India T20 World Cup 2026: जब सुपर-8 के मैच में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को 76 रनों से हराया, तब आवाज उठने लगी थी कि टीम इंडिया सेमीफाइनल में नहीं जा पाएगी. मगर सूर्यकुमार यादव और उनकी सेना ने अगले दोनों मैच जीतकर अपने आलोचकों को गलत साबित किया. अब 5 मार्च को भारतीय टीम को सेमीफाइनल में इंग्लैंड से भिड़ना है.
भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. ये कुल छठी बार है, जब टीम इंडिया टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंची है, लेकिन 2026 का खिताब भारतीय खेमे के हाथों से फिसलता दिख रहा है. ऐसे 3 बड़े कारण सामने आए हैं, जो भारत के टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब ना जीतने की ओर इशारा कर रहे हैं.
असली अभिषेक शर्मा कहां गायब?
21 पारी, 859 रन, करीब 43 का औसत और 193.5 का तूफानी स्ट्राइक रेट. ये टी20 में अभिषेक शर्मा के साल 2025 के आंकड़े हैं. अभिषेक ने साल 2026 में भी पहली तीन पारियों में 2 अर्धशतक लगाए थे, लेकिन टी20 वर्ल्ड कप में अचानक उन्हें क्या हो गया. वर्ल्ड कप की 5 पारियों में सिर्फ 80 रन. भारतीय टीम को जाहिर तौर पर पुराने अभिषेक शर्मा की कमी खल रही है, जो पावरप्ले में ही गेंदबाजों की धज्जियां उधेड़कर मैच में भारत को जीतने की स्थिति में ला खड़ा करता था.
क्या वरुण चक्रवर्ती की ‘मिस्ट्री’ सबको पता चल गई?
‘मिस्ट्री’ स्पिनर वरुण चक्रवर्ती का अब कोई रहस्य नहीं रह गया है. यह हम नहीं कह रहे बल्कि आंकड़े कुछ ऐसा ही दर्शाते हैं. टी20 वर्ल्ड कप के सुपर-8 मैचों में चक्रवर्ती ने कुल 12 ओवर गेंदबाजी की, जिनमें उन्होंने 122 रन लुटा दिए. दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्होंने 40 से भी ज्यादा रन लुटाए. चक्रवर्ती को टीम इंडिया का एक ट्रम्प कार्ड माना जा रहा था, लेकिन लगातार खराब होता इकॉनॉमी रेट टीम इंडिया की चिंता बढ़ाने का काम कर रहा है.
एकल प्रदर्शन जीत नहीं दिलाएगा
वेस्टइंडीज के खिलाफ सुपर-8 मैच की ही बात कर लें तो संजू सैमसन की 97 रनों की जुझारू पारी ने टीम इंडिया को जीत दिलाई. इस मैच में सूर्यकुमार यादव से लेकर ईशान किशन और अभिषेक शर्मा जैसे बड़े-बड़े सूरमा भी फ्लॉप हो गए थे. वहीं दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह के अलावा कोई नहीं चला, बल्लेबाजी तो पूरी तरह फ्लॉप रही.
पाकिस्तान के खिलाफ भी ईशान किशन की 70 रनों की पारी ना आई होती, तो भारतीय टीम के लिए 150 बनाना भी मुश्किल हो जाता. अधिकांश मैचों में एक-दो खिलाड़ियों ने जीत में बड़ा योगदान दिया, जबकि बाकी फ्लॉप रहे. वहीं चैंपियन बनने की प्रबल दावेदार टीम ऐसी होनी चाहिए जब एक खिलाड़ी फ्लॉप हो तो दूसरा जिम्मेदारी उठाए.
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