टैरिफ टेंशन के बीच डॉलर का विकल्प तलाश रहा भारत? जानें मुख्य आर्थिक सलाहकार का जवाब

V Anantha Nageswaran On Dollar: अमेरिका के साथ चल रहे टैरिफ टेंशन के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिकी डॉलर का विकल्प भारत तलाश रहा है. मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने इस बारे में बिल्कुल साफ कर दिया है कि वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर के विकल्प के रूप में किसी अन्य करेंसी के इस्तेमाल पर भारत किसी भी तरह का कोई विचार नहीं कर रहा है.

बुधवार को एक सवाल के जवाब में मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि भारत ऐसी किसी पहल का हिस्सा नहीं है. हालांकि, पिछले साल अक्टूबर में रूस के कज़ान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत और अन्य ब्रिक्स देशों ने स्थानीय करेंसी में सीमा पार भुगतान निपटान पर विचार किया था. इसके साथ ही, एक विशेष ‘ब्रिक्स मुद्रा’ लाने पर सहमति जताई थी.

डॉलर का फिलहाल कोई विकल्प नहीं

नागेश्वरन का कहना है कि इस समय अमेरिकी डॉलर का कोई व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध नहीं है. इसके उभार में अभी लंबा समय लग सकता है. उन्होंने बताया कि केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को विविधीकृत आधार पर बनाए रखते हैं. साथ ही, रिजर्व बैंक ने पिछले कुछ वर्षों में सोने की खरीद में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है. मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि इसलिए सोने सहित विदेशी मुद्रा भंडार की संरचना पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है.

ब्रिक्स सम्मेलन में क्या कहा गया था?

अक्टूबर 2024 में आयोजित 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में कहा गया था कि व्यापार बाधाओं को कम करने और भेदभाव-रहित पहुंच के सिद्धांत पर आधारित तेज, कम लागत वाले, अधिक कुशल, पारदर्शी, सुरक्षित और समावेशी सीमा-पार भुगतान साधनों की ज़रूरत है. घोषणापत्र में यह भी कहा गया था कि ब्रिक्स देशों और उनके व्यापारिक साझेदारों के बीच वित्तीय लेन-देन में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग का स्वागत किया जाएगा.

ब्रिक्स दुनिया की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं. इसका उद्देश्य बहुपक्षीय मंचों पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साझा दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है.

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