नई दिल्ली3 घंटे पहले
- कॉपी लिंक
एक रिपोर्ट के मुताबिक क्विक कॉमर्स के कुल बिजनेस का 70% सेल केवल किराने से आता है।
चीन और अमेरिका के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्विक कॉमर्स मार्केट है। 2024 में यहां 5.6 अरब डॉलर (करीब ₹50 हजार करोड़) का बिजनेस हुआ और 2030 तक ये दोगुना होकर 11 अरब डॉलर (करीब ₹1 लाख करोड़) तक पहुंच सकता है।
खास बात यह है कि भारत ही टॉप-3 देशों में सबसे तेजी से बढ़ रहा है। 2025-2030 के बीच भारत के क्विक कॉमर्स की ग्रोथ रेट 15.5% रहने का अनुमान है। वहीं, अमेरिका के 6.72% और चीन के 7.9% से बढ़ने का अनुमान है।
ग्लोबल फंडिंग का 37% अकेले भारत को
पिछले साल यानी 2024 में दुनियाभर की क्विक कॉमर्स कंपनियों को कुल 2.8 अरब डॉलर (करीब ₹25 हजार करोड़) की फंडिंग मिली, जिसमें में से 37% यानी एक तिहाई हिस्सा भारतीय कंपनियों को ही मिला।
जेप्टो, ब्लिंकिट, स्विगी इंस्टामार्ट जैसी कंपनियां निवेशकों की पहली पसंद बनी हुई हैं। 2021 से अब तक इस सेक्टर में 5 अरब डॉलर (करीब ₹45,000 करोड़) से ज्यादा का निवेश आ चुका है।
क्विक कॉमर्स मतलब 30 मिनट में सामान आपके घर
क्विक कॉमर्स यानी 10 से 30 मिनट के अंदर आपके घर तक सामान पहुंचाना। सामान्य ई-कॉमर्स जैसे- अमेजन और फ्लिपकार्ट में ऑर्डर करने के बाद 1-2 दिन या उससे ज्यादा लगता है, लेकिन क्विक कॉमर्स में बहुत तेज डिलीवरी होती है।

अभी 14 करोड़ ग्राहक, 2030 तक 23 करोड़ होंगे
रेडशीयर की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में 14 करोड़ लोग क्विक कॉमर्स इस्तेमाल कर रहे थे, 2030 तक ये संख्या बढ़कर 23.3 करोड़ हो सकती है। वहीं, 70% GMV (कुल बिक्री) किराने से आता है, लेकिन अब फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में भी तेजी से एक्सपैंशन हो रहा है।
ब्लिंकिट के CEO सतिश एन ने कहा,
शहरी मिलेनियल्स और जेन-Z को तुरंत सामान चाहिए। हम सिर्फ किराना नहीं, कन्वीनियंस को भी प्रायोरिटी दे रहे हैं।

Zomato के फाउंडर दीपिंदर गोयल का अनुमान
आज क्विक कॉमर्स 5-6 अरब डॉलर का मार्केट है, हर साल 40-50% की रफ्तार से बढ़ रहा है। अगर टियर-2 शहरों में सही से पहुंच गए तो 2030 तक 50 अरब डॉलर तक जा सकता है।

———————————
ये खबर भी पढ़ें…
क्विक-कॉमर्स का खेल; ₹57 का सामान ₹200 में आ रहा: जेप्टो-ब्लिंकिट जैसी क्विक डिलीवरी कंपनियां बारिश और छोटे ऑर्डर के नाम पर चार्ज ले रहीं

क्विक कॉमर्स कंपनियां चुपचाप ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही हैं। इसके लिए डिलीवरी के अलावा हैंडलिंग चार्ज, मेंबरशिप फीस, रेन फीस, प्रोसेसिंग फीस, प्लेटफॉर्म फीस और व्यस्त समय में सर्ज चार्ज भी वसूले जा रहे हैं। यह सब स्टैंडर्ड डिलीवरी और प्लेटफॉर्म चार्ज से अलग है।
आईटी प्रोफेशनल सुरेश ने जब जेप्टो से 57 रुपए के स्नैक्स मंगवाए तो बिल 200 रुपए पहुंच गया। इसमें 13 रुपए हैंडलिंग चार्ज, 35 रुपए स्मार्ट कार्ट फी, 75 रुपए डिलीवरी चार्ज और 1 रुपए मेंबरशिप फीस जुड़ी थी। जीएसटी ने कीमत और बढ़ा दी।
पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…