भारत ने बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल भेजा: ईरान-इजराइल युद्ध के बीच नुमालीगढ़ रिफाइनरी से सप्लाई शुरू, सालाना 1.80 लाख टन सप्लाई का है समझौता

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नई दिल्ली24 मिनट पहले

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मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से दुनियाभर में एनर्जी पर संकट मंडरा रहा है, ऐसे में भारत ने असम की नुमालीगढ़ रिफाइनरी से क्रॉस-बॉर्डर पाइपलाइन के जरिए बांग्लादेश को डीजल भेजना शुरू कर दिया है। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के चेयरमैन मोहम्मद रेजानुर रहमान ने बताया कि मंगलवार तक करीब 5,000 टन डीजल की पहली खेप बांग्लादेश पहुंच गई है।

ईरान युद्ध के कारण बांग्लादेश में तेल का संकट

बांग्लादेश इस समय ईंधन की भारी किल्लत से जूझ रहा है। इसकी मुख्य वजह अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के चलते ग्लोबल ऑयल सप्लाई में आई रुकावट है। बांग्लादेश अपनी जरूरत का करीब 95% ईंधन मिडिल ईस्ट से आयात करता है।

‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ जैसे रास्तों पर तनाव से सप्लाई बंद है। इससे बांग्लादेश में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं। कई शहरों में सरकार को तेल की राशनिंग करनी पड़ी है, जहां बाइक के लिए 10 लीटर और कारों के लिए 40 लीटर की लिमिट तय की गई है।

असम से दिनाजपुर तक पाइपलाइन से पहुंच रहा तेल

यह डीजल ‘भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन’ के जरिए भेजा जा रहा है। इसका उद्घाटन मार्च 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन पीएम शेख हसीना ने किया था। नुमालीगढ़ रिफाइनरी से शुरू होकर यह पाइपलाइन उत्तरी बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले के पार्बतीपुर डिपो तक जाती है।

बीपीसी के अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार दोपहर 3:20 बजे पंपिंग शुरू हुई। हर घंटे लगभग 113 टन तेल भेजा जा रहा है, जिसे पूरी तरह पहुंचने में करीब 44 घंटे लगेंगे।

भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन नुमालीगढ़ रिफाइनरी से शुरू होकर उत्तरी बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले के पार्बतीपुर डिपो तक जाती है।

भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन नुमालीगढ़ रिफाइनरी से शुरू होकर उत्तरी बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले के पार्बतीपुर डिपो तक जाती है।

सालाना 1.80 लाख टन सप्लाई का है समझौता

भारत और बांग्लादेश के बीच हुए सालाना समझौते के तहत भारत हर साल पाइपलाइन के जरिए 1.80 लाख टन डीजल की सप्लाई करेगा। बीपीसी चेयरमैन रेजानुर रहमान ने बताया, “5,000 टन की यह खेप इसी एग्रीमेंट का हिस्सा है।

अगले छह महीनों में हमें 90,000 टन डीजल मिलने की उम्मीद है, जिससे हमारे देश में ईंधन की उपलब्धता स्थिर हो सकेगी।” पाइपलाइन के जरिए सप्लाई होने से रेलवे टैंकरों के मुकाबले समय और पैसा दोनों की बचत हो रही है।

तनाव के बाद फिर सुधर रहे हैं दोनों देशों के रिश्ते

अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद भारत और बांग्लादेश के ऊर्जा संबंध बिगड़ गए थे। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने भारत के साथ कई समझौतों की समीक्षा की थी।

अडानी के झारखंड पावर प्लांट से बिजली सप्लाई को लेकर भी विवाद हुआ था। हालांकि, अब ढाका में राजनीतिक बदलावों के बाद भारत का डीजल भेजना इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच एनर्जी टायज फिर से पटरी पर लौट रहे हैं।

हसीना के जाने के बाद आई थी रिश्तों में कड़वाहट

शेख हसीना के बाहर होने के बाद अंतरिम सरकार ने भारत के साथ हुए बिजली और गैस समझौतों को ‘शर्तों के मुताबिक प्रतिकूल’ बताया था। बकाया भुगतान न होने के कारण अडानी पावर ने सप्लाई आधी कर दी थी, जिसे मार्च 2025 में भुगतान शुरू होने के बाद बहाल किया गया।

जानकारों का कहना है कि भौगोलिक स्थिति और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को देखते हुए बांग्लादेश के लिए भारत सबसे भरोसेमंद पार्टनर है।

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