इजरायल का गुरु बना भारत, एम्स में सीखी तकनीक, देश लौटकर डॉक्टरों ने की पहली ऐसी सर्जरी, नहीं बहा एक बूंद खून

Aiims New Delhi and Israel Surgery technique: अभी तक भारत इजराइल से तकनीक सीखता था और तकनीकी सामान मंगाता था, लेकिन इस बार भारत इजराइल का गुरु बन गया है और उस देश में मेक इन इंडिया मेडिकल तकनीक का डंका बज रहा है. देश के नंबर एक अस्पताल, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स नई दिल्ली) के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. पी शरत चंद्र की इजाद की हुई तकनीक से इजराइल में पहली सफल ब्रेन सर्जरी की गई है. यह ऐसी सर्जरी थी जिसमें एक बूंद खून की नहीं बही और 12 साल की मरीज ठीक हो गई है.

इजराइल के तेल अवीव मेडिकल सेंटर के न्यूरोसर्जिकल विभाग के प्रोफेसर जोनाथन रोथ और प्रोफेसर इडो स्ट्रॉस ने पहली बार एम्स से सीखी हुई आरओटीसीएच प्रक्रिया से सर्जरी की है. इस तकनीक का इस्तेमाल ड्रग रेसिस्टेंट मिर्गी के दौरों से जूझ रही एक 12 साल की बच्ची पर किया गया,जिसका सफल परिणाम आने के बाद प्रो. रोथ और प्रो. स्ट्रॉस ने दिल्ली एम्स को ईमेल भेजकर आभार और खुशी जाहिर की.
पहली बार इजराइल में एम्‍स नई द‍िल्‍ली में सीखी तकनीक से सर्जरी करते डॉक्‍टर.

News18hindi से बातचीत में ब्लडलेस ब्रेन सर्जरी की तकनीक इजाद करने वाले एम्स के न्यूरोसर्जरी हेड प्रो. शरत चंद्र ने बताया, ‘मिर्गी की बीमारी इतनी खतरनाक होती है कि किसी-किसी मरीज को एक-एक दिन में 100-100 दौरे पड़ते हैं. आक्रामक मिर्गी से जूझ रहे मरीजों पर दवाओं का असर भी नहीं होता और मरीज की हालत बिगड़ती जाती है. ऐसी स्थिति में बहुत बड़ी हेमिस्फेरोटॉमी सर्जरी की जाती है और पेशेंट के ब्रेन के आधे हिस्से को काट दिया जाता है. इससे मरीज ठीक होने लगता है, लेकिन इस प्रकिया में काफी खून बहता है, रिकवरी में बड़ा लंबा समय लगताहै. इसके विकल्प के रूप में मैंने ब्ल्डलेस रोबोटिक थर्मोकोएगुलेटिव हेमिस्फेरोटॉमी एक नई तकनीक विकसित की. इस सर्जरी में न तो ब्रेन में कोई कट लगता है, न खून बहता है और न कोई इंफेक्शन का खतरा होता है, इसे रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल कर किया जाता है.’

‘इस तकनीक से सबसे पहले एम्स के अंदर 40 बच्चों की ब‍िना एक बूंद भी खून बहाए सर्जरी की गई. जिसकी सफलता के बाद इजराइल के डॉक्टरों ने इसे सीखने की इच्छा जताई. कुछ दिन पहले वहां के डॉक्टर यहां आए और इसे सीखकर गए. अब पहली बार वहां इस तकनीक का इस्तेमाल कर एक बच्ची की जान बचाई गई है.’

इजराइल के तेल अवीव की ओर से भेजे गए ईमेल में डॉ. जोनाथन रोथ ने लिखा कि पीड़ित बच्ची के ब्रेन के बाएं हिस्से में एपिलेप्सिया पार्शियलिस कंटीनुआ डेवलप हो रही थी, ऐसे में बच्ची न तो बोल पाती थी और न ही उसके शरीर का आधा हिस्सा हिल डुल पाता था, लेकिन इस सर्जरी के अगले दिन ही बच्ची ने अपने माता-पिता से बात की और वह पूरे शरीर को हिला पा रही थी, इतना ही नहीं उसके दौरे भी खत्म हो गए.

डॉ. शरत चंद्र ने कहा कि यह सर्जरी अभी तक सिर्फ एम्स के अंदर ही इस्तेमाल की जाती है. पहली बार यह एम्स के बाहर इस्तेमाल हुई है.

भारत में सवा करोड़ के आसपास मिर्गी के मरीज
न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रोफेसर मंजरी त्रिपाठी ने बताया, ‘दुनिया भर में 50 मिलियन से ज्यादा लोग मिर्गी के दौरों से पीड़ित हैं. वहीं भारत में इन मरीजों की संख्या करीब सवा करोड़ के आसपास है. आमतौर पर मिर्गी के 75 फीसदी मामलों में मरीजों का इलाज दवाओं से होता है और वे ठीक भी हो जाते हैं लेकिन 25 फीसदी ऐसे भी मामले आते हैं, जिन मरीजों पर मिर्गी की दवा असर नहीं करती और वह ड्रग रेसिस्टेंट मिर्गी में बदल जाती है. ऐसे केसेज में सर्जरी करनी पड़ती है. एम्स ऐसे कई सर्जिकल प्रोग्राम चलाता है, अच्छा है कि इजराइल ने इसका लाभ उठाया है.’

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *