्च बच गया.

टारगेट मार्केट: उन्होंने शुरुआत में अपने ही राज्य कर्नाटक के ग्रामीण और कस्बों वाले इलाकों पर फोकस किया, जहां विदेशी ब्रांड्स की पहुंच कम थी और देसी स्वाद की मांग ज्यादा थी.

धीरे-धीरे लोगों को बिंदु जीरा मसाला सोडा का खट्टा-मीठा, चटपटा स्वाद पसंद आने लगा. यह पचाने में भी अच्छा था, इसलिए यह खाने के बाद पीने के लिए परफेक्ट था. साउथ इंडिया में ज़बरदस्त सफलता मिलने के बाद कंपनी ने दूसरे राज्यों और यहां तक कि UAE, सिंगापुर और मलेशिया जैसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी कदम रखा. बिंदु जीरा सोडा, कोका-कोला (Coca-Cola) और पेप्सी (Pepsi) जैसे बड़े दिग्गजों के सामने एक कड़ी टक्कर देने वाला होमग्रोन ब्रांड (Homegrown brand) बन गया.

बिंदु जीरा की इस अभूतपूर्व ग्रोथ के पीछे सत्य शंकर के कुछ फैसले थे-

  • उन्होंने मार्केटिंग पर करोड़ों खर्च करने की बजाय, अपनी डिस्ट्रीब्यूशन चेन को मज़बूत करने पर ध्यान दिया.
  • गांव-गांव तक छोटे-छोटे किराना स्टोरों तक अपना प्रोडक्ट पहुंचाया, जहां बड़े ब्रांड्स की पकड़ कम थी.
  • आज भी, कंपनी अपने वाल पेंटिंग (Wall painting) जैसे पारंपरिक और असरदार मार्केटिंग तरीकों पर यकीन रखती है, जो आम लोगों से सीधा जुड़ते हैं.
  • सत्य शंकर ने अपनी कंपनी को एस जी ग्रुप (SG Group) नाम दिया, जिसके तहत वे अब ड्रिंकिंग वॉटर, सोडा के अलावा, फ्रूट जूस और स्नैक्स जैसे 55 से ज़्यादा प्रोडक्ट बेचते हैं.

अभी कितना बड़ा है कारोबार

आज, सत्य शंकर की बनाई हुई कंपनी कई करोड़ का बिज़नेस करती है. बिंदु जीरा सोडा का फ्लैगशिप ब्रांड ‘हाउस ऑफ बिंदु’ एक प्राइवेट कंपनी है, जिसका FY2025 में रेवेन्यू 570 करोड़ रुपये रहा है. इस हिसाब से अनुमानित वैल्यूएशन लगभग 800 रुपये आंका जाता है. पूरे SG ग्रुप की बात करें तो कुल रेवेन्यू 900 करोड़ रुपये है, जिसमें प्रवीण कैपिटल जैसे अन्य आर्म्स से 330 करोड़ रुपये का योगदान है. उनका सपना 1000 करोड़ का टर्नओवर छूना है, जिसके लिए वे पूरे देश में और नए प्लांट्स लगाने की तैयारी में हैं. 2023-2025 की मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है और FMCG बेवरेज सेक्टर के रेवेन्यू मल्टीपल्स (1.5-2x) से निकाला गया है. कंपनी दक्षिण भारत में मजबूत है, क्योंकि इसके 2 लाख रिटेल आउटलेट्स हैं और FY2026 तक उत्तर, पूर्व व पश्चिम भारत में विस्तार की योजना बना रही है.

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *